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छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

८२ | छान्दोग्योपनिषद् | [ अध्याय १

८२छान्दोग्योपनिषद्[ अध्याय १

| रभिप्रेता—स तथैवैतदेवाक्षरं स्वरममृतमभयं प्रविशति ।<br><br>तत्प्रविश्य च राजकुलं प्रविष्टानमिव राज्ञोऽन्तरङ्गबहिरङ्गतावन्न परस्य ब्रह्मणोऽन्तरङ्गबहिरङ्गताविशेषः, किं तर्हि ?<br><br>यदमृता देवा येनामृतत्वेन यदमृता अभूवंस्तेनैवामृतत्वेन विशिष्टस्तदमृतो भवति न न्यूनता नाप्यधिकतामृतत्व इत्यर्थः ॥५॥ | ही है—वह उसी प्रकार ( उन देवताओंके ही समान ) इस अमृत और अभयरूप अक्षरमें ही प्रविष्ट हो जाता है ।<br><br>तथा उसमें प्रविष्ट होनेपर, जिस प्रकार राजकुलमें प्रवेश करनेवालोंमें कोई राजाके अन्तरङ्ग रहते हैं और कोई बहिरङ्ग रहते हैं, इस प्रकार परब्रह्मके अन्तरङ्ग-बहिरङ्गताका भेद नहीं रहता । तो फिर क्या रहता है ? जिस अमृतत्वसे देवगण अमर हो गये थे उसी अमृतत्वसे विशिष्ट होकर यह भी उन्हींके समान अमर हो जाता है । इसके अमृतत्वमें न तो न्यूनता रहती है और न अधिकता ही ॥ ५ ॥ |

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—: ० :—
इतिच्छान्दोग्योपनिषदि प्रथमाध्याये
चतुर्थखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥४॥

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पञ्चम खण्ड

ओंकार, उद्गीथ और आदित्यका अभेद

प्राणादित्यदृष्टिविशिष्टस्योद्गीथ-<br>स्योपासनमुक्तमेवानूद्य प्रणवोद्गी-<br>थयोरेकत्वं कृत्वा तस्मिन्प्राण-<br>रश्मिभेदगुणविशिष्टदृष्ट्याक्ष-<br>रस्योपासनमनेकपुत्रफलमिदानीं<br>वक्तव्यमित्यारभ्यते—पूर्वोक्त प्राण और आदित्यदृष्टिसे विशिष्ट उद्गीथोपासनाका ही अनुवाद (पुनरुल्लेख) कर प्रणव और उद्गीथकी एकता करते हुए अब उसी प्रसङ्गमें प्राण और रश्मियोंके भेदरूप गुणसे युक्त दृष्टिसे उस अक्षरकी (उद्गीथावयवभूत ओंकारकी) अनेक पुत्ररूप फलवाली उपासनाका निरूपण करना है—इसीलिये [आगेका ग्रन्थ] आरम्भ किया जाता है—

अथ खलु य उद्गीथः स प्रणवो यः प्रणवः स उद्गीथ इत्यसौ वा आदित्य उद्गीथ एष प्रणव ओमिति ह्येष स्वरन्नेति ॥ १ ॥

निश्चय ही जो उद्गीथ है वही प्रणव है और जो प्रणव है वही उद्गीथ है। इस प्रकार यह आदित्य ही उद्गीथ है, यही प्रणव है; क्योंकि यह (आदित्य) 'ॐ' ऐसा उच्चारण करता हुआ ही गमन करता है ॥ १ ॥

अथ खलु य उद्गीथः स प्रणवो बह्वृचानाम्, यश्च प्रणव-निश्चय ही जो उद्गीथ है वही ऋग्वेदियोंका प्रणव है तथा उनका