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छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

६९२ छान्दोग्योपनिषद् [ अध्याय ६

६९२ छान्दोग्योपनिषद् [ अध्याय ६

त्यन्तदुर्लक्ष्यं यदु अप्यविज्ञात-<br>मिव विशेषतोऽगृह्यमाणमभूत्त-<br>दप्येतासामेव तिसृणां देव-<br>तानां समासः समुदाय इति<br>विदाञ्चक्रुः ।<br>एवं तावद्बाह्यं वस्त्वग्न्या-<br>दिवद्विज्ञातम्, तथेदानीं यथा<br>नु खलु हे सोम्येमा यथोक्ता-<br>स्तिस्रो देवताः पुरुषं शिरः-<br>पाण्यादिलक्षणं कार्यकारण-<br>संघातं प्राप्य पुरुषेणोपयुज्य-<br>मानास्त्रिवृत्त्रिवृदेकैका भवति,<br>तन्मे विजानीहि निगदत<br>इत्युक्तवाह ॥ ६-७ ॥दुर्लक्ष्य और अविज्ञात-सा अर्थात्<br>विशेषरूपसे ग्रहण नहीं किया जा<br>सकता था वह भी इन तीन<br>देवताओंका ही समूह है—ऐसा<br>उन्होंने जाना था।<br>इस प्रकार तो बाह्य वस्तुएँ<br>अग्नि आदिके समान जानी गयीं।<br>अब, हे सोम्य ! जिस प्रकार वे<br>उपर्युक्त तीनों देवता मस्तक और<br>हाथ आदि अङ्गोंवाले शरीर एवं<br>इन्द्रियोंके संघातस्वरूप पुरुषको प्राप्त<br>होकर पुरुषसे उपयोग की जाती<br>हुई प्रत्येक त्रिवृत्-त्रिवृत् हो जाती<br>है वह मेरे द्वारा—मेरे कथन<br>करनेपर तू जान। ऐसा कहकर<br>वह कहने लगा ॥ ६-७ ॥

इतिच्छान्दोग्योपनिषदि षष्ठाध्याये चतुर्थखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ ४ ॥

पञ्चम खण्ड

अन्न आदिके त्रिविध परिणाम

अन्नमशितं त्रेधा विधीयते तस्य यः स्थविष्ठो धातुस्तत्पुरीषं भवति यो मध्यमस्तन्मांसं योऽणिष्ठस्तन्मनः ॥ १ ॥

खाया हुआ अन्न तीन प्रकारका हो जाता है । उसका जो अत्यन्त स्थूल भाग होता है, वह मल हो जाता है, जो मध्यम भाग है वह मांस हो जाता है और जो अत्यन्त सूक्ष्म होता है वह मन हो जाता है ॥ १ ॥

संस्कृत-भाष्यहिन्दी-व्याख्या
अन्नमशितं भुक्तं त्रेधा विधीयते जाठरेणाग्निना पच्यमानं त्रिधा विभज्यते । कथम् ? तस्यान्नस्य त्रिधा विधीयमानस्य यः स्थविष्ठः स्थूलतमो धातुः स्थूलतमं वस्तु विभक्तस्य स्थूलोऽंशः, तत्पुरीषं भवति; यो मध्यमोऽंशो धातुरन्नस्य, तद्रसादिक्रमेण परिणम्य मांसं भवति; योऽणिष्ठोऽणुतमो धातुः, स ऊर्ध्वं हृदयं प्राप्य सूक्ष्मासु हिताख्यासु नाडीष्वनुप्रविश्य वागादिकरणसंघातस्यखाया हुआ अन्न तीन प्रकारका हो जाता है अर्थात् जठराग्निद्वारा पचाये जानेपर वह तीन भागोंमें विभक्त हो जाता है । सो किस प्रकार ?—तीन भागोंमें विभक्त होते हुए उस अन्नका जो स्थविष्ठ-स्थूलतम धातु—सबसे स्थूल वस्तु यानी विभक्त हुए अन्नका जो स्थूल अंश होता है वह मल हो जाता है । तथा जो अन्नका मध्यम अंश यानी मध्यम धातु होता है वह रसादि क्रमसे परिणत होकर मांस हो जाता है और जो अणिष्ठ—अणुतम धातु होता है वह ऊपरको ओर हृदयमें पहुँचकर हिता नामकी सूक्ष्म नाड़ीमें प्रवेश कर वायु आदि