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छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

६२८ छान्दोग्योपनिषद् [ अध्याय ६

६२८ छान्दोग्योपनिषद् [ अध्याय ६


| निष्ठधातुरूपेण मनःप्राणवाच उपचिन्वन्ति स्वजात्यनतिक्रमेणेति दुर्विज्ञेयमित्यभिप्रायः; अतो भूय एवेत्याद्याह । <br><br> तमेवमुक्तवन्तं तथास्तु सोम्येति होवाच पिता—शृण्वत्र दृष्टान्तं यथैतदुपपद्यते यत्पृच्छसि ॥ ४ ॥ | और स्नेह आदि अपनी जातिका अतिक्रम न करते हुए सूक्ष्मतम-रूपसे मन, प्राण और वाक्का पोषण करते हैं—यह जानना बहुत कठिन है—ऐसा उसका अभिप्राय है । इसीसे उसने 'भूय एव' इत्यादि कहा है । <br><br> इस प्रकार कहनेवाले उस (श्वेतकेतु) से पिताने कहा—'हे सोम्य ! अच्छा, जो कुछ तू पूछता है वह जिस प्रकार उपपन्न हो सकता है इस विषयमें दृष्टान्त श्रवण कर' ॥ ४ ॥ |


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इतिच्छान्दोग्योपनिषदि षष्ठाध्याये पञ्चमखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ ५ ॥

षष्ठ खण्ड

—: ० :—

अन्न आदिका सूक्ष्म भाग ही मन आदि होता है

दध्नः सोम्य मध्यमानस्य योऽणिमा स ऊर्ध्वः समुदीषति तत्सर्पिर्भवति ॥ १ ॥

हे सोम्य ! मथे जाते हुए दहीका जो सूक्ष्म भाग होता है वह ऊपर इकट्ठा हो जाता है; वह घृत होता है ॥ १ ॥

दध्नः सोम्य मध्यमानस्य योऽणिमाणुभावः स ऊर्ध्वः समुदीषति संभूयोर्ध्वं नवनीतभावेन गच्छति तत्सर्पिर्भवति ॥ १ ॥हे सोम्य ! मथे जाते हुए दहीका जो अणिमा—सूक्ष्मांश होता है वह 'ऊर्ध्वः समुदीषति'—इकट्ठा होकर नवनीतरूपसे ऊपर आ जाता है। वह घृत होता है ॥ १ ॥
यथायं दृष्टान्तः—जैसा कि यह दृष्टान्त है—

एवमेव खलु सोम्यान्नस्याश्यमानस्य योऽणिमा स ऊर्ध्वः समुदीषति तन्मनो भवति ॥ २ ॥

उसी प्रकार हे सोम्य ! खाये हुए अन्नका जो सूक्ष्म अंश होता है वह सम्यक् प्रकारसे ऊपर आ जाता है, वह मन होता है ॥ २ ॥

एवमेव खलु सोम्यान्नस्यौदनादेरश्यमानस्य भुज्यमानस्यौदर्येणाग्निना वायुसहितेन खजेनेव मध्यमानस्य योऽणिमा स ऊर्ध्वः समुदीषति;तन्मनो भवति, मनो-उसी प्रकार हे सोम्य ! अश्यमान अर्थात् भक्षण किये जाते हुए भात आदि अन्नका जो सूक्ष्म भाग होता है वह मथानीके समान वायुसहित जठराग्निद्वारा मथे जानेपर ऊपर आ जाता है, वह