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छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

१६४ | छान्दोग्योपनिषद् | [ अध्याय २

१६४छान्दोग्योपनिषद्[ अध्याय २
फलम्—इस उपासनाका फल—

कल्पन्ते हास्मा ऋतव ऋतुमान्भवति य एतदेवं विद्वानृतुषु पञ्चविधँसामोपास्ते ॥ २ ॥

जो इसे इस प्रकार जाननेवाला पुरुष ऋतुओंमें पाँच प्रकारके सामकी उपासना करता है उसे ऋतुएँ अपने अनुरूप भोग देती हैं और वह ऋतुमान् ( ऋतुसम्बन्धी भोगोंसे सम्पन्न ) होता है ॥ २ ॥

कल्पन्ते ह ऋतुव्यवस्थानुरूपं भोग्यत्वेनास्मा उपासकायर्तवः। ऋतुमानार्तवैर्भोगैश्च संपन्नो भवतीत्यर्थः ॥ २ ॥इस उपासनाके लिये ऋतुएँ अपने कालकी व्यवस्थाके अनुरूप फल भोग्य-रूपसे उपस्थित करनेमें समर्थ होती हैं और वह ऋतुमान् होता है, अर्थात् ऋतु-सम्बन्धी भोगोंसे सम्पन्न होता है ॥ २ ॥

इतिच्छान्दोग्योपनिषदि द्वितीयाध्याये पञ्चमखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ ५ ॥

षष्ठ खण्ड

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पशुविषयक पाँच प्रकारकी सामोपासना

पशुषु पञ्चविधँसामोपासीताजा हिंकारोऽवयः प्रस्तावो गाव उद्गीथोऽश्वाः प्रतिहारः पुरुषो निधनम् ॥ १ ॥

पशुओंमें पाँच प्रकारके सामकी उपासना करे। बकरे हिंकार हैं, भेड़ें प्रस्ताव हैं, गौएँ उद्गीथ हैं, अश्व प्रतिहार हैं और पुरुष निधन है ॥ १ ॥

पशुषु पञ्चविधं सामोपासीत । सम्यग्वृत्तेष्वृतुषु पशव्यः काल इत्यानन्तर्यम् । अजा हिंकारः, प्राधान्यात्प्राथम्याद्वा, "अजः पशूनां प्रथमः" इति श्रुतेः । अवयः प्रस्तावः, साहचर्यदर्शनादजावीनाम्, गाव उद्गीथः, श्रैष्ठ्यात् । अश्वाः प्रतिहारः, प्रतिहरणात्पुरुषाणाम् । पुरुषो निधनम्, पुरुषाश्रयत्वात्पशूनाम् ॥ १ ॥पशुओंमें पाँच प्रकारके सामकी उपासना करे। ऋतुओंके ठीक-ठीक बरतनेसे पशुओंके लिये अनुकूल समय रहता है इसलिये यह उपासना उसके पीछे कही गयी है। सबमें प्रधान होनेके कारण अथवा "पशुओंमें सर्वप्रथम बकरा है" इस श्रुतिके अनुसार सबसे पहले होनेके कारण बकरे हिंकार हैं। बकरे और भेड़ोंका साहचर्य देखा जानेसे भेड़ें प्रस्ताव हैं। सर्वश्रेष्ठ होनेके कारण गौएँ उद्गीथ हैं। पुरुषोंका प्रतिहरण (वहन) करनेके कारण घोड़े प्रतिहार हैं तथा पशुवर्ग पुरुषके आश्रित हैं, अतः पुरुष निधन है ॥ १ ॥

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