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छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

१५८ | छान्दोग्योपनिषद् | [ अध्याय २

१५८छान्दोग्योपनिषद्[ अध्याय २

| दग्नेः । पृथिवी निधनम्, तत आगतानामिह निधनात् ॥२॥ | स्थानसे दूसरे स्थानपर ले जाना) होता है और पृथिवी निधन है, क्योंकि वहाँसे आये हुए प्राणियोंको इसीमें रक्खा जाता है ॥ २ ॥ |


उपासनफलम्—उपासनाका फल—

कल्पन्ते हास्मै लोका ऊर्ध्वाश्चावृत्ताश्च य एतदेवं विद्वाँल्लोकेषु पञ्चविधं सामोपास्ते ॥ ३ ॥

जो इसे इस प्रकार जाननेवाला पुरुष लोकोंमें पञ्चविध सामकी उपासना करता है उसके प्रति ऊर्ध्व और अधोमुख लोक भोग्यरूपसे उपस्थित होते हैं ॥ ३ ॥

| कल्पन्ते समर्था भवन्ति हास्मै लोका ऊर्ध्वाश्चावृत्ताश्च गत्यागतिविशिष्टा भोग्यत्वेन व्यतिष्ठन्त इत्यर्थः । य एतदेवं विद्वाँल्लोकेषु पञ्चविधं समस्तं साधु सामेत्युपास्ते; इति सर्वत्र योजना पञ्चविधे सप्तविधे च ॥ ३ ॥ | कल्प—समर्थ होते हैं (भोग्यरूप-से प्राप्त होते हैं) अर्थात् उसके प्रति गमनागमन कालकी स्थितिसे युक्त ऊर्ध्व एवं अधोमुख लोक भोग्यरूपसे उपस्थित होते हैं। [किसके प्रति ?] जो इसे इस प्रकार जाननेवाला पुरुष 'लोकोंमें पाँच प्रकारका समस्त साम साधु गुणविशिष्ट है' इस प्रकार उपासना करता है। इसी प्रकार पञ्चविध और सप्तविध सामकी उपासनामें भी सर्वत्र इस वाक्यकी योजना करनी चाहिये ॥ ३ ॥ |

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इतिच्छान्दोग्योपनिषदि द्वितीयाध्याये द्वितीयखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ २ ॥

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तृतीय खण्ड

वृष्टिविषयक पाँच प्रकारकी सामोपासना

वृष्टौ पञ्चविधँसामोपासीतपुरोवातो हिंकारो मेघो जायते स प्रस्तावो वर्षति स उद्गीथो विद्योतते स्तनयतिं स प्रतिहारः ॥ १ ॥

वृष्टिमें पाँच प्रकारके सामकी उपासना करे। पूर्वीय वायु हिंकार है मेघ जो उत्पन्न होता है—वह प्रस्ताव है, जो बरसता है वह उद्गीथ है, जो चमकता और गर्जना करता है वह प्रतिहार है ॥ १ ॥

भाष्यम्भाषार्थ
वृष्टौ पञ्चविधं सामोपासीत;<br><br>लोकस्थितेर्वृष्टिनिमित्तत्वादानन्तर्यम् । पुरोवातो हिंकारः, पुरोवाताद्युद्ग्रहणान्ता हि वृष्टिः, यथा साम हिंकारादिनिधनान्तम्, अतः पुरोवातो हिंकारः प्राथम्यात् । मेघो जायते स प्रस्तावः, प्रावृषि मेघजनने वृष्टेः प्रस्ताव इति हि प्रसिद्धिः । वर्षति स उद्गीथः श्रेष्ठ्यात् । विद्योततेवृष्टिमें पाँच प्रकारके सामकी उपासना करे । लोकोंकी स्थिति वृष्टिके कारण होनेसे इसका लोक-सम्बन्धिनी उपासनाके अनन्तर निरूपण किया गया है । पूर्वीय वायु हिंकार है । पूर्वीय वायुसे लेकर जलग्रहणपर्यन्त वृष्टि कही जाती है, जिस प्रकार कि हिंकारसे लेकर निधनपर्यन्त साम कहा जाता है । अतः प्रथम होनेके कारण पूर्वीय वायु हिंकार है । मेघ जो उत्पन्न होता है वह प्रस्ताव है, वर्षा ऋतुमें मेघके उत्पन्न होनेपर ही वृष्टि प्रस्तुत होती है—यह प्रसिद्ध ही है। मेघ जो बरसता है वही श्रेष्ठताके कारण उद्गीथ है; तथा जो बिजली चमकती और