कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
सुमेह और विन्ध्याचलकी लड़ाई
अभक्ष्यके कारण अपूर्णता—जिस मकानमें गन्दगी, कूड़ा, कर्कट, भरा हुआ हो, लीपा झारा न जाता हो, ऐसे मकानमें दीपका प्रकाश करने पर भी ज्योति बहुत नहीं फैलता पर जो मकान खूब साफ स्वच्छ हो दीवारोंमें उत्तम उत्तम कांच लगे हुये हों ऐसे मकानमें एक छोटीसी बत्ती भी जला दी जाय, तो भी सैकड़ों दीपकोंके समान प्रकाश हो जाता है समस्त मकान ज्योति से भर जाता है । इसी प्रकार मनुष्यका अन्तःकरण है, यही आत्माका मकान है, यदि पापोंसे अन्तःकरण अशुद्ध हो, मांस शराब आदि अभक्ष्य घृणित पदार्थोंसे स्वच्छ हो, भय और शुद्धताके साथ भजनरूपी दीपक प्रकाश किया जावे, तो शीघ्र ही पूर्ण प्रकाशमय हो जावे । यही कारण है कि, पश्चिम देशके महात्मा पीर पैगम्बर, औलिया, नबी आदिकोंने अभक्ष्यका त्याग किये बिनाही बड़ी बड़ी तपस्यायें कीं तिसपर भी भारतवर्षके मामूली ऋषियों महात्माओंके संह्वांश प्रकाशको भी प्राप्त न कर सकें क्योंकि, भारतीय महात्मागण इन्द्रिय स्वादकी वासनाओंको त्यागकर भजन करते थे ।
जिसका जैसा कर्म होता है उसकी वैसेही बुद्धि होती है बुद्धिके अनुसारही विद्याका प्रकाश होता है इसीके अनुसार ज्ञान प्राप्त होता है । ज्ञान हुआ व्यक्ति आत्मज्ञानको प्राप्त करता है इसके किये बिना ईश्वरका ज्ञान कठिन ही नहीं बरन असम्भव है । जिसको आत्माका ज्ञान नहीं उसको सत्य ज्ञान नहीं जिसको आत्मा न होता है वह सब जीवोंको अपनी आत्मा समझता है । अखिल जीव धारियोंकी देहको अपना देह समझता है । जो सर्वत्र अपनीही आत्मा समझता है वह किसी जीवधारीको दुःख नहीं दे सकता वह न किसीको दुःख देना ही चाहता है, वो मांस खाना स्वीकार नहीं कर सकता जो कि जीव हिंसाके बिना प्राप्त नहीं हो सकता ।
न्यायकी बात—है कि जितने जीवधारी हैं वे सब अपना बदला लेनेको तैयार होते हैं स्थावर बदला नहीं लेते, जीवधारी पशु और मनुष्य सब एक समान ही हैं आपसमें भाई हैं, जो भाईका रक्तपात करेगा वह अवश्य बदला देगा गला काटनेके बदले गया कटावेगा इसमें कुछ भी अंदेश नहीं है ।
मछली खानेके दोष — जो कोई मांस खाता है वह सब जीवधारियोंका ही तो मांस खाता है उसके लिये शुद्ध अशुद्ध सब एक समान है, पशु और मनुष्यका-मांस एकही सरीखा है । जो मांस आहारी मछली अवश्य खाते हैं वो सब कुछ खाते हैं क्योंकि, मछली सब जीवधारियोंके मांसको खाती हैं विष्ठा आदिकका भी भक्षण करलेती हैं । प्रायः देखा गया है कि बड़ी बड़ी मछलियोंका पेट चौरने पर
उनके पेटसे मनुष्यके हाथ पग अथवा कभी कभी पूरा आदमी अथवा छोटा लड़का निकल पड़ा है इसी प्रकार छोटे बड़े पशु भी बहुत निकले हैं। इससे सिद्ध होता है कि, मछली सब कुछ खाती है। अब विचार करने योग्य है कि जिसने मछली खाई उसने हलाल खाया कि, हराम।
कुत्ता खाया — प्रायः ऐसा भी दखा गया है कि, शहरके कसाई लोग अशुद्ध पशुओंके मांस और कभी कभी मनुष्यके मांसको भी बकरेके मांसके साथ मिलाकर बेच देते हैं लोग उनको मोल ले लेकर खा जाते हैं अस्तु, आठ बरसके लगभग हुए मैंने सुना था कि, लखनऊमें एक सर्कारी मुलाजिम चपरासी अथवा खलासी आदिमें से किसीने कसाईकी दूकानसे मांस ला पकाकर खालिया वह बहुत बीमार हो गया। डाक्टरके पास दवाई कराने गया, डाक्टरके पूछने पर उसने बतलाया कि, अमुक कसाईकी दूकानसे मैंने मांस लेकर खाया था। डाक्टर साहबने अपनी बुद्धिसे विचार किया कि, बकरेके गोश्त में तो यह बात नहीं होती जान पड़ता है कसाईने किसी दूसरे प्रकारका मांस दिया है। कसाईके घर जाकर तलाशी ली तो ठाँव २ पर कुत्तेको खाल पाई, दरियाप्त करनेसे मालूम हुआ कि, यह कुत्तों को ही मार २ कर चुपचाप बेचा करता है।
परमात्माने सब जीवधारियोंके ऊपर मनुष्यको राजा बनाया है न्यायी राजाके लिये स्वर्ग, अन्यायियोंके लिये घोर नरक होता है।
गलत यह भी — मुसलमान कहते हैं कि, यदि कलमा पढ़कर जबह करें तो हलाल होता है जीवधारी खुदाको पहुँचता है, अगर कलमा पढ़कर बिन व्याही स्त्रीके साथ व्यभिचार करे तो गुनाह नहीं है। मैं इस बातका कभी विश्वास नहीं कर सकता। अगर इस कलमेमें यह शक्ति होती तो कलमा पढ़कर चोरी करने वालेको पुलिस गिरफ्तार न करती। कलमा पढ़कर खून करनेवालेकी फाँसी न मिलती, कलमा पढ़कर डाँका मारता, कोई न पकड़ता इस कारण ये सब बातें बिलकुल झूठ हैं, मूर्खोंमें ठगी पसारनेकी बातें हैं। इसमें कोई प्रमाण नहीं कि, कलमा पढ़कर बध करनेसे जीव स्वर्गको चला जाता है, कलमा पढ़कर व्यभिचार करनेसे निष्पाप रहता है। यदि कलमेमें यह सामर्थ्य है तो चोरी क्या और डाँका आदि पुलिससे अधिक बलवान हैं? कलमामें यह सामर्थ्य बतलाना राक्षस, भूत यक्षोंके समान धोखा देना है। हां इतना है कि, मुहम्मद साहबके समयमें इस कलमामें बड़ी ताकत थी। क्योंकि, रक्तपात करने, निष्पाप जीवोंकी हत्या करने, चोरी और डाँका मारनेसे भी उनके समयमें अरबके लोग पकड़े नहीं जाते थे मुहम्मद साहबने रक्तपातकी आज्ञाही दी थी।