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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

पाप पुण्यका हिसाब ब्रह्माण्ड पागल खाना

है वह बच्चा तुमको तुम्हारे प्रश्नोंका उत्तर देगा। तब वह साधु भयभीत होकर कहने लगा कि, महाराज ! यह कार्य मैं कदापि नहीं करूँगा क्योंकि, दो स्थानों-पर आपका नाम लेकर मैं कौतुक देख चुका हूँ। कुतिया और भङ्गीका बच्चा मर गया। अब फिर मैं राजाके बालकके सामने जाकर आपका नाम लूँ वह भी मर जावे तो वो मेरी बुरी गति बनावेगा। तब कबीर साहबने कहा कि, वह राजकुमार कदापि नहीं मरेगा। तुम निडर होकर जाके उससे पूछो। तब वह साधु उस राजकुमारके समीप गया। कबीर साहबका नाम लेकर अपना प्रश्न किया, उस समय वो राजाका पुत्र बोला कि, ए साधु ! तू कान लगाकर सुन मैं उस कुतियाका अबलक बच्चा हूँ जिसको पहले तूने कबीर नाम सुनाया था। उस नामके सुनतेही मेरी कुत्तेकी देह छूट गयी मैंने भङ्गीके घर जन्म पाया। पशुसे मनुष्य हुवा फिर तूने जाकर जब मुझे कबीर नाम सुनाया तब मेरी भङ्गीकी देह भी छूट गयी उसी नामके प्रभावसे अब मैं बादशाहका पुत्र हो गया अब मैं इस देहद्वारा परम धामको सिधार्हूँगा फिर कदापि आवागमन न होगा। अतः जिस जीवपर इस सत्यपुरुषकी दया हुई वह पशुभी इस सीमापर्यन्त पहुँच गया, मनुष्यकी तो गणनाही क्या है। यह बात सुनकर नामकी श्रेष्ठता स्वच्छसुसे देखकर वह साधु आकर कबीर साहबके चरणोंपर गिरा। इस सत्यपुरुषकी कृपाकटाक्षही मनुष्यके लिये यथेष्ट है दूसरी बात कुछ भी नहीं है। वही सत्य-गुरु सबका कर्ता धनी है। चाहे तो एक पलमें समस्त संसारको मुक्ति प्रदान कर दे। दूसरे किसीमें यह सामर्थ्य तथा वश नहीं जो कि सब कालपुरुषके जालमें फँसे हैं।

ज्ञानीजीके नाम।

सत्य सुकृतजी, मुनीन्द्रजी, करुणामय स्वामी, कबीर साहब ये चारों नाम तो चारो युगमें अधिक प्रसिद्ध होते हैं। पर समस्त नामोंसे आपकी प्रशंसा वेद, पुराण, ऋषि, मुनि पीर, पैगम्बर इत्यादि करते हैं। अनगिनतीनामोंमें से कुछ नाम ये हैं :—

ज्ञानी, अमर, अमर, अचिन्त्य, अक्षय, अविनाशी, आदिब्रह्म, अम्मर-पुरवासी, अदली, अमी, अनेह, अजावन आदि, सत्यमत, परमानंद, अखिल-सनेही, सत्य नाम, सत्यपुरुष, विदेही, निष्कामी निहंकर, अविगत, अगम, अपार, अनन्त, अभेद, अचल, अक्षय, अगोचर, अलेख, अभय, अवगाह, पुरुष-पुराण, हंसपति, हरम्बरमण, भवसागरतारन, अरूप, अथाह, अनाजदराता, सच्चिदानन्द, योगसंतायन, सुखसागर, सुरतनाम, अंकुर, शुभदानी, प्रथम-

पुरुष, अम्बूद्वीप, पुरुषोत्तम, सर्वमयी, साधुमति, भक्तराज, सत्यसन्तोष, स्नेही शब्दरूप, अविचलदेही, प्राणनाथ, अमृतवाणी, सत्यलोकपति, सत्यगुरु, जन्मनिवारन, वन्दीछोड़, बंदमुगतावन, शीलरूप, धर्मरायशिरमर्दनहार, मुक्तिदाता, राज्यनायक, शीतलउजियारा, परायण, अस्थिरनाम, अभयपददाता, सत्यसाहब, अक्षयवृक्ष, पुष्पद्वीपमण्डन, गुरुसाचा, हंससोहृद्भम्, सोहृद्भशब्द, कण्डहार, शठहार, इच्छारूप, ज्ञानबीज, अमोल, अबोल, अशोच, धीर, अन्तर्यामी, परिचय, विदेह सहीछाप, गुप्त, पोहृद्भ, विहृद्भ, निःशब्द, विषहर, शब्द सत्यशब्द, अजावन, निःसत्त्व, विहृद्भम्, अग्र, उम, अजीत, अर्ध अजीत, अर्ध स्थिति, संजीवन, निर्गुण, आदिऋषि, सत्यसमर्थ, गङ्गपुरुष, योगजीत, सधिक नौतम, मुक्तामणि, चूडामणि, सुकृत, धर्मऋषि, जन्दा इत्यादि अनगिनती नाम हैं। इतने नाम तो मने, कबीर एकोत्रीसे नकल किये हैं। अरब और फारसके लोग आपको सैयद अहमद कबीर और शेख कबीर कहते हैं। आप अविनाशी इत्यादि नामोंसे ग्रंथोंमें प्रसिद्ध हैं।

शेर—नहीं नाम जिसके पायान है। सिफ़तस सब उसीकी हिंशायान है ॥
जो बेचूँ चुरा नामनामी हुवा। वह सब अञ्जियामें गिरामी हुवा ॥
लताफ़तकी छोड़ा कसाफ़त लिया। जहाँ की बला और आफ़त लिया ॥
नहीं नाम जिसका न कोई मुकाम। बहर जाय मौजूद हर शैनदाम ॥
जो है लाबयों उसका दारुलकरार। मुजस्मिम हुवा नाम है बेशुमार ॥
मुकद्दस कुतुब वेदबानी बयान। जो देखे पढ़े उसको हो सब यान ॥
जहाँ में जो मशहूर युग चार हैं। जुदा नाम उसके बहरबार हैं ॥
अब औव्वल यही मानना चाहिये। कबीर गुरु किसे मानना चाहिये ॥
हुए और हैं कते कबीर। वही सबका हादी है पीरान पीर ॥
जो औव्वलमें पैदायश इबतदा। परम आत्मासे हुई यह नदा ॥
पुरुषने इसे पहले ज्ञानी कहा। व मुखलूकपर हुकमरानी कहा ॥
पुरुष और ज्ञानी हो सूरत हुए। लताफ़त कसाफ़तकी मूरत हुए ॥
वह खुद आपको पुरुषज्ञानी किया। जगत जीवकी मेज़बानी किया ॥
वह अव्वलमें ज्ञानी व आखिर कबीर। मुबर्दा हुवा हिंस रोशन जमीर ॥
जमीमें फुँगा और नालः हुवा। यह दिल देव दुःखका कबला हुवा ॥
किते नामोंसे खुदको मशहूर कर। वह जाहिर हुवा जगतमें रूपधर ॥
वही खलकका आफ़री निन्दः है। वही बन्दः आसीका बर्खाशन्दा हैं ॥