सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संग्रह पर लौटें

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

श्रीकाग भुसुण्डकी उत्पत्ति निरंजनके चार दूत

को संक्षेपसे लिखकर दर्पण बना दिया है, जिसमें प्रत्येक मनुष्य अपना मुँह देखलें कि, वेदने सृष्टिका कितना हित किया है।

मृगमेध ।

इमंमाहि५. सीरेकशफम्पशुद्धूर्निक्दंब्वाजिनं वाजिनेष ॥ गौरमारण्य मनुते दिशामि तेनचिन्वानस्तन्वो निषीद ॥ गौरन्तेशुगूच्छतु यन्दिष्मस्तते- शुगूच्छतु ॥ यजुर्वेद अध्याय १३ मंत्र ॥ ४८ ॥ हे अग्ने ! इस अत्यन्त हींसनेवाले वेगवालोंमें वेगवाले एक खुरवाले घोड़े पशुको मत पीड़ा देना, तुम्हारे निमित्त बनके गौरवर्ण मृग देता हूँ, उनसे खेल शरीर पुष्ट करते हुए तुम यहाँ स्थित रहो तुम्हारा प्रेम अश्वकी समान गौरमृगको प्राप्त हो एवं जिससे हम द्वेष करें उसको तुम्हारा संताप प्राप्त हो ॥ यदावधन्दाक्षायणा हिरण्यॐशतानीकाय सुमनस्यमाना : ॥ तन्मऽआवधनामि शतं शारदायायु- ष्माञ्जरदष्टिर्यथासम् ॥ य० अ० ३४ मंत्र ५२ ॥ सुंदर मनवाले दशवंशो- त्पन्न ब्राह्मण जिस सुवर्णको बहुतसेनावाले राजाके निमित्त बाँधते हुए उस सुवर्णको सौ वर्ष जीवनके निमित्त अपने शरीरमें बाँधता हूँ जिस प्रकार मैं दीर्घजीवी वृद्ध अवस्थातक होऊं ॥

अजमेध ।

शक्रन्त्वा शुक्लेण क्रीणामि चन्द्र चन्द्रेणामृतममभूतेन ॥ सग्मेते गोर- स्मेते चन्द्राणितपसनूरसि प्रजापतेर्वर्णः परमेण पशुनाक्रीयते सहस्रपोषम्पुषेयम् ॥ य० अ० ४ मंत्र ३६ ॥ हे सोम ! तुम आह्लाद करनेवाले स्वादुमें अमृतकी समान दीप्तिमान् हो तुमको दीप्तिमान् विनाशरहित आह्लादकारक सुवर्णसे क्रय करता हूँ । हे सोमके बेचनेवाले ! सोमके मूल्यमें जो गौ तुमको दी थी वह तेरी गौ फिर लौटकर यजमानके घरमें स्थित हो सुवर्ण तेरा हो न कि गौ । हे सोमविक्रेता ! तुमको जो सुवर्ण दिये हैं वे हमारे पास आकर स्थित हों तुम्हारी गौही मूल्य हो तुम्हारे प्रसादसे पुत्र पशु आदि सहस्रोंकी पुष्टि जिस प्रकार हो तैसे मैं पुष्ट होऊं वा पुष्ट करनेमें समर्थ होऊं पहिले आर्य द्वेष रहित थे वो जड़ चेतन सबके भीतर सत्य पुरुषको मानकर पूजा किया करते थे । पशुओंके प्रतिभी उनका ऐसा भाव था तो फिर मनुष्योंसे वैर तो करही नहीं सकते थे तब उनमें तो बलिदान प्रवेशही नहीं कर सकता था ॥

बलिप्रदानकी रीति ।

आदमके पुत्र काबील और हाबीलने बलिदान किया । तदुपरान्त अन्यान्य

मनुष्योंने । इसके उपरान्त नूहने किया । फिर इबराहीमने मनुष्यका बलिदान किया अर्थात् अपने पुत्र इसहाकको बलि दे दिया ।

यरमयाह नबीकी पुस्तकका (१९) बाब (४) (५) आयत इन्होंने मुझको छोड़ दिया इस मकानको दूसरोंके निमित्त ठहराया इसमें अन्यान्य अल्लहों के निमित्त लोहबान जलाया । जिन्हें न बे न उनके पिता दादा । न यहूदाहके रहने वाले जानते थे उस गृहको निर्दोषोंके रक्तसे भर दिया, उन्होंने बअलके निमित्त ऊंचे २ मकान बनाए जिसमें अपने पुत्रोंको जलाकर बलिप्रदान करनेके निमित्त अग्निमें जलावे । जो मैंने न आज्ञा की न उसका विवरण किया न यह मेरेमें ही था ॥

अर्थात् परमेश्वर यह बात यरमयाह भविष्यवक्तासे कहता है ।

फिर काजियोंकी पुस्तकके (११) बाब (३०- आयतसे लेकर (४०) आयतपर्यन्त पढ़ो लिखा है कि, अफसनाहने परमेश्वरकी मनौती की कहा कि, यदि निश्चय ही तू नबी अमूँको मेरे हाथमें करदे तो ऐसा होगा कि, विजयोपरान्त गृह पर पहुँचूँ तो जो कोई प्रथम मेरे सामने आवेगा उसको मैं जलाकर बलिप्रदान करूँगा । जब वह गृहमें आया तब उसकी पुत्री पहले सामने आई उसने अपनी पुत्री को जलाकर बलिप्रदान किया । मुझको ऐसाही स्मरण है कि मैंने, किसी मुसलमानी पुस्तकमें पढ़ा था कि, अबदुलमुत्तलिब जो मुहम्मद साहबका दादा था उसने मनौती कि, यदि मेरे दश पुत्र हों तो उनमेंसे एकको मैं परमेश्वरके निमित्त बलिप्रदान करूँगा । अबदुलमुत्तलिबके जब दश पुत्र उत्पन्न हुए, तब वह अपनी प्रतिज्ञा पूरी करनेके लिये भवकहके पुजारियोंके पास गया और कहा कि, मैं दशमेंसे एक पुत्रका बलिप्रदान करूँगा । परमेश्वरकी मनौती पूरी करूँगा । इस बात पर भवकहके पुजारियोंने कहा कि, हम इस प्रकार करेंगे कि, पास डालेंगे । तुम्हारे दश पुत्रोंमेंसे जिसके नाम पास पड़ेगा उसको बलिप्रदानके निमित्त लेलेवेंगे तब उन्होंने पास फँका वह पास अबदुल्लाके नाम पर पड़ा । उन पुजारियोंने अबदुल्लाके बलिप्रदान करनेका बाँधन बाँधा । इस विषयपर अबदुलमुत्तलिब उसका पिता बहुत घबराया कहा कि, मेरा यह पुत्र बड़ा योग्य है । कारण यह कि, यह अबदुल्ला, बड़ा धार्मिक भला आदमी पुण्यात्मा और सुन्दर था । इस कारण न चाहता कि अबदुल्लाका बलिप्रदान करें । जब अबदुलमुत्तलिब इस सोचमें फिरता था तब उसको लोगोंने परामर्ष दिया कि, तू अमुक स्त्रीके समीप जा वह तुझको युक्ति बतलावेगी । वह स्त्री उस समय किसी देवकी पूजा करती थी । जब अबदुलमुत्तलिब उस स्त्रीके समीप गया तब उसने यह युक्ति बतलाई कि, एक तौल बनाकर

एक ओर अबदुल्लाको रख और दूसरी ओर दश ऊंट रख, जिसमें दश ऊंटोंको परमेश्वर अबदुल्लाके बदले स्वीकार करे । अबदुल्लाका बलिप्रदान क्षमा कर दे । फिर दश ऊँच जब अबदुल्लाके बराबर न हुए तब बीस ऊंट रखे । फिर तीस फिर चालीस यहाँलों कि, एक सौ ऊंट तक रखे गये जब सौ ऊंट रखे तब तराजूको दोनों ओरके पलडे बराबर होगा । सौ ऊंटोंका बलिप्रदान हुवा । इस प्रकार अबदुल्ला बच गया । पुत्रके बचजानेसे अबदुलमुत्तलिवको बड़ा हर्ष हुवा इसी अबदुल्लासे मुहम्मद साहब उत्पन्न हुए ॥

इसी प्रकार सनस्त पृवीपर बलिप्रदान होता चला आता है । इसके अतिरिक्त अनेक प्रकारके बलिप्रदानोंका उल्लेख किया गया है । इसकी तरह वही प्रथा चारों पुस्तकोंमें चला आता है और चारों पुस्तकोंके प्रचलित होनेके पूर्वसे भी यही प्रथा चली आती है । जब पुस्तकें नहीं थीं तब परमेश्वर प्रगट होकर आज्ञा दिया करता था । इसके अतिरिक्त अनेक मनुष्योंको परमेश्वरके दर्शन होते, बहुतेरे मनुष्योंसे वार्तालाप हुआ करता । पश्चिम देशमें जो पहिली पुस्तक पृथ्वी पर प्रगट हुई वह तौरीत है । यह तौरीत पश्चिमीय देशवासियोंमें पहले प्रचलित हुई जो उसकी आज्ञाएँ हैं वेही उनके माननेवालेके ईश्वरकी आज्ञाएँ हैं ।

अध्याय ११.

मूसाकी पुस्तकें ।

यह तौरीत हज़रत मूसाके निमित्त उपस्थित हुई । इसमें शारीरिक बातें हैं । आदमको परमेश्वरने साग पात फल इत्यादि खानेके निमित्त बताया परन्तु नूहको परमेश्वरने धोखा दिया । पशुओंका मांस जैसे साग पात इत्यादिके भोजन की आज्ञा दी । वही प्रथा चिरकालसे चली आती है । जैसे मैंने वेदमें कुछ बातें संक्षेपतः लिखीं, उसी प्रकार तौरीतमेंसे कुछ बातें प्रगट करता हूँ ।

प्रथम तौरीत ।

मूसाकी प्रथम पुस्तकमें तो उत्पत्ति इत्यादि कही है ।

खिरोज मूसाकी दूसरी पुस्तकका नाम है । इसमें सीना पर्वत पर परमेश्वर उपस्थित हुवा । मूसाको समस्त धर्म कर्मोंकी प्रथा बतलाई । यहाँ सब तरहके बलिप्रदानोंकी आज्ञाएँ देता है । बलिप्रदान—दोष का बलिप्रदान । ईदुज्जहा (१९) बाबसे (२४) बाबपर्यन्त सब नियम देखो (२४) बाब (१९) आयत में मूसा हारूँ इत्यादि को परमेश्वर दर्शन देता है । (१७) परमेश्वरका तेज बनी इसराईलकी दृष्टिके समक्ष, देखती अग्निके समान दिखाई देता है । खिरोज