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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

१७ अध्याय । बन्धनके कारण

सकता । यदि आपको खुदाकी पहचान होती तो आपको सांपकी सूरतमें शैतान कद पि न बहका सकता तौरीतमें उत्पत्तिके तीसरे बाबकी आठ आयत पर्यन्त लिखा है कि, सर्पके स्वरूपमें शैतान आया और आदम तथा हौवाको बहकाया । जिस फलके लिये खुदाने मना किया था, दोनोंने उसी फलको खाया इसी कारण दोषी होकर वैकुण्ठसे निकाला गया । यहांतक कि, इस सापने अपने विचित्र रङ्ग ढङ्ग दिखाये अनुमानसेभी मालूम नहीं किया कि, यहां तो दालमें काला है, खुदाकी आजोललंघन करके फल खालिया ।

लिखा है कि, पहले शैतानने हौवाको बहकाया । भला यदि हजरतको आत्मिक प्रकाश तथा भीतरी विद्या होती तो इतना भी न जानते कि, शैतान मेरी पत्नीको बहकाने आता है मैं इसकी रक्षा करूँ उसके पाजीपनेसे विज्ञ करूँ उसको आपत्तिसे सचेत करूँ । नबियोंके प्रतिष्ठित नबीको इतनी दूरदर्शिता एवं अन्तर-दृष्टि नहीं थी । फिर आपको आवागमनकी सुधि कैसे मिले, जान बूझकर भी कोई धोखा खाता है ? अपनेको तथा अपनी सन्तानको दीनता तथा दुर्बस्थामें डालता है ? यदि आप सर्परूपी शैतानको नहीं पहचान सके तो मनुष्यरूपी खुदाको कैसे पहचान लिया कि, वह वास्तवमें खुदा था अथवा अन्य न जाने कौन था ।

कुरान शरीफके टीकाकारोंने लिखा है कि, जब प्रथम बार गर्भिणी हुई तब शैतान उसके समीप जाकर पूछने लगा कि तेरे पेटमें यह क्या है किस पथसे बहिर्गत होगा । यह बात सुनकर हौवाने उत्तर दिया कि, मैं नहीं जानती । तब शैतानने कहा कि, कदाचित तेरे पेटमें कोई पशु हो वो तेरा पेट फाड़कर निकले । इतनी बात कहकर शैतान तो चला गया । हौवाने आदमसे सब हाल कहा । दोनों बहुत चिन्तित हुये । दोनों इसी चिन्तामें पड़े थे कि, कुछ दिवसोंके पीछे पुनः शैतान आया पूछा कि, तुम दोनों चिन्तित क्यों हो ? उन्होंने अपने दुःखका हाल कहा, तब शैतानने कहा कि भयभीत मत हो, मैं इसमें आजम जानता हूँ मेरी प्रार्थना स्वीकार हुआ करती है । मैं खुदासे प्रार्थना करूँगा कि हौवाके पेटसे तुम्हारे स्वरूप का पुत्र उत्पन्न हो, एवं सुखसे बाहर आवे । परन्तु बात उतनी है कि, तुम उस पुत्रका नाम अब्दुलहारिस रखना । आदम और हौवाने शैतानके धोखेको न जाना जब उनका प्रथम पुत्र उत्पन्न हुआ तब उसका नाम वही (अब्दुलहारिस) रखा और कुफ्रके भागी हुये ।

हसनकी तफसीरमें लिखा हुआ है कि, जिस समय शैतान वैकुण्ठमें था; उस समय उसका नाम अब्दुलहारिस था । जानना चाहिये कि, वही हजरत आदम हैं जिसके कि भीतर खुदाने अपनी रूह फूँककर अपने स्वरूपका बनाया और

समस्त फिरिश्तोंने दण्डवत किया, वे तनिकभी शैतानी धोखेको नहीं समझ सके उसके बहकानेसे धोखेमें आ गये ।

हजरत नूह-हजरत आदमके पीछे हजरतनूह (जो दूसरे आदम कहलाते हैं) बड़े प्रतिष्ठित नबी हुये । उनको भी खुदाका दर्शन हुआ करता था एवं खुदासे वार्तालाप भी हुआ करता था । खुदाके आज्ञानुसार बाढ़के समय (जल प्रलयके समय) आप नावपर सवार हुये ।

तौरीतमें उत्पत्तिके पुस्तकका (८) बाब (३ स १३) आयत पर्यन्त लिखा है कि, बाढ़के उपरान्त आपका नाव अरारात पर्वतपर ठहरी । नूहने खिड़की खोल देखकर जानना चाहा कि, पृथ्वीका जल शुष्क हुआ अथवा नहीं, इस अभिप्रायसे आपने नावपरसे एक कौवा उड़ाया और वह उड़कर गया । जबतक पृथ्वी का जल शुष्क न हुआ वह काग आया जाया करता था । फिर नूहने एक कबूतर उड़ाया जिसमें मालूम करें कि पृथ्वीका जल अभीतक सूखा है वा नहीं । कबूतर पृथ्वीपर अपने पंज्जे लगानेका स्थान न पाकर फिर नावमें आया । क्योंकि, समस्त पृथ्वीपर जल था, उस कबूतरके आनेपर नूहने उसको अपने हाथोंपर ले लिया उसने सात दिवसोंतक सन्तोष किया । आगे फिर कबूतरीको उड़ाया वह सौझके समय जैतून की पत्ती मुँहमें दबाकर फिर उसके पास पलट आयी । तब नूहने जान लिया कि, अब पृथ्वीपर जल कम हुआ है । इसके पीछे कबूतरीको उड़ाया । वह फिर कभी न आयी तब नूहने जान लिया कि, अब पृथ्वी सूख गयी, तब और भी सात दिन ठहरा । इसके पीछे उसने नावकी छत खोलकर देखा कि, भूमि शुष्क हो गई अथवा नहीं । खुदाकी आज्ञासे नूह समस्त मनुष्यों और जीवोंसहित पृथ्वीपर आ खेतीमें लग गया ।

समीक्षा-अब जानना चाहिये कि, जिस मनुष्यको परमेश्वरका दर्शन हो उससे वार्तालाप हुआ करे उसमें इतना सामर्थ्य भी न हो कि, बिना पशुओंके सहायताके वह पृथ्वीका सूखा और गीला होना जान सके, यदि तीक्ष्ण दृष्टिवाला मनुष्य पर्वतसे पृथ्वीकी ओर देखे तो पृथ्वीकी तरी और उसका सूखापन देख सकता है । यदि नङ्गी आंखोंसे नहीं देखे तो दूरबीनसे तो अवश्यही देख लेगा । जिसको पृथिवीके गीला और सूखा होनेका हाल न मालूम हो उसको आवागमन की विद्या कैसे ज्ञात हो सकती है ।

३ हजरत इबराहीम-नूहके पीछे खुदाके प्यारे और श्रेष्ठ नबी हुए । आप भी खुदाका दर्शन किया करते थे । आपसे खुदा वार्तालाप किया करता हुआ मिहमानी कबूल किया करता था । जब खुदा आपके घर मिहमान आया तब