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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

दाऊदका पुनर्जन्म मतीकी इज्जल में आवागमन

हो जाता है जिससे वह ज्ञान नहीं होता कि, आत्मा किधरसे आती है कहाँ जाती है कहाँ रहती है । मैंने यहाँ थोड़े ही प्रमाण इसके लिये लिखे हैं । जो ध्यानपूर्वक यहूदी, ईसाई और मुसलमानोंकी पुस्तकें देखेगा वो सहस्रों प्रमाण दे सकेगा । इस देशमें मुसलमानोंकी हदीस मिल सकती है । उनकी पुस्तकोंसे भली प्रकार आवागमन ऐसा प्रमाणित होगा जिससे तनिक भी सन्देह न रहेगा । जितना हम लिख चुके हैं वही उनके धर्मग्रन्थोंसे आवागमन सिद्ध करनेके लिये पर्याप्त है । किन्तु जागते हुये सोनेवालोंको कोई जगाने वाला भी नहीं है ।

अध्याय १९.

जानवर ।

अब विचारना चाहिये कि, आत्माका स्वरूप कैसी है जो चौरासी लाख योनिमें आवागमन करती हुई समस्त स्थानोंपर वर्तमान है । उसका स्वरूप बतानेमें भी असमर्थ है । वह कहने सुनने और देखनेमें नहीं जाती । मनुष्य तथा पशुके पास जितने यन्त्र हैं उनसे वह कभी पकड़ी भी नहीं जा सकती । वही सबमें है तनिक विभिन्नता भी नहीं है । सबको एकसा दुःख सुख हो रहा है । पर जिसमें बुद्धि है जो सत्य मिथ्याको पहचान, झूठसे अलग होकर सत्य धारण करता है वही मनुष्य है बाकी सब मनुष्य हों या पशु, पशुसमान ही हैं । पशु मनुष्योंसे किसी विषयमें भी कम नहीं है इसी कारण मैं यहाँ पशुओंकी बुद्धिके विषयमें कुछ लिखता हूँ ।

बन्दर

अब मैं पशुओंमें पहले बन्दरका हाल लिखता हूँ । बन्दर मनुष्यके स्वरूपके होते हैं । उनका सब ढङ्ग मानुषिक होता है, इसी कारण उसे वानर यानी विकल्पसे मनुष्य कहते हैं पर उनके पाँवके अँगूठे उँगलियोंके सदृश होते हैं उनकी एड़ी बहुत छोटी होती है उनका सब आकार मनुष्योंकासा होता है । वे मनुष्योंकी सब नकल कर सकते हैं । वे नाना प्रकारके होते हैं । यहाँ बन्दरोंकी बुद्धि को कुछ कहानियाँ लिखता हूँ ।

चोर पकड़नेवाला बन्दर—पञ्जाब फीरोजपुर धर्मकोट गाँव के समीप मैंने सुना था कि, एक कलन्दर चला जाता था । उसके पास तीन चार बन्दर थे । कुछ जमा जथा भी था । उसी लालचसे उजाड़में उसको तीन चार चोरोंने घेर लिया, मारकर सब असबाब छीन उसके बन्दरोंको भी मार डाला पर उनमेंसे एक बन्दर बच निकला । वह भागकर एक वृक्षपर चढ़ गया । चोरोंने

कलन्दर और बन्दरोंको मिट्टीमें दबा सब माल असबाब लेकर अपनी राह ली। उनके हाथसे बचा हुआ वह बन्दर चोरोंके चले जानेपर बूक्षसे उतरा। चुपचाप दूर दूर तीनों चोरोंके पीछे २ चला गया। वे तीनों अपने गाँवमें पहुँच घर दाखिल हुये। तब उसने उस गाँवको भलीप्रकार पहचान लिया। उसकी राहपर अपने हाथसे चिह्न करता हुआ लट आया। वह बन्दर तहसीलदारके पास पहुँचा। तहसीलदारसे अपने हाथ और सिरसे इशारा करने लगा। तहसीलदारने बन्दरके इशारेसे बन्दरको दुःखी समझ चपरासियोंको आज्ञा दी कि, तुम बन्दरके साथ जाके देखो कि, वह क्या चाहता है। तहसीलदारने चपरासियोंको आज्ञा दी उस बन्दरने अपना शिर हिला दिया कि, चपरासियोंको मत भेजो। तहसीलदारने जमादारको आज्ञा दी। इसपर भी बन्दर प्रसन्न न हुआ। फिर तहसीलदार घोड़े पर सवार होकर जमादार चपरासियोंको साथ लेकर बन्दरके साथ चला। वह बन्दर तहसीलदारके आगे आगे चला। उस स्थानपर पहुँचा जहाँ वह कलन्दर दबाया हुआ था, वहाँ पहुँचा तो बन्दर उस भूमिपर हाथ मारने लगा। तहसीलदारने उस स्थानको खुदबाया। उससे कलन्दर तथा बन्दरोंकी लाशें निकल पड़ीं। फिर बन्दर इशारा करता हुआ तहसीलदारके आगे आगे चला सबको उस गाँवमें ले गया जहाँ कि, वे खूनी रहते थे। तहसीलदारने आज्ञा दी कि, गाँवके सब मनुष्य उपस्थित हों सब मनुष्योंको खड़ा कराके उस बन्दरसे कहा कि, तुम पहचानों इनमें तुम्हारा कौन चोर है। बन्दरने सबको देखकर शिर हिलाया कि, इनमें कोई नहीं है। तब तहसीलदारने पूछा कि, इस गाँवका कोई मनुष्य बाहर गया है? लोगोंने कहा कि, हाँ अमुक अमुक मनुष्य उपस्थित नहीं हैं। तब तहसीलदारने कहा कि, उन्हें शीघ्रही उपस्थित करो। वे भी सब मनुष्य उपस्थित किये गये। उस समय चोरोंने अपने मुँहपर राख इत्यादि मलकर अपना चेहरा बदल लिया कपड़े बाँध लिये जिसमें चेहरा न पहचाना जाय। जब वे तीनों चोर बन्दरके सामने आये तो उसने तुरन्त पहचान लिया। इशारा किया कि, चोर तथा हत्यारे ये ही हैं। बन्दरने अपनी उँगलियोंसे इशारा किया। तहसीलदारने तुरन्त ही उनको पकड़ लिया। उनका इजहार लिया गया, उनपर हत्या तथा चोरी प्रमाणित हो गयी। उस बन्दरके साथ न्याय हुआ। हत्यारोंको फांसी दी गई।

जर्मीनदारका बन्दर—एक जर्मीनदारके पास एक बन्दर था। वह एक दिन सो गया तो उसकी अपानबायु खुली। उसने जर्मीनदारकी चादर फाड़कर उसके मलमार्गके निकट चिल्लाना आरम्भ किया। जर्मीनदार जाग पड़ा। बन्दरकी