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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

सर्प सर्पोंके राजा, सर्प सभा

नरको शिकारीने बन्दूकसे मार डाला । वह सदाही अत्यन्त क्रुद्ध होकर अपने नरका परिशोध शिकारीसे लेती, उसपर अत्यन्त क्रुद्ध हो उसके माथेपर चोंचे मारा करती उसके चारों ओर चिल्लाती फिरती जहाँ कहीं उस शिकारीको देखती वहीं वह उसपर आक्रमण करती । रविवारके दिन आखेट करनेवाला अपना वस्त्र बदल के दूसरे प्रकारका वस्त्र पहनता उस समय वह पहचान न सकती थी इसी प्रकार उसपर आक्रमण करती थी ।

एक बहुतही मिष्टभाषी चिड़िया बहुत मीठा आवाजसे गाया करती थी । उसको प्रायः खिड़कीके बाहर रख देते थे । वह उच्च स्वरसे भली प्रकार गाया करती थी । एकदिन ऐसी घटना हुई कि, उसका पिंजरा मकानके बाहर वृक्षोंके पास धरा हुआ था उसके निकट एक अबाबील आकर पिंजरेके चोंगिंदे फिरेने लगी उस पिंजरेके ऊपर बैठके अपनी बोलीमें पिंजरेके भीतरवाली चिड़ियासे बोलने लगी कुछ काल तक दोनों आपसमें बातें करती रहीं कुछ कालके पीछे चिड़िया उड़ गई । क्षणोंमें एक कीड़ा मुहमें दबाकर लौट आई कीड़ेको गानेवाली चिड़ियाके पिंजरेमें डालकर चली गई । उस दिनसे वह नित्य अपने मित्र अबाबील के लिये एक कीड़ा लाया करती भेंट करके चली जाया करती । दोनों अबाबीलोंमें बहुत मैत्री होगई । आसपासके लोग इनका कौतुक देखनेके लिये उस चिड़ियाका पिंजरा रोज बाहर धर दिया करते । वह अबाबील पूर्वानुसार अपने मित्रकी सुधि लिया करती । जब कोई मनुष्य समीप आता तो दूर भाग जाती अकेलेमें आकर अपने मित्रसे मिला करती । सरदी का मौसम आया तो उड़ गई फिर कभी दिखाई नहीं दी ।

सांप निकाल लेनेवाली — सींगके समान चोंचवाली एक चिड़िया होती है । जिसे अङ्गरेजी भाषामें हार्न बिल कहते हैं वह कुरुप्पा होती है । उसका यह नियम है कि, पृथिवीमें जहाँ कहीं सांप छिपा हो खोदकर निकाल लेती है ।

रेल ।

रेल एक प्रकारकी चिड़ियाको कहते हैं । वह हरी घास तथा अनाजके खेतोंमें रहती है । बहुत दुष्ठा तथा धोखेबाज होती है जब कोई उसको पकड़ लेता है उसको भागनेकी कोई राह नहीं मिलती तो मरनेका बहाना करती है इतना स्वांस बन्द करती है कि, मानों उसमें तनिक भी प्राण नहीं रहा है ।

एक बार एक कुत्ता इसी जातिकी चिड़िया पकड़के एक मनुष्यके पास ले गया । उस समय जान पड़ा कि, वह निर्जीव है तब उस मनुष्यने उसको अलग धर दिया स्वयम् उसके पास खड़ा रहा । चिड़ियाने जान लिया कि, अब यहाँ कोई नहीं

तो कुछ कालके पीछे अपनी एक आंख खोली । मनुष्यने चिड़ियाकी धूर्तता जानके उसको उठा लिया । उसी समय उसका शिर तथा पांव लटक पड़ा, मानो वह मर गई हो मनुष्यने अपनी जेबमें रख लिया । कुछ कालके बाद भागने तड़फने लगी । उसने बाहर निकाला फिर उसी प्रकार मुर्दा होने लगी । उसने उसको फिर एक जगह रख दिया आप अलग खड़ा हुआ । पांच मिनटोंके पीछे अपना शिर उठाया इधर उधर देखकर भाग गई ।

पफन ।

एक प्रकारकी चिड़िया होती है । अङ्गरेजी भाषाका इसका नाम पफन है आइलैण्डकी भूमिमें होती है । लोग उसको बंसी लगाके फँसाते हैं जब एक चिड़िया फँस जाती है तो उसके साथी तीन चार मिल कर उसे अपनी ओर खींचते हैं । इस तरह कितनेही बच जाते हैं ।

क्रासबीक ।

बोर्डरिप साहबका कथन है कि, यह एक प्रकारका पक्षी होता है जिसको अङ्गरेजीमें क्रासबीक कहते हैं क्रासबीकका अर्थ टेढ़ी चोंचवाली चिड़िया है यह पक्षी थोरड़िया देशमें होता है वहाँके पहाड़ी लोग इसके विषयमें ऐसा ध्यान करते हैं कि जिसके घर यह पक्षी होता है वह अपने स्वामी की बीमारीको अपने ऊपर ले लेता है उसका स्वामी आरोग्य लाभ करता है । लोग इसी कारण इस चिड़ियाको अपने घरमें रखते हैं लोगोंका ऐसा भी विश्वास है कि यदि इस पक्षी का टेढ़ा चोंच दाहिनी ओर झुका हो तो मर्दकी देहसे सदी तथा गठिया आदिकका रोगभी दूर होता है । यदि बाये ओरको झुके तो स्त्रियोंके शरीरकी बीमारियोंको दूर कर दे यह प्रायः मिरगीकी बीमारी दूर हो जाती है । वहाँके लोग इसका जूठा पानी पीते हैं उनका ऐसा ध्यान है उसका जूठा जल रोगोंके लिये अच्छा है ।

भुजंगा ।

कप्तान ब्राउन साहब लिखते हैं कि, एक दिन एक बहुत ठट्ठेकी बात हुई विलियनसेनरेट नाम का एक मनुष्य एडनबर्गके पास कर्मर्टन नामके स्थानमें रहता था उसने भजैंटा पाला था । अङ्गरेजीमें इसको डा कहते हैं । हिन्दीमें भोजैंटा अथवा भुजङ्ग कहते हैं । एक दिनकी बात है कि, टेबुलपर ह्विस्की मदिराका आधा गिलास भरा रखवा था । भुजङ्ग उस जगह बैठ गया उसे पीलिया शराबीकी तरह मस्त हो गया । उसने पर तथा पांव लटक दिया । अपने मुँहके बल पृथिवी पर गिर पड़ा । उसके पांव ऊपरको उठ गये । ऐसा जान पड़ा कि, मानों वह मर गया । पानी उसके मुँहमें डाला गया पर पी न सका । वह लफानेलेके कपड़ेमें लपेट