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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

वासनाओंकी जननी

निर्दोष वही खुदाके पेंगम्बर के पास स्वच्छ पहुँचे, इसीलिये खुदाकी ओरसे बड़ी चौकसी हुआ करती थी। हजरत इब्रअब्बासका कथन है कि, जिबराईल कभी खुदाके पेंगम्बरके पास वही न लाया। उसके साथ साठ सत्तर सहल चौकीदार फिरिश्ते वहीकी रक्षार्थ साथ नहीं थे।

कुरानमें मूर्तिपूजा—मौलवी अमादुद्दीन कृत तवारीख, मुहम्मदीमें लिखा है कि, मुहम्मद साहबके नबी होनेके पाँचवें वर्षका हाल है कि, जब मक्का-वालोंसे मुसलमानोंका बैर हो गया तब मुहम्मद साहबने मुसलमानों तथा काफिरोंके सामने यह बात सुनाई। बुतोंकी प्रशंसामें सूरत नजममें यह बात उत्तरी (जैसा कि, स्वर्गवासी मास्टर रामचन्द्र सितारे हिन्द दिहलबीने आजाज कुरानमें लिखा है )

أَقْرَرُ نَيْمًا لِلَّاتِ وَالْعُرْزِي وَمِنْهُ الثَّالِثَةُ الْأَحْرِي

कि, “तुम देखते हो लात असी और मनात बुतोंको” उसके उपरान्त फर मुहम्मद साहबने इसी आयतके साथ यह भी पढ़ा है।

وَالْقَدْرُ مَا خَلَيْتَ مِنْهُ إِلَّا اللَّهُ تَعَالَى

कि, “तीनों मूर्तियों परम श्रेष्ठ हैं। इनसे मुक्तिकी अभिलाषा की जाती है।” यह बात सुनकर सब मूर्तिपूजक मुसलमानोंके मित्र बन गये फिर जब मुहम्मद साहबने देखा कि, मुसलमानों तथा मूर्तिपूजकोंमें कुछ विभिन्नता नहीं रही तब खेद करने और सोचने लगे।

दूसरा कथन—तब आपने यह आयत सुनाई जो सुरे हजमें है :—

وَمَا ارْسَلْنَاكَ مِنْ قَبْلِكَ مِنْ رَسُولٍ وَلَا نَبِيٍّ إِلَّا أَوْفَاةً أَوْ أَمَنِيَّةً أَلَيْسَ الشَّيْطَانُ فِي الْأَمْنِيَّةِ فَهُوَ شَمُّ اللَّهِ مَا لَيْسَ الشَّيْطَانُ شَمًّا مَكْرَمُ اللَّهُ آيَاتِهِ

अर्थात् ऐ ! मुहम्मद तुझसे आगे जो रसूल तथा अम्बिया संसारमें आये उनकी यह दशा हुई कि, जब उन्होंने कुछ पढ़ना चाहा तो शैतानने उनके पढ़नेमें कुछ अपनी बात मिलादी अतः खुदा शैतानकी मिलाई हुई बातोंको काटता है अपनी बातको दृढ़ कर देता है।

तात्पर्य—यह कि, मैंने जो बुतोंकी प्रशंसामें वह बात कही मूर्तियोंकी

प्रशंसा की वह वाक्य खुदाकी ओरसे नहीं था वरन् शैतानने वह बात मेरी जिह्वा-पर डालदी थी । उस वाक्यको कटा हुआ जानो क्योंकि, वह शैतानका वाक्य था । इस प्रकार शैतानी मिलावटके कारण कुरानकी बहुतसी आयतें कट गयी हैं । जिनका वृत्तान्त तफसीर मुआलि मुत्तनजीलमें लिखा है ।

समीक्षा—अब यहाँ प्रमाणित हुआ कि खुदा तथा खुदाके रसूल दोनों शैतानसे भयभीत रहा करते थे । खुदा सत्तर सहस्र चौकीदार आयतके साथ भेजा करता था । जिबराईलका भी कुछ विश्वास न था कि, वह अपनी ओरसे वहीमें कुछ मिला न दे इस चौकसी तथा सावधानीके होते रहने पर भी शैतानकी विजय होती है । वह वही तथा पैगम्बरोंकी जिह्वापर अपनी बात डाल देता है । उसकी मिलावटसे खुदा और रसूल दोनों डरा करते थे । तब बताइये कि, उनकी शक्ति तथा मुक्ति किस काम आई ।

विशेष—यहाँतक तो मैंने बहुतही संक्षेपमें सब नबियोंका हाल लिखा है एवं उनकी विद्याका वृत्तान्त प्रगट किया है । जो कोई उनकी जीवनी देखेगा वह अनेक बातोंसे विज्ञ हो जायगा कि, इन नबियोंको कैसा ज्ञान था किस प्रकारकी विद्यासे संसारवालोंको उपदेश दिया करते थे । जितने बड़े बड़े नबी बीते हैं वे येही हैं, उनके अतिरिक्त जितने नबी और बीचमें हुये हैं उनका विवरण व्यर्थ है । इन सब नबियोंको खुदाकी ओरसे बल तथा प्रकाश प्रदान किया जाता था । इसके द्वारा वे लोग मनुष्योंको उपदेश दिया करते थे । मृत्युके समय उनका सर्व प्रकाश विलुप्त हो जाता । वह दूसरी योनिमें चले जाते थे । परन्तु दूसरी देहमें पूर्वजन्मका परिश्रम कुछ सहायक होता शीघ्रही प्रकाशके अधिकारी हो जाते । किसीको मृत्युके समय प्रकाश पृथक् होता और किसीका प्रकाश उसी जीवनमें दूर हो जाता । सुतरां सावल नबी अपने जीवनमेंही बिना प्रकाशका हो गया था । एक स्त्री जिसका यार एक देव था उससे समाचार पूछता फिरा । उसमें तनिक भी ज्ञानकी ज्योति नहीं रही । देखो प्राचीन अहदनामा (१) समवाईलका (२८) बाब साविलका वृत्तान्त लिखा है । ऐसेही सब नबियोंको खुदाकी ओरसे उपदेश होता है तब विद्याका प्रदीप प्रकाशित होता है । फिर समय आनेपर बिना विद्या कभी हो जाते हैं योनि योनिमें आवागमन करते फिरते हैं जैसे घड़ीको फूक दी अथवा कलको हिला दिया जबतक उसका बल रहा तबतक चलती रही, ऐसे ही नबियोंका मन कभी प्रकाशित और कभी अन्धकारसे भर जाया करता है इसीका सार निम्न लिखित ग्रन्थलमें लिखते हैं ।

गज्जल—नहीं एतबार' आदम' और फिरिश्तोंकी' जवानी का ।
कहौ दावा करे क्या कोई हककी' राजदानीका' ॥
शरीअत' और हकीकत' और तरीकत' मारफत' चारो ।
बपासे अहल दुनियाके हैं डण्डा निर्दबानीका ॥
रखी जो हाथ पर शय—हो, न पहचाने अगर कोई ।
तो क्योंकर नुकतःढाँ होवे तनासुख चारखानीका ॥
न जान भेद अपने घर न अपने जिस्मका आदम ।
तो णि र क्योंकर वह मुखविर हो कवायफ आसमानीका ॥
यहूदा और निसारा मुस्लमों हिन्दू झगडते हैं ।
न जाने अस्लको अपने सबब यह खींच तानीका ॥
लिखा सब हाल निबियोंका बगोशोहोश सुन लीजे ।
यही सूरत यही मूरत यही ढब गैबदानीका ॥
वह है नजदीकतर शह रंग(से)पहचाने कहो क्योंकर ।
कभी कोई न देखा जिलवः उस जल्ल शानीका ॥
थके सिध साधु सदहा, पीरो कुतुब ओ काजी ।
न मुखविर कोई खबरदारों से उसराजनेहानीका ।
भजन सुमिरन नमाजोजाप और पूजा नहीं कोई ।
नहीं कोई काम उस घरमें है कुरआँ वेद खानीका ॥
पड़ा खाता था गोता सद तलातम बह्व कुदरतमें ।
हुआ इसरार तब इजहार मुरशिद मेह्व ज्ञानीका ॥
नबी आदम और हौवा हिर्समें फसकर मरे सारे ।
यह मुहलिक साजो सामां सब है इस दुनियाय फानीका ॥
न जान और न दूँदे सब भटकते दर बदर फिरते ॥
सभी कहते कहानी किस्सा मुल्क जावेदानीका ॥
हिकायत आसमांकी कर शिकायत अपनी जोरोंकी ।
नहीं मोहरिम हुआ जिनहारा घरके चोर जानीका ॥
बजुज मल्लाह किश्ती दुनयवी दरिया न तर आज्जिज ।
तु क्योंकर पार पावे कुदरते दरिया सुभानीका ॥

नबियों और उनके खुदापर एक दृष्टि

१२---इन नबियोंको तो क्या लद्दुझी विद्या होनी थी वरन् उनके खुदा-केभी लद्दुझी (सार्वज्ञय) विद्यामें सन्देह जान पड़ता है । क्योंकि खुदाने मूसाको आज्ञा दी मूसाने बनी इसराईलसे कहा । देखो तौरीतमें खुरुजका (१२) बाब (२१ से २३) आयत पर्यन्त लिखा है कि, मूसाने सब बनी इसराईलके प्रतिष्ठितोंको बुलाया, उनसे कहा कि, तुम अपने प्रत्येक घरोंसे एक बर्ग बकरा निकाल लाओ और उसे हलाल करो, जूफीअनाजकी एक एक मूछी लाओ और उस रक्तमें जो वासनमें है, गोता देकर ऊपरके चौखट और दोनों बाजू द्वारके उससे छापो । तुममेंसे कोई प्रातः कालतक द्वारके बाहर न जावे । क्योंकि, इधर खुदा जावेगा । जिसमें मिश्रियोंको मारेगा । जब वह चौखट तथा दोनों बाजू देखेगा खुदा द्वार परसे जावेगा मारनेवालेको न छोड़ेगा ऐसा न कि, तुम्हारे घरोंमें आकर तुम्हें मारें ।

फिर देखो उसी बाबके (१४ से १२) आयत पर्यन्त लिखा है कि, खुदा आज्ञा करता है कि आजकी रात में मिश्रदेशमें होकर जाऊंगा मनुष्य तथा पशुके जितने पहलौठे मिश्र देशमें हैं सबको मारूंगा । मिश्रके सब देवताओंको दण्ड दूंगा । साबित करूंगा कि मैं खुदा हूँ ।

उस रक्तका तुम्हारे घरों पर जहाँ जहाँ चिन्ह होगा मैं वह रक्त देखकर तुमको छोड़ दूंगा । जब मैं मिश्र देशस्थ मनुष्योंको मारूंगा तो तुम्हारे मारनेको तुम पर मरी न आवेगी ।

फिर देखो तौरीतमें उत्पत्तिका (६) बाब (५ से ८) आयत तक लिखा है कि, पृथिवी पर मनुष्योंका पाप बढ़ गया खुदाने देखा कि, मनुष्योंके विचार दिन दिन भ्रष्ट हो जाते हैं खुदा मनुष्यको पृथिवी पर भेज कर पछताया बड़ा ही दुःखी हुआ । खुदाने कहा मनुष्यको जैसे मैंने उत्पन्न किया है वैसेही मनुष्यको, पशुको कीड़े मकोड़े तथा आकाशके पक्षियों तकको पृथिवी परसे मिटा डालूंगा । क्योंकि मैं उनको बनाकर पछताता हूँ ।

मुसलमानोंकी हदीसोंमें जो लिखा है उसे मैं कबीर भानुप्रकाशमें लिख आया हूँ कि, जिस समय खुदाने आदमका पुतला बनाना चाहा कहा कि, मैं एक खलीफा बनाऊंगा मिट्टीसे आदमकी मूर्ति बनानेकी आज्ञा दी । उस समय फरिश्तोंने मना किया कि, ऐ खुदा ? तू मनुष्योंको न बना, वे उत्पन्न होकर पाप करेंगे । तू मनुष्यको कदापि न बना परंतु खुदा साहबने एकका विचार नहीं किया । अपने खुदाई धमपडमें उनको झिड़क दिया । तब फरिश्ते चुप रहे, अन्तमें

खुदाने जिबराईलको आज्ञा दी कि, तू पृथिवीसे मिट्टी ले आ । मैं मनुष्यका पुतला बनाऊंगा जिबराईल खुदाकी आज्ञानुसार पृथिवी पर आ मिट्टी लेने लगा । पृथिवी फूट फूटकर रोई पुकारकर कहा कि, ऐ जिबराईल ! तू मिट्टी न ले क्योंकि, खुदा इस मिट्टीसे आदमका पुतला बनावेगा । मनुष्य उत्पन्न होकर मुझपर पाप करेंगे । इन पापियोंके कारण मुझको बहुतही कष्ट होगा । पृथ्वीके गिड़गिड़ानेपर हजरत जिबराईलको दया आगयी वे पलट गये मिट्टीकी मुठी नहीं ली । इसके पीछे खुदाने मेकाईलको मिट्टी लाने भेजा, मेकाईलसे भी पृथ्वी बहुत गिड़गिड़ाई । तब उसके मनमें भी दया आ गई वह भी बिना मिट्टी लिये ही पलट गया । फिर अन्तमें इजराईलको भेजा । इजराईल पृथ्वी-पर आकर मिट्टी लेने लगा तो पृथ्वी रोई । मिट्टी न लेनेके लिये गिड़गिड़ाई । इजराईलने कहा कि, मैं मिट्टी लेकर तेरी दोहाई तिहाई सुनूंगा । अन्तको इजराईलने बलपूर्वक मिट्टी ली, पृथिवी रोती चिल्लाती रह गयी । कुछ न ध्यान दिया । वह मिट्टी लाकर खुदाके सामने रखी । इजराईलसे कहा कि, ऐ इजराईल ! तेरे मनमें बहुत थोड़ी दया है । तू पाषाण हृदय है क्योंकि तूने पृथिवीकी पुकार नहीं सुनी । जब पृथिवीपर मनुष्य उत्पन्न होंगे तब उनकी आत्मा निकालनेके लिये तू पृथ्वीपर जाया करेगा । अतः यह इजराईल फिरिश्ता मनुष्यके उत्पन्न होने तथा मरनेका कारण हुआ । खुदाने उस मिट्टीको गूँधकर मनुष्यका पुतला बनाया । मनुष्य पृथिवीपर बहुतायतसे होकर पाप करने लगे । उनके पापोंसे खुदा बड़ाही रुष्ट हुआ । अपने कियेपर पछताया । बाढ़ लाकर उनको नष्ट करना पड़ा । जैसा खुदा साहबने स्वेच्छा पूर्वक कार्य किया । फिरिश्तों तथा पृथिवीका कहना न माना और रोना चिल्लाना नहीं सुना वैसेही अपने कियेका फल भी पाया ।

अब यहाँ पर विचारना चाहिये कि, कोई नबीतो खुदासे बातें करता था कोई स्वप्नमें वार्तालाप किया करता था । भौति भौतिके स्वरूपमें खुदा उनको दिखाई देता था । यहाँतक कि, स्त्रियों और लड़के लड़कियों पैगम्बरी किया करते । जब चाहते तब खुदासे वार्तालाप कर लेते थे । जो चाहते सो पूछ लेते, सुतरां इसहाककी स्त्री रबकाको जब गर्भ हुआ जब उसके पेटमें दो पुत्र आपसमें झगड़ते थे तब वह खुदासे पूछने गयी कि, ऐसा क्यों है ? तब खुदाने कहा कि, तेरे पेटमें जो दो पुत्र हैं उनमेंसे बड़ेकी अपेक्षा छोटा बड़ाई तथा श्रेष्ठता पावेगा ।

स्त्रियों तथा पुरुषोंसे खुदा इस प्रकार वार्तालाप किया करता था । परन्तु