कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
राजा इन्द्रकी कथा बृहस्पति और शुक्र नारद
दूसरी ज़बूर पुस्तक ।
अँग्रेजीमें ज़बूरको साँग्स आफ़ डेविड कहते हैं साँग नाम गीतका है दाऊद बादशाह खुदावन्दका बड़ा प्यारा था । खुदावन्दके सामने नाचता गाता बजाता रोता था, मूसाके समान दाऊदने भी बड़ा रक्तपात किया । परमेश्वर दाऊदकी सर्वे सहायता किया करता था । (६६) ज़बूर (१३) बाबमें जला हुवा बलि-प्रदान लेकर तेरे गृह जाऊँगा मैं तेरे निमित्त अपनी भेंट दूँगा । (१४) वे जो आपत्ति कालमें मैंने अपने रक्तसे नियुक्त की अपने मुँहसे मानी (१५) मैं पाले हुए पशु लेकर जली हुई बलि मेंढोंकी सुगंधियोंसहित तेरे निमित्त दूँगा । मैं बछड़े तथा बकरे चढ़ाऊँगा । (२९) जवरके परमेश्वरका शब्द जलपर है । तेजोमय परमेश्वर गरजता है । परमेश्वर बड़े जलपर है । परमेश्वर का शब्द आगकी लपटों को चीरता है । परमेश्वरका शब्द जङ्गलोंको कँपाता है । दाऊदका पुत्रसुलेमान बादशाह अपने पिताकी मसनदपर आसीन हुआ ।
देखो दूसरे इतिहास का (७) बाब, सुलेमान बादशाह हुवा । परमेश्वरके हैकलकी बनावट करचुका तब समस्त मनुष्यों और सुलेमान बादशाहने वार्ड्स सहस्त्र बैल और एक लाख बीस सहस्त्र भेंणोंकी बलि दी ।
नबियोंकी पुस्तक ।
यसायाह नबीकी पुस्तकका (२३) बाब (१७) आयत, सत्तर वर्षके उपरान्त ऐसा होगा कि, परमेश्वर सूबरपर दृष्टि करेगा । वह फिर खरचीके निमित्त जावेगी । पृथ्वीके समस्त देशोंसे व्यभिचार करेगी । परन्तु उसकी प्राप्ति खरची खुदावन्दके निमित्त पवित्र होगी । उसका धन एकत्रित न किया जावेगा । रोका न जावेगा । वरन् उनके निमित्त प्राप्त होगा जो परमेश्वरके निकट रहते हैं जिसमें भोजन करके परितृप्त होंवे अच्छे वस्त्र पहने ।
खरकैक नबीका (४) बाब (१२) आयत, तू जौके फुलके खाया करेगा । तू उनकी दृष्टियोंके समक्ष मनुष्योंकी विष्ठाद्वारा उनको पकायेगा । होसीय नबीका (१) बाब (३) आयत परमेश्वरके वचनका आरम्भ, जो होसीय नबीको आया खुदावन्दने होसीयको आज्ञादी कि, जा एक दुराचारिणी स्त्री और दुराचारिणी बाला अपने निमित्त ले । कारण यह कि, परमेश्वरको छोड़कर देशने अत्यंत व्यभिचार आरम्भ किया है । पुराने अहदनाममें तौरीत ज़बूर तथा नबियोंकी समस्त पुस्तकें हैं । उनको जो कोई पढ़कर ध्यान देगा तो स्पष्ट प्रगट हो जावेगा कि, यह सब शिक्षाएँ आत्माके निमित्त हैं अथवा नहीं ।
तीसरा नवीन अहदनामा अथवा अनाजील मत्तीकी इञ्जील— (३)
बाब-ईस् योहन्नासे बपतिस्मा पाकर बाहर निकला । देखो उसके निमित्त आकाश खुल गया । उसने परमेश्वरकी आत्माका कबूतरके समान उतरते हुए अपने ऊपर आते देखा । (४) ईसू उस समयसे हाँक लगाने लगा । जब ईसू जलील नदीके किनारेपर चला जाता था तब उसने दो भाई शमऊन पितरसने उसके भाई इन्दरयासको नदीमें जाल डालते देखा । कारण यह कि, मछुवे थे । उन्हें कहा कि, तुम मेरे पीछे आओ कि, मैं तुम्हें मनुष्योंका मछुवा बनाऊँगा । व उसी समय जालोंको छोड़कर उसके पीछे हुए । (५) बाब (१७) आयत, यह मत ससझो कि, मैं तौरीत या नबियोंकी पुस्तकोंका खण्डन करनेको आया हूँ । मैं उन्हें मिटानेको नहीं बरन् सम्पूर्ण करनेको आया हूँ । (१७) कारण यह कि, मैं तुमसे सत्य कहता हूँ कि, जबलों आकाश पृथिवी टल न जाए तौरी-तका एक बिन्दु अथवा रेखा कदापि नहीं मिटेगी । जबलों सब कुछ पूरा न हो । (७) बाब (१३) आयात, सडकीर्णद्वारसे प्रवेशित हो । कारण यह कि, वह द्वार चौडा है और प्रशस्त है वह पथ जो कष्टपर्यन्त पहुँचता है बहुत हैं वे जो इससे प्रवेशित होते हैं । (१६) वह द्वार क्याही संकीर्ण और तङ्ग है वह पथ जो जीवनको पहुँचाता है अत्यल्प है जो उसे पाते हैं । (८) एक फकियाः ने आकर उससे कहा कि, ए गुरु ! जहाँ तू जावेगा मैं तेरे पीछे चलूंगा (२०) ईसूने उससे कहा कि, लोमड़ियोंके निमित्त माँदे और बायुके पक्षियोंके निमित्त घोसले हैं । पर मनुष्यके निमित्त स्थान नहीं जहाँ शिर धरे (२१) उसके शिष्योंमेंसे एकने उससे कहा कि, ए परमेश्वर ! मुझे बिदाकर कि, मैं अपने पिताको गाड़ूँ (२२) ईसूने कहा कि, तू मेरे पीछे आ । मुरदोंको मुझे गाड़नेदे । (१०) बाब (३४) आयत, यह मत मसझो कि, मैं संसारमें मेल कराने आया हूँ । मेल कराने अथवा शान्ति स्थापन करनेके निमित्त नहीं बरन् मैं असि चलवाने आया हूँ । (११) बाब (२५) आयत, ए पिता ! पृथ्वी तथा आकाशके, मैं तेरा गुणानुवाद करता हूँ कि, तूने उन वस्तुओंको बुद्धिमानोंसे छिपाया, बालकों पर खोल दिया । (१६) बाब (२४) आयत, ईसाने कहा कि यदि कोई चाहे कि, मेरे पीछे आवे तो अपना भाव अस्वीकार करे और अपना सलीब उठाकर मेरे पीछे आवे । (२२) बाब (३२) आयतमें इबराहीमका खुदा इसहाकका खुदा और याकूबका खुदा हूँ । मुर्दोंका खुदा नहीं बरन् जीवितों का खुदा हूँ ।
मरकसकी इञ्जीलका—१२- बाब (३८) आयत एक मनुष्यने मसीहसे आनकर कहा कि, ए भले गुरु ! मैं कौनसा उपाय करूँ कि, सर्वेक
निमित्त जीवित रहें। ईसूने उत्तर दिया कि, मुझे भला क्यों कहता है? कोई भला नहीं बरन् वही एक जगदीश्वर भला है, बाकी कुछ नहीं।
लूकाकी इज्जीलका—(१२) बाब (४९) आयत, मैं पृथ्वीपर अग्नि लगानेलगाने आया हूँ, मैं कियाही चाहता हूँ कि, लगचुकी होती (५०) पर एक बपतिस्मा पाना है, मैं कौसा तङ्ग हूँ जबलों कि, पूरा न हो (५१) क्या तुम समझते हो कि मैं पृथ्वीपर मेल कराने आया हूँ, नहीं मैं कहता हूँ कि, पृथक् करने आया हूँ।
(५) बाब, ऐसा हुवा कि, जब परमेश्वरके वचन सुननेके निमित्त लोग गिरे पड़ते थे, ईसू शमऊनकी नावपर चढ़कर उपदेश दे रहा था। शमऊनसे कहा कि, आखेटके निमित्त अपना जाल डालो तब उसने उत्तर दिया कि, ए परमेश्वर! हमने समस्त दिवस परिश्रम किया पर कुछ न पकड़ा परन्तु तेरे आदेशसे जाल डालता हूँ। जब जाल डाला तब वह मछलियोंसे ऐसा भर गया कि, वह अकेला खींच न सका, दूसरोंकी सहायतासे खींचकर नाव मछलियोंसे भरली। शमऊनने ईसूपर विश्वास किया और उसके चरणोंपर गिरा। तब ईसूने कहा कि, तू भयभीत न हो इस घड़ीसे तू मनुष्योंका आखेटकारी होगा, सब कुछ छोड़कर शमऊन इसूक पीछे होलिया। (२२) ईसूने अपने शिष्योंको आज़ा दी कि, असि खरीदकर बाँधो।
योहूनकी इज्जील—(१४) बाब (८) आयत, फ़ीलबोसने कहा कि ए परमेश्वर पिताको हमें दिखला कि, हमें यथेष्ट हैं। (९) ईसूने उससे कहा कि, ए फ़ीलबोस! इतने समयसे मैं तेरे साथ रहता हूँ और तूने मुझे न जाना जिसने मुझे देखा उसने मेरे पिताको देखा, फिर तू कौसे कहता है कि, पिताको हमें दिखला, क्या तू निश्चय नहीं करता है कि, तेरा पिता मैं हूँ, पिता मुझमें है? यह बातें जो मैं तुझे कहता हूँ मैं आपसे नहीं कहता परन्तु मेरा पिता जो मुझमें रहता है, वह बातें करता है।
करनतियूनके लिये पोलूस रसूलका पत्र।
(१) बाब (९) आयतमें विद्वानोंकी विद्वत्ता एवम् समझवालोंकी समझको तुच्छ करूँगा। विद्वान् कहो फ़क्रियः कहो इस संसारका विवाद करने-वाला क्या, परमेश्वरने इस संसारके बुद्धिमानोंकी मूर्खता नहीं ठहराई। तथा (८) बाब (१६) आयत और जब इसने नवीन की, तब पहलेको मिथ्या ठहराया। वह जो प्राचीन तथा दिनी है मिटनेके समीप है, अर्थात् प्राचीनसे नवीन विशेष शुद्ध है।