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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

मुहम्मदसाहिब और मुहम्मदे गिजाली हजरत दाऊत नबी समीक्षा, सुलेमान

فَلَا تَأْسَوْيْ عَلَيْهِ وَنَفْسٌ فِي ضَيْقٍ قَفَّارٍ

अर्थात्—जब ठीक करूँ उसको और फूंकदूँ उसमें अपनी जान तो गिर पड़ियो उसके दण्डवत्में।

अर्थात् खुदा परितोसे आज्ञा करता है कि, जब मैं अपनी आत्मा फूंक दूँ तब तुम सब फिरिश्ते उसके दण्डवत्को झुक पड़ना। खुदाने आदममें गमन किया। आदम सब मनुष्योंमें इस कारण सर्व मनुष्यों तथा खुदाओंमें अविद्या तथा विद्याकी विभिन्नता है। यदि मनुष्यको विद्या हो तो खुदा तथा मनुष्यमें किसी प्रकारकी विभिन्नताही नहीं रह सकती।

४८ मनुष्यसे बन्दर—कुरानमें (९) सिपारा सूरए आराफ (२०) रुकूअ (१६२ से १६७) आयत पर्यन्त लिखा है। बदल लिया अन्यायियोंने उनमेंसे और नुकता सिवाय उसके जो कह दिया था। फिर भेजा हमने उनपर अज्ञाव आसमानसे बदला उनकी दुष्टताका। फिर बढ़ने लगी जिस कामसे मना हुआ था तब हमने हुकम किया कि, हो जाओ फटकारे हुये बन्दर।

दाऊदके समय शुक्रवारके दिन यहूदको प्रार्थना करना उचित था पर उन्होंने स्वीकार नहीं किया। शनिवारके दिन बन्दना करने लगे। आज्ञा थी कि, उस दिन मछलीका आखेट न करें, पर कुछ लोग करते रहे। खुदाने उन्हें बन्दर बना दिया। तीन दिन तक वे बन्दर रहे इसके पीछे मर गये। बन्दरोंकी सन्तान इन्हींसे अबतक प्रचलित है।

अब यह बात प्रमाणित हुई कि, पहली देहमें मनुष्य थे फिर बन्दर हुए उनसे बन्दरोंका वंश अबतक प्रचलित है।

नरक स्वर्गका जाना—इसी तरह हदीसोंके अनुसार महाप्रलयके मैदानमें चार प्रकारके मनुष्य प्रगट होंगे। वैकुण्ठके लोग, नरकके लोग, पशु तथा कीड़े मकोड़े। यह सर्व स्वरूप जो दिखाई देंगे अपने अपने कम्मनुसार स्थान पावेंगे। वैकुण्ठके वैकुण्ठ, नरकके नरक और इदं गिदं कीड़े मकोड़े और पशुओंमें गमन करेंगे।

४९ खिलाके अभिध्यामें लिखा है:—

إِنَّ الَّذِينَ سَبَقَتْ لَهُمْ أَمْوَالٌ وَأَوْلَادٌ عَمَّا يَبْعُدُونَ

अर्थात्—जिनके निमित्त हमारी ओरसे भलाई हो चुकी वे लोग नरकसे बचे रहेंगे।

फिर कुरानमें देखो :—

وَإِنَّ مِثْلَهُمْ لَأَوَّلُونَ

अर्थात्—कोई मनुष्य नहीं अर्थात् सब मनुष्य भले तथा बुरे एक बार अवश्यही नरकमें जावेंगे । अतः पहली बात पिछली बात सत्य हो । यह दोनों बातें एक दूसरेके विरुद्ध हैं । यदि एकको सत्य माना तो दूसरी झूठ होती है परन्तु यह दोनों आयतें सत्य हो सकती हैं कि, जिनके कर्म भले हैं वे इस शरीरसे नरकको न जायेंगे, पर किसी दूसरे शरीरमें जावेंगे । उनसे किसी प्रकारका पाप हो तो वास्तवमेंही संसार चक्रमें पड़कर नरकमें चले जायेंगे ।

५० तारीख मुहम्मदी—तालीम मुहम्मदी नामक पुस्तकके अनुसार इस प्रकार लिखा है कि, तजकिरतुलमौलामें काजी सनाउल्लाने इस विषयकी जाँचमें कि, मृत्युके पीछे मनुष्यकी आत्मा कहाँ जाती है कुरान तथा हदीससे बड़े विचारके साथ बहुतसा वृत्तान्त लिखा है । जिसका संक्षेप यह है । दो मकान हैं । एकका नाम सज्जैन है । अरबीमें सज्जैन बन्दीगृहको कहते हैं । अतः सज्जैन अत्युक्तिसे बड़ा जेलखाना है काफिरोंकी आत्मायें उसमें बन्द रहती हैं । दूसरा मकान अल्लैन है अल्लैन अल्लैयाका बहुवचन है । अर्थात् ऊँची खिड़कियाँ । अर्थात् वैकुण्ठ जहाँ मुसलमानोंकी आत्मायें जाती हैं ।

अबुदाऊदअबुहरीरा—का कथन है कि, हजरतने फ़रमाया है कि, वैकुण्ठमें एक पर्वत है वहाँ पर मुसलमानोंके बच्चोंकी आत्मायें जाती हैं । इवराहीम तथा सायरा उनका पालन करते हैं । जब महाप्रलय आवेगी तब उन बच्चोंकी आत्मायें उनके माता पिताको सौंप देंगे ।

मकदूलसे खायत है कि, मुसलमानोंके बच्चे पक्षियोंके सूतमें वैकुण्ठ में उड़ते फिरते हैं, फिरउनके घरानेके बच्चे एक काले रङ्गके पक्षीके समान हैं । जो प्रातःकाल तथा संध्याको नरकके सामने लाये जाते हैं । कुछ हदीसोंमें हैं कि, मुसलमानोंकी आत्मायें पक्षियोंके समान वैकुण्ठके वृक्षों पर उड़ती फिरती हैं । महाप्रलयके दिन शरीरोंमें आयेंगी पर शहीदोंकी आत्मायें एक हरे जानवरके पेटमें प्रविष्ट होती हैं रातके समय यानी बसेरेके समय उन कन्दीलोंके बीच जो कि खुदाके सिंहासनके नीचे लटकती हैं आकर बसेरा लेती हैं ।

समीक्षा—यहाँ यह बात समझना चाहिये कि, आत्माका कैद रहना सम्भव नहीं है शरीरके साथ वह सचमुचही कैद रह सकती है । यह भी ठीक नहीं कि, आत्मा किसीके प्रतिपालनका मुहताज हो । इबराहीम तथा सायरा