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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

कबीर पन्थका जैनमत निरूपण

नहिं रब्त् सत्सङ्गृत किबा दरियायमें सो डूब है ॥
आजिज यह सब तू छोड दे दुनियासे रिश्तः तोड दे ।
बाग अपनी इनसे मोड दे आशिकको यह मायूब है ॥

उडकर न पार होगा तीतर बटेर भरें ।
आखिर शिकार होगा तीतर बटेर भरें ॥
कुछ सोच फिक् करले तू देख पार परले ।
दिल कब क्रारर होगा तीतर बटेर भरें ॥
आकाश उडके जावे वहां से पकड गिरावे ।
फिर सर ब दार होगा तीतर बटेर भरें ॥
बदबूय सारे आवे वह गुल कहां तु पावै ।
हर जामें खार होगा तीतर बटेर भरें ॥
जहां जाय सब बेगानः नहिं दोस्त और येगानः ।
नहिं विल फिगार होगा तीतर बटेर भरें ॥
आजिजकी गुफ्तगू सुनकर सीख लेवे वह गुण ।
नहिं सङ्गसारोंका तीतर बटेर भरें ॥

जगतके जीव राम क्या जानें । करना क्या है सो काम क्या जानें ॥
घास चरना व बोल हैवानी । भेड बकरा सलाम क्या जानें ॥
दबदबः दिले दिमागो दौलतो जाह । औज शाहां गुलाम क्या जानें ॥
गंदें गुफ्तार सुन हुये गन्दे । पाक साहब कलाम क्या जानें ॥
कैल फर्जन्द आम्बिया सिद्ध साधु । सत साहब पयाम क्या जानें ॥
काल बखशिशमें सब हुये मदहोश । अकबर २ इनाम क्या जानें ॥
जिन कोसिरमें है अकल हैवानी । जिन्दगी इन्तिजाम क्या जानें ॥
जो जमीनके हैं बुजदिलो गेदी । कद्र दारुलमुहाम क्या जानें ॥
झूठमें जगत लग रहा सारा । वस्फु सो सत्य नाम क्या जानें ॥
साधुका भेद कोई जाने साधु । विष्णु ब्रह्मा व बास क्या जानें ॥
दुनियवी आदमी हैं सब अन्धे । काल जज्जाल दाम क्या जानें ॥
अकल और नकल पीरो कुल आलम । अस्लको अकलखाम क्या जानें ॥
जोहरी कोई जान जोहर जो । बे बहा अजदहाम क्या जानें ॥
जिन्दगी बखश गोश नोशिन्दः । कौन साकी व जाम क्या जानें ॥
घर बघर देखिये खोरिश हैवों । कौन इन्सों तआम क्या जानें ॥

है करोड़ोंमें कोई रहबर एक । दुनिबवी खासोआम क्या जानें ॥
कहाँ आये कहाँको है जाना । अल्हे दुनिया मुकाम क्या जानें ॥
कौनसी राह चढ़ चलें किसपर । अस्प सो तेज गाम क्या जानें ॥
सन्त बतलावें जानै आजिज्ज सो । हिन्दियां हाड़चाम क्या जानें ॥

साखी कबीर साहबकी ।

सन्त जगतमें भगत हैं सन्त रामके पूत ।

सन्त न होते जगतमें तो राम जावता ऊत ॥

गजल—तेरा शीरीं कलाम ऐ तूती । हुई सैद बदाम ऐ तूती ॥
पिजरेसे तू छूट जाये किधर । कर जो तू सद सलाम ऐ तूती ॥
उड़ जिधर जावे तो पकड़ लावें । हो गई अब गुलाम ऐ तूती ॥
मीठी बोलोंसे आ तुझे घेरें । गर्द तुझ अजदहाम ऐ तूती ॥
अब तू सैयाद के हाथ पड़े । होवै एक दिन तआम ऐ तूती ॥
कर दिया है तुझे हब्स दायम । यह तेरी अकल खाम ऐ तूती ॥
गर करे बात बावर आजिज्ज की । जाप कर सत्य नाम ऐ तूती ॥

तू बात को न माना खुद अकिल पर दिवानः ।

शैतान वरगलाना कर काम मुर्ग बिस्मिल ॥

बे रहम काजी मुल्ला तू आन इनमें भूला ।

तुझको चढावै चूलहा कर कान मुर्ग बिस्मिल ॥

हर तरफ हैं कसाई इनसे न कुछ बसाई ।

तुझे घर की न रसाई कर कान मुर्ग बिस्मिल ॥

आजिज्ज को बात मानो उसी मेहरबानको जानो ।

मत बात अपनी ठानो कर कान मुर्ग बिस्मिल ॥

तू भार से लदा है खुद यारसे जुदा है ।

तेरा न हक अदा है क्या चीखता है गदहा ॥

कूड़ा कबाड़ खावें तो भी न होश आवें ।

वेददं हो लदावें क्या चीखता हैं गदहा ॥

दिनरात मार खाना उसही गलीमें जाना ॥

यह सब तेरे बिगानः क्या चीखता हैं गदहा ॥

धोबी कुम्हार लादा कहाँ तेरा बाप दादा ।

कहाँ मान और मर्यादा क्या चीखता है गदहा ॥

कर मीत से भित्ताई तदबीर यह बताई ॥
आजिज तुझे जताई क्या चीखता है गदहा ॥

पहिचान ले कसाई फिर नहीं गला कटाई ।
पञ्जे न उसके आई कर होश भेड़ बकरी ॥
गल कट्ट है जो तेरा इस घर किया है देरा ।
सुन व आज पन्द मेरा कर होश भेड़ बकरी ॥
पहिले न कहना माना हङ्कार दिलमें आना ।
खुद अकिल पर दिवानः कर होश भेड़ बकरी ॥
अब तो गला कटैगा क्रस्साब क्यों हठैगा ।
खुद ठाठ सो ठटैगा कर होश भेड़ बकरी ॥
आजिज खड़ा पुकारा तुम में जो हो कड़ारा ।
ले जो पुनह सहारा कर होश भेड़ बकरी ॥

अपनी जमाअत जोड़ै रिश्ता न जब तोड़ै ।
हरगिज न काल छोड़ै सुन बात ढक मकोड़े ॥
लशकर हजारहा है न शुमार कुछ कहा है ।
हरगिज न कोई हटावै आफ़ात ढक मकोड़े ॥
दौलत जखीरा सब है तेरी न रख वह रब है ।
जा ऐश और तरब है सदमात ढक मकोड़े ॥
क्यों ? जोड़ता जखीरा खूब यह वतीरा ।
आकर तुझे ले तौड़ें घर लात ढक मकोड़े ॥
पांवों तले तू पिस्ता तौ भी न तुझे दिस्ता ।
आकर तुझे ले तौड़ें घर लात ढक मकोड़े ॥
पांवों तले तू पिस्ता तौ भी न तुझे दिस्ता ।
आजिज की व आज सुन ले यह घात ढक मकोड़े ॥

बकरीका ग़ज़ल ।

सौ बार सिर कटाया तौ भी न होश आया ।
इस बार चेत भाई तू राम बोल बकरी ॥
अब तेरी क्या खता है क्यों तेरा शिर कटा है ।
तू घास फूस खाये तो राम बोल बकरी ॥
तुझपर जो जुल्म कर है, हकसे न उसको डर है ।