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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

शिवतन्त्रका प्रमाण ७ अ० विष्णुभगवान्

रामानन्द स्वामी ।

रामानुजस्वामीके सम्प्रदायमें रामानन्दस्वामी कबीर साहबके भी गुरु उत्पन्न हुए । रामानन्दस्वामी काशीधाममें रहा करते थे । रुणावस्थामें उनके आचार्यमें कुछ भेद पड़ गया था । फिर जब आप दक्षिणके आचार्योंमें गए तब उन लोगोंने आपको अपने समूहसे पृथक् कर दिया । तब रामानन्दजीने अपने गुरु राघवानन्दसे पूछा कि, अब क्या करूँ ? तब राघवानन्दने कहा कि, तुम आचार्योंसे पृथक् हो जाओ । तुम्हारी एक न्यारी सम्प्रदाय चलेगी । इस दिवससे रामानुज और रामानन्दके लोग पृथक् हुए । रामानुज और रामानन्दकी सम्प्रदाय पृथक् हुई । रामानुज सम्प्रदायके आचार्यकी कड़ाई रामानन्दके सम्प्रदायमें नहीं । इस सम्प्रदायमें प्रत्येक जातिका मनुष्य सरलतापूर्वक मिल जाता है । रामानुजके सम्प्रदायमें जातिका विशेष ध्यान रहता है । इन दोनों सम्प्रदायोंके लोग एकही हैं तथापि उनकी रीति भौति पृथक् पृथक् हैं ।

तीन सम्प्रदाय ।

इन सम्प्रदायोंके रीतिव्यवहारमें तनिक विभिन्नता है । एक दूसरे से अपनी रीति भौतिको श्रेष्ठ जानते हैं । विष्णुश्याम माधवाचार्य निम्बार्क रामानुजके लोगोंके सदृश ये सब ठाकुरपूजा करते हैं । इन चारों सम्प्रदायोंके मनुष्य, कुछ २ पृथक् २ ध्यान रखते हैं । सब रामकृष्णकी मूर्तिपूजते हैं । कोई भीतरी पूजा करता है चार प्रकारकी मुक्तिके अभिलाषी हैं । इसका समस्त विवरण ग्रंथ कबीरभानुप्रकाशमें सविस्तार लिखा गया है । इन चारों साम्प्रदायोंकी चाल पूर्णतया सतोगुणी हैं । सतोगुणी चाल और ढङ्ग मुक्तिमार्ग दिखलानेवाले हैं । जबलें मनुष्य सतोगुणकी चलन स्वीकार न करे तबलें उचित स्थानपर्यन्त पहुँच नहीं सकता । इसी कारण कबीर साहबने समस्त धर्मोंपर इस धर्मको श्रेष्ठ समझा है ।

अध्याय ९ ।

पश्चिमके महापुरुष ।

यद्यपि कबीर मन्शूर में उन्हीं पुरुषोंके प्रसंग आने उचित थे जो कि, कबीरसाहिबकी दिव्य वाणीसे सम्बन्धित हैं, पर पश्चिम देशके महात्माओंका जीवन केवल इसीलिये यहाँ रखा गया है कि, कबीर दर्शनके प्रेमियोंको पश्चिमके महात्मा पुरुषोंके जीवनका भी पता चल जाय कि, पश्चिमके निवासी इन

व्यक्तियोंमें विशेष भाव रखते हैं। तथा इनमेंसे बहुतोंका प्रकरण उनकी वाणीमें आ भी गया है यह भी एक कारण इस प्रसंगके यहाँ रखनेका है।

हजरत आदम तथा नूह महात्मा ।

हजरत आदम तथा नूह दोनों श्रेष्ठ महात्मा हुए। आपकी बातें परमेश्वरके साथ हुवा करती थीं। विष्णु प्रत्यक्षमें आपको दर्शन दिया करते तथा आपसे वार्तालाप किया करते थे। कबीर साहबने कहा कि, आदम ब्रह्माका अवतार है। आदमके बाद हजरत नूह आदमके समान हुए। जिससे समस्त सृष्टिकी उत्पत्ति तथा स्थिति है। सांसारिक वासनाओंमें फँसे हुए तथा पूरे और पक्के दुनियाँदार थे।

हजरत इबराहीम और इसहाक आदि।

हजरत नूहके उपरान्त इबराहीम बड़ा धार्मिक हुवा, एक परमेश्वरके माननेमें बड़ा सच्चा था। परमेश्वरपर भरोसा रक्खा करता था। ये पश्चिमीय देशोंके भविष्यवक्ता गण प्रायः गृहस्थ थे। स्वच्छ हृदय तथा भले थे अपने आन्तरिक प्रकाशसे बहुतसी बातोंको जान लेते थे। हजरत इबराहीमके साथ परमेश्वर बातें किया करता था बरन् आपके शिष्टाचारको भी ग्रहण किया करता था। इबराहीमका पुत्र इसहाक भी ऐसाही अपने पिता इबराहीमके सदृश भला आदमी एवं ईश्वरपूजक था, दोनोंके गुण तौरीतमें देखो।

इसहाकका पुत्र याकूब अपने श्वशुरकी भेड़ बकरियाँ चराता था। स्त्रीके निमित्त उसने चौदह वर्षपर्यन्त अपने श्वशुरकी सेवा की।

याकूबका दूसरा नाम इसराईल हुवा। परमेश्वरने उसको आशीर्वाद दिया, उसके बारह पुत्र हुए, वही यहूदियोंके बारह सरदार कहलाते हैं। ये सब गृहस्थ और सांसारिक वासनाओंमें सने हुए हैं।

इसराईलकी परिश्रम सेवा पर परमेश्वरने दया की कि, उसके बारह पुत्र, बरन् कनआनके सम्भ्राद् हो गए।

हजरत दाऊन और सुलेमान।

हजरत दाऊन बादशाह और नबी था। परमेश्वरके प्रेममें गाता नाचता और रोता था। उसने बादशाहीमें बहुत रक्तपात और काटकुटकिया। दाऊदके गानेमें बड़ा प्रभाव था, जैसा कि मने इतः पूर्व दिखलाया है। दाऊदका पुत्र सुलेमान बादशाह हुवा। इन दोनों महाशयोंकी परमेश्वरसे आपसमें वार्तालाप हुवा करती थी। सुलेमान बादशाहको परमेश्वरने तीनों पदार्थ प्रदान किये। अर्थात् बुद्धिमानी, अनागतवक्तृता और बादशाही। इन दोनों महाशयोंका वृत्तान्त पुराने अहदनामा और मुसलमानी हदीसोंमें देखो।

दाऊद बादशाहकी निन्यानवें स्त्रियाँ थीं। परन्तु उरियाह अपने भृत्यकी स्त्रीको अपने कार्यमें लानेके कारण वह विशेषतः बंधनमें पड़ा। परमेश्वर उससे रुष्ट हो गया। परन्तु उसके रोने धोनेके कारण परमेश्वर उसपर दयालु हो गया।

दाऊदका पुत्र मुलेमान जब सिंहासनारूढ़ हुवा तब उसने आनन्द सम्भोगके अनेक आयोजन किये, उसकी जो सातसौ स्त्रियाँ और तीन सौ वेश्याएँ थीं, उन सबने मिलकर मुलेमानकी बुद्धि भ्रष्ट कर दीं। मूर्तिपूजा करवाई। ये दोनों महाशय सांसारिक शारीरिक विकारोंके वशीभूत हुए इस लोकसे विदा हुए।

हजरत मूसा।

हजरत मूसा का जन्म मिश्रदेशमें हुआ। इबराहीमके घरानेमें मूसा श्रेष्ठ नबी (भविष्यवक्ता) हुवा। उसको फ़िरऊनके बंधनसे इबराहीमकी सन्तानको छुडानेके निमित्त परमेश्वरकी आज्ञा हुई। यह फ़िरऊनकी सेवामें उपस्थित हुवा परमेश्वरकी आज्ञासे अनेक कौतुक दिखलाये। इब्रानियोंको फ़िरऊन बादशाहके बंध बंधनसे छुडाकर कनआऊनके वास्तविक देशमें पहुँचा दिया। इसका पूर्णतया विवरण किताब तौरीतकी उत्पत्तिमें लिखा है।

चालीस वर्षके वयमें मूसाने एक मिसरीको इक इब्रानीके बदले मार डाला। इस भयसे कि, अब फ़िरऊन (परमात्मा बांगीशाह) मुझको मार डालेगा भयसे वह भागा। चालीस वर्षपर्यन्त महमानियामें अपने श्वशुर पतरूकी भेड़ बकरियाँ चराता रहा। अस्सी वर्षके वयमें मूसाने अपूर्व तत्त्ववक्ताकी पदवी पाई। परमेश्वरकी आज्ञासे पुनः मिश्र देशको गया। मूसाका वृत्तान्त तौरीत और गुलजार मूसा और अहादीस मुहम्मदियामें इस प्रकार लिखा है कि, जब इब्रानियोंका आधिक्य देखा गया तब फ़िरऊन नितान्तही भयभीत हुवा कि, यह सब चढ़ाई करके मेरा राज्य न छीनलें। उनको बालकोंकी हत्या वह करने लगा। जब इब्रानियोंकी रोलार्डका शब्द आकाशपर्यन्त पहुँचा तब परम दयालु परमेश्वरको दया आई। कुतुबमुहम्मदियामें लिखा है कि, एक दिवस फ़िरऊनने ऐसा स्वप्न देखा कि, शाम देशमें एक ऐसी अग्नि आई है कि, जिसने मेरे मिश्र देशको जलाकर भस्म कर दिया है। यह स्वप्न देखकर वह नितान्तही भयभीत हुवा। बुद्धिमानोंसे पूछा कि, इस स्वप्नका तात्पर्य कहो? उन लोगोंने कहा कि, इब्रानियोंमें एक ऐसा मनुष्य उत्पन्न होगा जो फ़िरऊनके राज्यको

मिटादेगा । इस भयसे फ़िरऊन नितान्तही भयभीत हुवा । इब्रानियोंके बच्चोंको मारने लगा । सदैव ज्योतिषियों पण्डितोंसे पूछा करता था कि, वह बालक किस दिवस और किस समय गर्भमें आवेगा । तब उन लोगोंने बतलाया कि, अमुक दिवस रात्रिके समय वह बालक गर्भमें आवेगा । जिस दिन इन लोगोंने बतलाया था उस रात्रिके दिवस फ़िरऊनने आज्ञा दी कि, कोई पुरुष स्त्रीसे संभोग करने न पावे । समस्त इब्रानियोंको नगरके बाहर निकाल दिया । बड़ी चौकसीसे पहारा खड़ा कर दिया । एक इब्रानी जिसके वीर्यसे मूसा उत्पन्न होनेवाला था उसका नाम उमरान था । इस उमरानको फ़िरऊनने अपनी निजकी पल्लेगके समीप अपने शयनागार में खड़ा कर रक्खा । जब अर्ध निशाका समय हुवा तब एक दूत इस उमरानके निकट उसकी स्त्रीको ले आया, उसने अपनी स्त्रीके साथ संभोग किया । इसके उपरान्त वह दूत उस स्त्रीको उठाकर पुनः उसी स्थानपर उसके गृह रख आया । इस अवसर फ़िरऊन ऐसा घोरनिद्राके वशीभूत हो रहा था कि, उसको तनिक भी सुध न रही कि, वह स्त्री किधरसे आई किधर गई और क्या हुवा ।

जब प्रातःकाल हुआ तब फ़िरऊन पुनः ज्योतिषियों और बुद्धिमानोंसे प्रश्न करने लगा कि, उस बालकका वृत्तान्त कहो ? उन लोगोंने उत्तर दिया कि, वह बालक तो माताके गर्भमें आचुका । मेरी कोई युक्ति नहीं चली । तब दाइयोंको सचेत किया कि, बच्चा उत्पन्न होतेही मार डालो, अन्तमें जब गर्भ-काल समाप्त हुआ तब उमरानकी स्त्रीके गर्भसे एक अत्यंत सुन्दर बालक उत्पन्न हुआ । तब माता पिताने बच्चाके प्रेमसे तीन मासपर्यन्त छिपाकर रक्खा । फिर इनके मनमें इस अत्याचारी बादशाहका भय उत्पन्न हुवा । तब इन्होंने एक सरकण्डेकी टोकरी बनाई उसमें उस बच्चेको रख दिया अपनी पुत्री मरियमसे कहा कि, तू इस टोकरीको बच्चेसहित नीलनदीके तटपर रख आ । तब मरियम गई, उस बालकको नदी तटपर झाऊके वृक्षोंमें रखकर चली आई । मरियम दूर खड़ी होकर देख रही थी कि, देखिए इस बालकको क्या होता है ? इतनेमें क्या देखा कि, फ़िरऊनकी बेटी अपनी लौंडियोंको साथ लिए स्नानार्थ नदी तटपर आपहुँची । उस बच्चेको उस टोकरीमें देखा उसके मनमें उस बच्चेका प्रेम उपजा और दया आई । उसने कहा कि, यह किसी इब्रानीका पुत्र है । अपनी लौंडियोंको आज्ञा दी कि, इस बच्चेको ले चलो । वह अपने गृह ले आई इस बच्चेको अपना मुंहवोला पुत्र मान लिया, इस समस्त घटनाको मरियम दूसरे खड़ी होकर देख रही थी । जब फ़िरऊनकी पुत्री उस बालकको अपने

गृहमें ले गई उस समय मरियम उसके पास दौड़ी गई और कहा कि, यदि आज्ञा दो तो मैं इस बच्चेके निमित्त एक दूध पिलानेवाली दाई ले आऊँ। तब राजकुमारीने आज्ञा दी कि, ले आओ। तब मरियम उसी समय गई और अपनी माताको बुललाई। राजकुमारीने उसे सेवा तथा दूध पिलानेके निमित्त रख लिया। जो उस बालककी माता थी वही दूध पिलाई दाई बन गई। इस बच्चेको अत्यंत प्रेम सहित पालने लगी। इस बच्चेका नाम मूसा रक्खा गया मिसरी भाषामें मूसाके अर्थ जलसे निकलाके होते हैं। मूसा इस राजकुमारीका मुंहबोला पुत्र होकर पलने लगा। जब फ़िरऊनने उस बालकको देखा तब ज्योतिषियों से पूछा कि, इस लड़केका हाल कहो कि, कैसा है? तब ज्योतिषियोंने कह दिया कि, यह वही बालक है जो तुझे तथा तेरे राज्यको चौपट करेगा। यह बात सुनकर फ़िरऊन उस बालकके मारनेपर प्रस्तुत हुवा। पर उसकी पुत्रीने उसकी ओरसे निवेदन किया कि, यह अनजान बालक है यह आपका कोई दोष नहीं करेगा। समस्त ज्योतिषी झूठे हैं। तात्पर्य यह कि, अपनी पुत्रीके कहने सुननेसे उस बालककी हत्या नहीं की। एक दिन फ़िरऊनने मूसाको अपना नाती समझ अपने क्रोडमें प्यार करने लगा। इतनेमें मूसाने फ़िरऊनकी दाढ़ीको पकड़कर इतने जोरसे खींचा कि, फ़िरऊनके नेत्रोंसे जल निकलने लगा। इस पर उसको निश्चय हो गया कि, यह बालक मेरा बँरी है। आज्ञा दी कि, इसका बध करो। तब पुनः फ़िरऊनसे लड़कीने प्रार्थना की कि, यह अनजान बालक है। यह मैंत्री अथवा द्वेष क्या जाने इस अनजानको न मारिये। फ़िरऊनने कहा कि, यदि यह अनजान बालक है तो इसकी परीक्षा ली जावे। इस बालकके सामने दो ढेर लगा दिये एक तो अग्निके लाल कोयलोंका और दूसरा लाल लालोंका ढेर लगा दिया और कहा कि, यदि यह बच्चा लाल अङ्गारोंके ढेर पर हाथ डालेगा तो मैं समझूंगा कि, यह बच्चा अबोध है, यदि इसने लालोंको पकड़ा तो बेसुध नहीं है इस कारण यह मारा जावेगा। जब दोनों ढेर मूसाके सामने लगाये गये मसाने चाहा कि, लालोंके ढेरपर हाथ डालें। तब परमेश्वरकी ओरसे इतने गुप्तरीतिसे मूसाका हाथ पकड़कर शीघ्रतापूर्वक अग्निपर डाल दिया। उस अग्निमेंसे एक अङ्गारा पकड़कर मूसाकी जिह्वापर रख दिया। उसकी जिह्वा जल गई। इसी कारण मूसाकी जिह्वा तोतली हो गई। फ़िरऊनने जान लिया कि, वास्तवमें यह अबोध बालक है, मूसाकी हत्या नहीं की। उस बच्चेका लालन पालन होने लगा। फ़िरऊनकी पुत्रीने उसके पढ़ानेके निमित्त एक शिक्षक रक्खा, वो भली भाँति शिक्षा पाने लगा, अत्यंत सावधानीपूर्वक पाला गया, फ़िरऊनके नातीके