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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

मूसा और मौत

शाप दूँ ? तब बालकशाहने बलआमको बहुतसा द्रव्य तथा उत्तमोत्तम भेंट भेजे । बलआमके मनको अपने वशमें कर लिया । बलआमने ईशको शाप दिया तीन बार ईश परास्त हुआ । उसने खुदासे निवेदन किया कि, ऐ खुदा ! तूने इस जातिको वरदान दिया । अब परास्त क्यों किया ? तब आवाज आई कि, ऐ ईश तेरे लिये बलआम शाप देता है इस कारण तू पराजित हुआ है । ईशने प्रार्थना की, कि ऐ खुदा ! बलआमकी तपस्याका सब बल नष्ट करदे । तब बलआमकी सब सिद्धाई जाती रही ।

पूर्वजन्मका कुत्ता—यह बलआम पूर्वजन्ममें असहाक कहफका कुत्ता था । अपने पूर्वकालके शुभकर्मोंसे बलआमकी देहमें आतेही इसने बड़ी भक्ति की पर्वतोंकी गुफाओंमें जाकर बन्दना करता था तीनसौ बरसका सिद्ध था । ईशके विरुद्ध होनेसे उसकी सिद्धाई तो विलुप्त होगई पर खुदाने उसपर दया की वह वैकुण्ठको गया । मुसलमानी पुस्तकोंमें मैंने पढ़ा था कि, यह मनुष्य बड़ा विद्वान था । इसी प्रकार मनुष्यके शरीरमें पशु आवागमन करते हैं । मनुष्यके शरीरमें आकर सुकर्म करते हैं तो वैकुण्ठको जाते हैं, कुकर्मोंसे चौरासी लाख योनिमें आवागमन किया करते हैं नरकको भी चले जाते हैं । आवागमनके सम्बन्ध कभी भी नहीं टूटता, तुदफये असनाय अशरामें लिखा है यही हदीदमें भी आया है कि, असहाक कहफके कुत्तेकी रूह बल अमबाऊर (जिसमें मूसाके विरुद्ध बनी इसराईलको शाप दिया था) के चोलामें प्रवेश करके विहिश्त गये ।

४१ इस्लामी फिरके—करावत, कामला, मनसूरिया, मुफसिसला आदि सब फिरके तनासुखको मानते हैं उसको सभी स्वीकार किये बैठे हैं मुसलमानोंका मुतना सिखिया फिर्का कहता है कि, आत्माका बराबर आवागमन होता है ।

४२—मुहम्मदियोंका ग्यारहवां फिरका जो राजियाके नामसे प्रसिद्ध है । इस राजीअ जातिके लोग कहते हैं कि, हजरतअली पुनः संसारमें आवेंगे अभी वे बादलमें हैं ।

४३—मुसलमानोंके अठत्तरवें फिर्काका नाम तयारिया है । उनका विश्वास यह है कि, हजरत आदममें खुदाकी आत्मा थी । जब मनुष्यकी आत्मा देहसे निकल जाती है फिर दूसरे शरीरमें होकर संसारमें आया जाया करती है ।

४४—मुहम्मदियोंका छियासीवां फिर्का इसमाईलियाके नामसे प्रख्यात है । तारीखनिगारिस्तान और तारीख गिरिन्दा और विशेषतः जीन तुलतारीखमें लिखा है कि, इस जातिका विश्वास है कि, कुरान मनुष्यकी बनावट है किसी पक्के जालसाजद्वारा बनी है । क्योंकि, इसमें मिथ्याको सत्यके साथ

ऐसा मिलाया है कि, बिना भली प्रकार ध्यान दिये प्रत्येक मनुष्य उसको समझ नहीं सकता, मनुष्यहीकी आत्मा जब एक शरीर छोड़ती है तब दूसरी और तीसरी ओर अनगिनती देह धर धरके पुनः संसारमें आया जाया करती है।

४५ मुहम्मद बोध—कबीर साहबके ग्रन्थ मोहम्मद बोधमें लिखा है कि, मोहम्मद साहब पुनः उत्पन्न होंगे, उनको सत्यगुरुका उपदेश मिलेगा वे मुक्ति पावेंगे। इस बातपर नानक साहबकी साखी है। देखो नानकशाहकी जन्मसाखीमें लिखा है। जब नानकशाह भक्का गये थे उस समय मरदाना मीरासीसे कहा कि, मुहम्मद साहब पन्द्रह सौ वर्ष तक बैकुण्ठ में रहकर फिर पृथ्वीपर आकर एक शूद्रके गृहमें जन्म लेंगे। उनको परलोकी सत्यगुरु मिलेगा। उस गुरुकी दयासे वे परमधाम सिधारेंगे। यहाँ दोनों प्रतिष्ठित महापुरुषोंके कथनानुसार मुहम्मद साहबका आवागमन प्रमाणित होता है।

४६ प्रकृति नहीं बदलती—मनका विचार बदलनेके विषयमें मशकात किताब बाबुल ईमान अजाबुलक़ब्र अहमदसे रवायत अबीदरवासे इस प्रकार लिखा है कि, यदि तुम सुनो कि, एक पर्वत अपने स्थानसे टल गया तब तुम उसका विश्वास कर लेना। यदि सुनो कि, एक मनुष्यकी प्रकृति बदल गई तो कदापि विश्वास न करना। क्योंकि, मनुष्य अपनी प्रकृतिकी ओर झुका करता है। यह बात ठीक है कि, भाग्यने जो बनाया सो बन गया। मनुष्योंकी शिक्षा भी पशु-वोंको मनुष्योंके ढङ्गका बनाती है। कुरानमेंभी आया है कि, खुदा जिसको चाहे ईमान प्रदान करे, जिसको चाहे भटका दे। पूर्वजन्मके कर्मोंने स्वरूप बनाया। वर्तमान कृत्य उनको बदल सकते हैं। तीनों कालके कर्म आवागमनके बन्धनमें फँसे हुए हैं।

४७ अपनी आत्माका डालना—तौरीत तथा कुरान दोनोंसे यह बात प्रमाणित होती है कि, खुदाने आदमको अपने स्वरूपका बनाया। उसमें अपनी आत्मा डालदी। अतः खुदाने मनुष्यमें गमन किया। आदम सब मनुष्योंके भीतर गमन करते गये इस कारण एकसे अनगिनती हो गये। सर्व मनुष्यों का शरीर और आत्मा आदमका शरीर और आत्मा है आदमका शरीर और आत्मा खुदाका शरीर और आत्मा है। इस कारण सब मनुष्योंमें आदम आवागमन कर रहा है। आदममें खुदाने गमन किया। आदम खुदाकी आत्मा तथा शरीर है। देखो कुरानका (१४) सिपारा सूरत हजर (२) रकूअ (२९) आयतमें लिखा है :—