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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

आयु

२४—कुरानमें सूरै रुम (२१) सिपारा (२) रकूअ (११) आयतमें लिखा है कि, अलबत्तः बनता है प्रथम बार फिर उसको दोहरावेगा फिर उसके ओर फिर जाओगे ।

२५—कुरानमें देखो सुरै रूप (२१) सिपारा (२) रकूअ (११) आयत में लिखा हुआ है कि, निकलता है जीता मुरदेसे, निकलता है मुरदा जीतेसे, जिलाता है पृथ्वीको उसके मरे पीछे । इसी प्रकार तुम निकाले जाओगे ।

२६—कुरान सूरै रुम (२१) सिपारा (३) रकूअ (२७) आयतमें लिखा है कि, वही है जो प्रथम बार बनाता है । फिर उसको दोहरावेगा, आसान है उस पर उसकी कहावत, सबसे ऊपर आकाशमें और पृथ्वीमें वही है जबर-दस्त हिकमत वाला ।

२७—रोजतुलअहबाबमें लिखा है कि—

أَوَّلُ مَا خَلَقَ اللَّهُ نُوْرُ مُحَمَّدٍ

प्रथम खुदाने नूरमुहम्बदको पैदा किया दूसरी हदीसमें है कि—

أَوَّلُ مَا خَلَقَ اللَّهُ الْقَلَمَ

अर्थात् पहले खुदाने कलमको बनाया जिसमें लोगोंके भाग्यको लिखा तीसरे हदीसमें है कि—

أَوَّلُ مَا خَلَقَ اللَّهُ النَّقْلَ

अर्थात् सबसे पहले खुदाने बुद्धिको उत्पन्न किया जिसमें सोच समझ भाग्यको ठहरावें ।

इन तीनों हदीसोंसे तीन बातें प्रमाणित हुई हैं । इनमें से यदि एक सत्य मानोगे तो दूसरी मिथ्या ठहर जाती है । यदि तीनोंको सत्य मानोगे तो तीन बार उत्पत्तिका होना प्रमाणित होता है । जिससे अनगिनती बेर भी कहा जा सकता है क्योंकि, किसी सृष्टिमें मुहम्मदी तेज पहले उत्पन्न हुआ, किसीमें बुद्धि और किसीमें लेखनी पहिले उत्पन्न हुई ।

२८—आत्माका मोर और फल होनेके बाद बीबी एमनाके गर्भमें जाना—मुहम्मद साहबके नूरनामः में लिखा है कि, खुदाने मुहम्मद साहबकी आत्माको मयूरके स्वरूपमें बनाकर विश्वासके वृक्षपर बैठे दिया । पहले तो मुहम्मदके

तेजने मोरके देहमें प्रवेश किया, फिर उस आत्माने एक फलमें गमन किया, वह फल जिबराईल द्वारा अब्दुल्लाके समीप पहुँचा। वह फल अब्दुल्लाके वीर्यके मार्गसे बीबी एमनाके गर्भमें पहुँचा बीबी एमनाके गर्भसे आहजरत (मुहम्मद) पैदा हुये।

गुलजार मुहम्मद तथा हदीसोंमें यह कहानी लिखी है कि, एकबार खुदाने जिबराईलसे कहा कि, एक फल ला, तब जिबराईलने पूछा कि, ऐ खुदा! कौनसा फल लाऊँ। कुछ उत्तर नहीं मिला। फिर तीसरी बार आवाज आई कि, ऐ जिबराईल! एक फलला, फिर जिबराईलने कहा कौन फल लाऊँ। इतनेमें एक ऐसी आँधी आई कि, जिबराईल उड़ गया। न जाने वह किस देशमें जा पहुँचा। एक बगीचेके द्वार पर जा खड़ा हुआ। जब जिबराईलने अपनेको इस बगीचेके द्वारपर खड़ा पाया तब बगीचेके द्वारपालसे प्रार्थना की कि, मुझे बगीचेके भीतर जाने दे। बगीचेके द्वारपालने पूछा कि, तू कौन है? उसने उत्तर दिया मैं जिबराईल हूँ। द्वारपालने कहा कि, सहस्रों जिबराईल हैं उनमेंतू कौन है। जिबर ईलने अपना पता बताया कि, मैं वह जिबराईल हूँ जो खुदाके समीप खड़ा रहता है। उस द्वारपालने बगीचेके भीतर जाने दिया। जब जिबराईल बगीचेके भीतर गया तब क्या देखता है कि, सहस्रों प्रकारके फल लटक रहे हैं वह बगीचा भली-भाँति हरा भरा हो रहा है। सब फल तथा मेवे जो वहाँ हैं सो सब खुदाकी वन्द-नामें संलग्न हैं, खुदाका नाम ले रहे हैं। सब फलोंमें एक फल सबका सरदार तथा गुरु जान पड़ता था। उसी श्रेष्ठ फलके आदेशसे सब फल खुदाका नाम लेते हुए वन्दनामें संलग्न थे। जब जिबराईलने यह कौतुक देखा तब अपने मनमें ऐसा विचार किया कि, यह फल जो सब फलोंमें बड़ा है उसीको तोड़कर ले चलूँ। उस फलको तोड़कर ले आकाशपर उड़ गया उड़ते हुये राहमें वह फल उसके हाथसे गिर गया अरबके मक्का नामक नगरमें जा पड़ा बड़े तड़के अब्दुल्ला नामक एक मनुष्य सड़क परसे चला जाता था, उसने उस फलको देखा, उठाकर अपनी जेबमें रख लिया जेबमेंसे वह फल अब्दुल्लाके शरीरमें समा गया अथवा उसने खा लिया। उस समय उसका शरीर तथा चेहरा कान्तिसे दमकने लगा अब्दुल्लाके वीर्य द्वारा बीबी एमनाके गर्भमें मुहम्मदी तेज आया, बीबी एमनाका शरीर तेजमय होगया, कान्तिसे जगमगाने लगा। नियत समयपर मुहम्मद साहिबने जन्म लेलिया।

अब उधरका वृत्तान्त सुनो कि, जिस समय वह फल जिबराईलके हाथसे छूटकर गिरा खाली हाथ जिबराईल खुदाके निकट गया निवेदन करने लगा कि,