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श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

प्रारंभिक पृष्ठ व विषय-सूची

श्रीहरिः

श्रीमदानन्दरामायणस्थविषयानुक्रमणिका


विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
सारकाण्ड<br>प्रथम सर्गराम-लक्ष्मणको लेकर विश्वामित्रका जनकपुरको प्रस्थान और महल्योद्धार११
मङ्गलाचरण१रामके आगमनसे जनकपुरनिवासियो सब-लोगोंका हर्षोल्लास१२
रघुवंशकी संक्षिप्त वंशावली१राजा जनक द्वारा अपनी प्रतिज्ञाकी घोषणा१४
रावणका ब्रह्मासे अपने मरणका हेतु पूछना, ब्रह्माका रामके हाथों रावणके मरणका भविष्य बतलाना और रावणका कौसल्याको सन्दूकमें बंद करके समुद्रनिवासी तिमिंगलको सौंपना३रावण द्वारा धनुष उठानेका प्रयास और उसमें विफलता, सभामें रामका आगमन१५
महाराज दशरथके साथ कौसल्याका गान्धर्व-विवाह४सीताका रामको देखना और मुग्ध होकर मन ही मन देवताओंसे प्रार्थना करना१७
दशरथजीका सुमित्रा-कैकेयीके साथ विवाह, महाराज दशरथका देव-दानवयुद्धमें जाना५रामके हाथों शिवधनुष टूटना१८
उस युद्धमें कैकेयीका रथकी टूटी धुरीमें अपना हाथ लगाकर राजा दशरथके प्राण बचाना, जिससे दशरथजीका कैकेयीको दो वरदान देना तथा अयोध्याको सकुशल लौटना६राजा जनकके आज्ञानुसार सीताका राजसभामें आना और रामके गलेमें वरमाला डालना१९
राजा दशरथ द्वारा श्रवणका वध और श्रवणके अंधे माता-पिताका शाप देना७राजा जनकका महाराज दशरथके पास निमंत्रण भेजना, रामादि चारों भ्राताओंके विवाहका निश्चय और सीताके जन्मका वृत्तान्त२१
ऋष्यशृङ्ग द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ सम्पन्न होना और अग्निका प्रकट होकर हवि देना७राम-लक्ष्मण-भरत-शत्रुघ्नका क्रमशः सीता-उर्मिला-माण्डवी और श्रुतकीर्तिके साथ विवाह और एक मास बाद महाराज दशरथका अयोध्याको प्रस्थान३०
द्वितीय सर्गमार्गमें राम-परशुरामका साक्षात्कार३१
पृथ्वीका दुःखित होकर देवताओंके पास जाना और सब देवताओंका क्षीरसागर जाकर विष्णुभगवान्‌की स्तुति करना और भगवान्‌की आकाशवाणी सुनना, राम-लक्ष्मण-भरत-शत्रुघ्नका जन्म और उन पुत्रोंकी बाल-लीला८राम द्वारा परशुरामका गर्वभञ्जन और परशुराम-का रामको आत्मरूपता सुनाना३२
गुरु वसिष्ठका रामादि चारों भाइयोंको शास्त्रीय शिक्षा देना९महाराज दशरथका अयोध्यामें पहुँचना और उत्सव मनाना३३
तृतीय सर्गचतुर्थ सर्ग
महामुनि विश्वामित्रका राजा दशरथकी सभामें जाकर यज्ञरक्षार्थ राम-लक्ष्मणको माँगना, मार्गमें विश्वामित्रका दोनों बालकोंको शस्त्रास्त्रकी शिक्षा देना और श्रीरामके हाथों ताडुकावध१०दीपावलीके अवसरपर पुनः राजा जनकका महाराज दशरथको बुलाना और तदनुसार उनका प्रस्थान३४
जनकपुरमें राजा दशरथका सत्कार और जनकपुरसे लौटते समय रास्तेमें उनको बहुतसे वैरी राजाओंका घेरना३५
रामका उन राजाओंके साथ घोर युद्ध और भरतका मूर्छित होना३६
रामके आज्ञानुसार लक्ष्मणका मुद्गल मुनिके आश्रममें सञ्जीवनी बूटी लेने जाना और आश्रमवासियों द्वारा उपस्थित की गयी

६ | विषयानुक्रमणिका

विषयपृष्ठ
बाधाओंको दूर करने हेतु संजीवनी लाकर भरतको जीवित करना३७
महाराज दशरथका मुनि मुद्गलसे रामके भविष्यका प्रश्न और उसका संतोषजनक उत्तर पाना३८
वृंदाका वृत्तांत और उसके द्वारा विष्णु भगवान्‌ के शापित होनेका इतिहास३६
सौराष्ट्रके एक निपुण ब्राह्मण तथा उसकी स्त्री कलहाका उपाख्यान४१
पञ्चम सर्ग
धर्मदत्त विप्र द्वारा कलहाका उद्धार४५
रामका सीताके साथ अयोध्यामें सानन्द निवास४८
रामकी संक्षिप्त दिनचर्या४९
महाराज दशरथका रामसे ज्ञानोपदेश सुनाने की प्रार्थना करना और रामका ज्ञानोपदेश देना५१
षष्ठ सर्ग
नारदका रामको देवताओंका संदेश सुनाना५१
राम-सीताका परस्पर वनगमनसम्बन्धी परामर्श५४
रामके राज्याभिषेककी तैयारी, गुरु वसिष्ठका रामके महलोंमें आना और उपदेश देना, अभिषेककी तैयारी देखकर मन्थराका दुःखित होना५५
मंथराका कैकेयीके पास जाकर उसे उत्तेजित करना और धरोहरस्वरूप रखे दोनों वरदान माँगनेको प्रेरित करना, तदनुसार कैकेयीका कोपभवनप्रवेश, राजा दशरथका उसके पास पहुँचना और वरदानकी बात सुनकर विकल होना, प्रातःकाल रामका पिताके पास जाकर धैर्य देना५६
कैकेयीके रामवनगमनसम्बन्धी वरदान मांगनेके समाचारसे पुरवासियोंकी व्याकुलता दूर करनेके लिए वामदेवको रामकी प्रतिज्ञा तथा नारदके आगमनकी बात बताना५७
राम-लक्ष्मण-सीताका वनगमन५७
प्रयाग होते हुए रामका चित्रकूट पहुँचना, जयंतकी कथा तथा दशरथमरण५८
भरतका ननिहालसे आकर पिताकी क्रिया करनेके बाद चित्रकूट जाना और रामके अनुरोधसे इनकी चरणपादुका लेकर अयोध्या लौटना६०
रामका अत्रिके आश्रमपर जाना६०
सप्तम सर्ग
रामके द्वारा विराधका वध६२
सुतीक्ष्णके आश्रमपर रामका जाना और वहाँसे अगस्त्यके आश्रमपर होते हुए पञ्चवटी पहुँचना, वहाँ जटायुसे मिलन और लक्ष्मणके हाथों शूर्पणखाके पुत्र साम्बका मरण६३
लक्ष्मणका शूर्पणखाके नाक-कान काटना६४
रामके हाथों खरदूषण-त्रिशिरा और उनकी चौदह हजार राक्षसी सेनाका निधन तथा शूर्पणखाका लंकामें रावणके पास जाना६५
सीताके अनुरोधसे रामका मृग मारीचके वधको जाना और रावण द्वारा सीताका हरण६७
जटायु-रावणयुद्ध, पञ्चवटीकी कुछ विशेष कथाएँ६८
राम-लक्ष्मणका लौटकर आश्रम पहुँचना, वहाँ मरणोन्मुख जटायुसे रावण द्वारा सीताहरणका वृत्तांत सुनना और रामका मृत जटायुकी अपने हाथों दाहक्रिया करना६९
सीताको व्यग्रतामय खोजते हुए रामको देखकर पार्वतीका वहाँ पहुँचना और उनके ईश्वरत्वकी परीक्षा करना, कबन्धवध और कबन्धकी जातकथा७१
रामका शबरीके आश्रमपर पहुँचना और शबरीको मुक्ति प्राप्त होना, वहाँसे रामका पम्पासरोवर जाना७१
अष्टम सर्ग
राम-सुग्रीवकी मित्रता और सुग्रीवका रामको अपना दुःख सुनाना७२
बालि-सुग्रीवयुद्ध और रामके हाथों बालिका मरण तथा रामका बालिको वरदान७५
रामका प्रवर्षण पर्वतपर निवास, कालांतरमें सुग्रीवको सीताकी खोजके विषयमें निश्चिन्त देखकर रामका लक्ष्मणको भेजना७१
सुग्रीवका बहुतेरे वानरोंको सीताको खोजने लिये भेजना और हनुमान्-अङ्गद आदिका एक तपस्विनीसे मिलना७७
अङ्गद आदिका सम्पातीसे मिलना और सम्पातीका अपना पूर्ववृत्तांत बताते हुए सीताके मिलनेका उपाय बताना७९
नवम सर्ग
हनुमान् द्वारा समुद्रलङ्घन और मार्गमें नागमाता सुरसासे साक्षात्कार७९

विषयानुक्रमणिका

विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
हनुमान्‌जीके द्वारा सिंहिकावध, समुद्रपार पहुँच-कर रात्रिके समय हनुमान्‌जीका लङ्कामें प्रवेश और लङ्किनीसे साक्षात्कार८०वादिसे मिलना और वहांसे चलकर मधुवन होते हुए रामके पास पहुँचकर उन्हें सीताका हाल सुनाना९८
हनुमान्‌का रावणके भवनमें जाकर उसकी दाढ़ी-मूँछ जलाना, मन्दोदरीको सीताके सदृश सुन्दरी देखकर हनुमान्‌का पछताना, सीता और मन्दोदरीके सादृश्यका कारण८१दशम सर्ग<br>हनुमान्‌का रामको लङ्काका स्वरूप बतलाना९९
हनुमान्‌जीका सीताके समक्ष पहुँचना८३रामका लङ्काको प्रस्थान१००
उसी समय रावणका सीताके पास आकर विविध प्रलोभन देना और सीताका रावणको फटकारना८४उधर लङ्कामें हनुमान्‌का पराक्रम देखकर रावणका घबड़ाना और राजसभामें आकर परामर्श करना, विभीषणका समझाना और रावणसे तिरस्कृत होकर रामकी शरणमें जाना१०१
बातोंसे हारकर रावणका सीताको मारनेके लिए उद्यत होना और मन्दोदरीका रोकना८५राम-विभीषणमें मैत्री, रामका कुपित होकर समुद्रपर आग्नेय बाण चलानेको उद्यत होना और समुद्रका सेतुबन्धके लिए उपाय बताना, रामका समुद्रतटपर शिवलिंग स्थापित करनेका निश्चय करके हनुमान्‌को शिवलिंग लानेके लिए काशी भेजना१०३
बहुतेरी राक्षसियोंको सीताको डराने-धमकानेके लिए नियुक्त करके रावणका अपने घर जाना८५शिवजीका हनुमान्‌को एक प्राचीन इतिहास बताना१०४
त्रिजटाका सीताको आश्वासन, हनुमान् द्वारा रामयश वर्णन और प्रकट होकर राममुद्रिका-प्रदान८६विन्ध्यपर्वतकी वृद्धिसे देवताओं तथा मनुष्योंकी घबड़ाहट और अगस्त्य मुनिका विन्ध्यके क्रोधको शांत करनेके लिए काशीका त्याग१०६
हनुमान्‌का अशोकवाटिका उजाड़ना८७राम द्वारा हनुमान्‌का गर्वहरण१०७
हनुमान्‌का रावणके भेजे हुए बहुतेरे सैनिकोंको मारना८८हनुमान्‌का अपनी लायी मूर्तिको अलग स्थापित करना और रामका वरदान देना१०८
मेघनादके ब्रह्मपाशमें बँधकर हनुमान्‌का रावणके समक्ष जाना८९शिवजीका रामको एक प्राचीन इतिहास बताना और रामके आज्ञानुसार नलका सेतुबन्धन करना१११
हनुमान्‌का रावणको सदुपदेश और रावणका दैत्योंको हनुमान्‌की पूँछ जलानेका आदेश देना९१रावणको शुकका सदुपदेश और उसके द्वारा शुकका तिरस्कृत होना, शुकके पूर्वजन्मकी कथा११२
हनुमान् द्वारा लङ्कादहन९३रामके आदेशसे अङ्गदका लङ्का जाना और लौटते समय रावणका एक महल उठाते लाना११३
लङ्का भस्म कर देनेपर सीताके भी जल मरने-की बात सोचकर हनुमान्‌का दुःखी होना और आकाशवाणी सुनकर धीरज धरना९३अङ्गदके मुखसे रावणकी दर्पोक्ति सुनकर सुग्रीवका रावणके पास जाना और उसके साथ बाहुयुद्ध करना११४
लङ्काका प्राचीन इतिहास, गज-ग्राहके प्रसंगमें ग्राहके पूर्वजन्मकी कथा, गज-ग्राहका सहस्रवर्षव्यापी युद्ध और भगवान् द्वारा गजका उद्धार९४माल्यवान्‌का रावणको उपदेश<br>एकादश सर्ग११५
गरुड़का एक गजको लेकर भक्षण करनेके लिए त्रिकूट पर्वतपर पहुँचना और हनुमान्‌का अशोक-वाटिका में सीतासे फिर मिलना९६राम-रावणका युद्धारम्भ११६
लङ्कासे लौटते समय एक मुनिके द्वारा हनुमान्‌का गर्वोपहार९७वानरी सेनापर मेघनादका शक्तिप्रयोग और रामकी आज्ञासे हनुमान द्वारा लायी हुई द्रोणगिरि-की ओषधिसे सबकी मूर्छा दूर होना११७
समुद्रके इस पार आकर हनुमान्‌का अङ्गद-

८

विषयानुक्रमणिका

विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
रावणका लक्ष्मणपर शक्तिप्रयोग और हनुमान्‌का द्रोणगिरि लाने समय कालनेमिसे भेंट११८रामका राज्याभिषेक१३९
तड़ागपर जल पीनेके लिए गये हुए हनुमान्‌की मगरीका पकड़ना, हनुमान्‌के हाथों कालनेमिका वध और वहाँसे चलकर हनुमान्‌का भरत-के बाणप्रहारसे मूच्छित होकर गिरना१२०श्रीशिवजीके द्वारा रामकी स्तुति१४०
ऐरावण-मैरावण द्वारा राम-लक्ष्मणका हरण१२०राज्याभिषेकोत्सवपर स्वर्गसे महाराज दशरथ-का आना, रामका ब्राह्मणों-मित्रों तथा परिवारके लोगोंको उपहार देना१४१
हनुमान्‌का राम-लक्ष्मणको खोजने पाताल जाना, वहाँ मकरध्वजसे भेंट, मकरध्वजका अपनी जन्मकथा सुनाना और हनुमान्‌का कामाक्षादेवीके मंदिरमें प्रवेश१२१हनुमान्‌को रामके विविध वरदान और भोजनके समय हनुमान्‌का कौतुक१४२
हनुमान्‌का मैरावणकी पत्नीसे ऐरावण-मैरावण-के मरणका उपाय पूछना और उस नागकन्याका उन दोनोंकी मृत्युका उपाय बताना१२२पुष्पक विमान, सुग्रीव तथा विभीषणकी विदाई१४३
रामके द्वारा ऐरावण-मैरावणका वध१२४रामके रमणसुखकी समाप्तिका वर्णन१४४
उस नागकन्याको रामका वरदान, रावणका कुम्भकर्णको जगाना, रावणकी प्रेरणासे उसका समरभूमिमें जाना और रामके हाथों कुम्भकर्णका निधन१२५त्रयोदश सर्ग
मेघनादका निकुम्भिला देवीके मंदिरमें जाकर यज्ञ करना और हनुमान् तथा लक्ष्मण द्वारा यज्ञविध्वंस१२६रामके यहाँ अगस्त्य आदि ऋषियोंका आग-मन, रामका अगस्त्यसे मेघनादका वृत्तांत पूछना और उनका बताना१४६
लक्ष्मण द्वारा मेघनादका वध१२७रावण-कुम्भकर्ण आदिकी जन्मकथा१४७
सुलोचनाका सती होना१२८माताकी आज्ञासे रावणका शिवलिंग लेने कैलाश जाना और अपने मस्तक काटकर शिवजीको प्रसन्न करना तथा वरदान पाना१४८
रावणका सीताको रामका कटा हुआ नकली सिर दिखाना१२९रावण-कुम्भकर्ण-विभीषणका तप करके ब्रह्मा-को प्रसन्न करना और उनसे वरदान पाना१४९
मन्दोदरीका रावणको समझाना और रावणका रामके समक्ष नकली सीताको काटना१३०रावणको कुबेरपुत्र नलकुबरका शाप, मेघनाद-का इन्द्रको पराजित करना और उसका इन्द्रजित् नाम पड़ना१५०
राम-रावणका भीषण युद्ध१३१रावणका बालिसे लड़ने जाना और बालिका उसे अपनी कांखमें रख लेना१५१
रामके हाथों रावणका वध१३२रावणका वानरराज बालिसे युद्ध करने जाना और परास्त होना१५२
द्वादश सर्गरावणका राजा अनरण्यसे युद्ध और उनका रावणको शाप१५३
राम-सीताका मिलन१३३रावण-सनत्कुमारका वार्तालाप, रावणकी श्वेत-द्वीपयात्रा और वहाँकी स्त्रियोंके हाथों पिटना१५४
रामकी अयोध्या लौटनेकी तैयारी और विभीषणके प्रश्न१३४बालि-सुग्रीवकी जन्मकथा१५५
रामका त्रिजटाको वरदान१३५ब्रह्माका बालिको किष्किन्धाका राज्य देना और हनुमान्‌की जन्मकथा१५६
रामका अवध-प्रस्थान, मार्गमें सम्पातीसे भेंट और रामका सीताको विविध दृश्य दिखाना१३६हनुमान्‌का सूर्यको निगलना, हनुमान्‌पर इन्द्रका वज्रप्रहार, पवनका क्रोध और हनुमान्‌को ब्रह्माका वरदान१५७
उधर अवधि बीतते देखकर भरतका चितामें कूदनेको तैयार होना और उसी समय हनुमान्‌जी-का पहुँचना१३७इन्द्रका राहुको सूर्य देना और हनुमान्‌को मुनियोंका शाप मिलना१५८
राम-भरतका मिलन१३८रामराज्यके सुखका वर्णन१५९
२विषयानुक्रमणिका९
विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
<center>यात्राकाण्ड<br>प्रथम सर्ग</center>ब्राह्मणोंके साथ सीताका ससमारोह गंगापूजन करना१८१
श्रीशिवजीसे पार्वतीके प्रश्न और शङ्करजीका उत्तर१६१रामके दर्शनार्थ च्यवन मुनिका आना और बाणोंसे प्राप्त होनेवाले कष्टोंका वर्णन करना, उनका दुःख दूर करनेके लिए रामका अपने बाणसे जलंघ्य खाई खोदना१८२
सहसा वाल्मीकिके मुखसे कविताका प्रादुर्भाव१६२कुम्भोदर मुनिका रामदूतोंसे वार्तालाप, दूतोंके आग्रह करनेपर भी उनका बिना भोजन किये लौटना और पूछनेपर कारण बताना१८३
ब्रह्माका वाल्मीकिके आश्रमपर आकर राम-चरित लिखनेका आग्रह करना१६३कुम्भोदर मुनिके आक्षेप सुनकर रामका तीर्थयात्राकी तैयारी करना; पुष्पक विमानका रामके आदेशसे दस योजन विस्तृत और सौ धनुषका ऊंचा होना१८४
<center>द्वितीय सर्ग</center>रामका तीर्थयात्राके लिए प्रस्थान१८५
वाल्मीकिकृत रामायणनिर्माण, उसे सुननेके लिए देवता-यक्ष-नागादिकोंका आगमन१६४रामकी चार ध्वजाओंका वर्णन१८६
रामायण प्राप्त करनेके लिए उनमें परस्पर कलह और विष्णुभगवान् द्वारा रामायणका विभाजन१६५<center>षष्ठ सर्ग</center>
नारदजीके द्वारा व्यासजीको चार श्लोक प्राप्त होना१६७रामका सदल-बल प्रयाग पहुँचना, वहाँसे चलकर काशी पहुँचना और विविध लोकोपकारी कार्य तथा दान करते हुए एक साल वहाँ रहना१८७
<center>तृतीय सर्ग</center>काशीमें रामका अनेक तीर्थोंकी स्थापना करना१८८
पार्वतीका शंकरजीसे रामदास विष्णुदासके चरित्रविषयक प्रश्न और शिवजीका उत्तर१६९रामकी गयायात्रा, वहाँ फल्गुनदीमें सीताके बालूकाकी दुर्गा बनाते समय राजा दशरथका अपने हाथों बालूकापिण्ड लेना१९१
सीताका रामसे गङ्गातटपर चलनेकी प्रार्थना१७१पिताको पिण्डदान देते समय राजा दशरथका हाथ न दीखनेपर रामका विस्मित होना, लक्ष्मण और सीतासे पूछनेपर सीताका कारण बताना१९२
रामका लक्ष्मणको यात्राकी तैयारी करनेका आदेश देना१७२सीताका आम्रवृक्ष, फल्गुनदी, गयावाल ब्राह्मणों, बिल्ली तथा अश्वको साक्षी देनेके लिए कहना और उनके इनकार करनेपर शाप देना, अन्तमें सूर्यकी साक्षीसे प्रसन्न रामके पिता दशरथका प्रत्यक्ष प्रकट होना१९३
गङ्गायात्रासम्बन्धी समाचारसे प्रजाजनमें उल्लासकी लहर१७३<center>सप्तम सर्ग</center>
<center>चतुर्थ सर्ग</center>रामकी दक्षिण भारतकी तीर्थयात्राका विवरण१९५
रामचन्द्रका ज्योतिषी बुलाकर उत्तम मुहूर्त्त पूछना१७४तोताद्रिमें कन्याकुमारीका रामसे भेंट और रामका उसे वरदान देना१९८
रामचन्द्रका गङ्गातटको प्रस्थान१७५<center>अष्टम सर्ग</center>
यात्राकालीन उल्लासका वर्णन१७६भारतके पश्चिमी प्रदेशके तीर्थोंकी यात्राका विवरण, सवारीपर बैठकर यात्रा करनी चाहिए या
रामका महर्षि मुद्गलके आश्रमपर पहुँचना१७८
महर्षि मुद्गलका अपने नवीन आश्रमसे रामके दर्शनार्थ प्राचीन आश्रमपर जाना और पूछनेपर आश्रमत्यागका कारण बतलाना, रामका मुनि मुद्गलसे सरयूकी श्रेष्ठताके विषयमें प्रश्न और मुनिका उत्तर१७९
रामके आदेशसे लक्ष्मणका बाण चलाकर सरयूके दो भाग करके एक भागको मुद्गलके पूर्व आश्रमपर लाना१८०
<center>पञ्चम सर्ग</center>
सीताका गंगापूजनकी तैयारी करना, कौसल्या आदि सासुओं, सोहागिन स्त्रियों तथा बहुतेरे
१०विषयानुक्रमणिका
विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
गयीं, इस विषयमें रामदास-विष्णुदासका प्रश्नोत्तर२००सभी देशोंमें अबाध गतिसे घूमकर घोड़ेका अयोध्या लौटना२२०
पुष्पक विमानपर नित्य करोड़ों ब्राह्मणोंके भोजनका प्रबन्ध२०१चतुर्थ सर्ग<br>रामके अश्वमेध यज्ञमें सब देवताओं तथा शिवजीका आगमन, राम द्वारा सबका स्वागत-सत्कार होना और राम तथा शिवजीमें कुछ मनोरञ्जक वार्तालाप२२१
रामके पुष्पक विमानको देखकर अन्यान्य तीर्थवासियोंकी विविध कल्पनायें२०३अश्वमेध यज्ञमें कुम्भोदर मुनिका आगमन, रामके साथ बातचीत और कुम्भोदर मुनिका अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रसे रामकी स्तुति करना२२३
नवम सर्ग<br>उत्तर दिशाकी तीर्थयात्राका विवरण, रामको बदरीनारायण तथा मानसरोवरकी यात्रा, वहाँसे कैलास जाना और यहाँपर सीताका कामधेनु को पाना२०४पञ्चम सर्ग<br>विष्णुदासका गुरु रामदाससे अष्टोत्तरशतनाम-विषयक प्रश्न और उनका उत्तर२२४
सब तीर्थोंकी यात्रा करके रामका अयोध्या लौटना२०५रामाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र२२५
अयोध्यामें रामका भव्य स्वागत२०६रामाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रका माहात्म्य२२७
यात्राकाण्डकी फलश्रुति२०७षष्ठ सर्ग<br>यज्ञके समय रामकी दिनचर्या२२८
यागकाण्ड<br>प्रथम सर्ग<br>अश्वमेध यज्ञके लिए रामका गुरु वसिष्ठसे परामर्श२०८सप्तम सर्ग<br>ध्वजारोहणयज्ञके विषयमें प्रश्नोत्तर२३१
वसिष्ठका लक्ष्मणको यज्ञकी तैयारीके लिये संदेश देना२१०ध्वजारोहणविधि, माहात्म्य एवं फलश्रुति२३२
यज्ञकी सामग्रियोंका विवरण२११अष्टम सर्ग<br>अश्वमेध यज्ञकी समाप्तिपर रामको अवभृथ-स्नानके लिए यात्रा२३६
द्वितीय सर्ग<br>राम-सीताका यज्ञकी दीक्षा लेना२१३यात्राकालमें रामके दर्शनार्थ जनताकी व्यग्रता और रामका लक्ष्मणको सुप्रबन्धके लिए निर्देश२३७
श्यामकर्ण घोड़ेकी पूजा करके भूभ्रमणके लिये छोड़ना और शत्रुघ्न-सुमन्त आदिका उसकी रक्षाके लिये जाना२१४रामका सरयूमैं सपरिवार अवभृथस्नान२३८
यज्ञसमारोहमें बहुतेरे ऋषियोंका आगमन२१५कामधेनु गौ देनेको उद्यत रामसे वसिष्ठका सीताको दानमें माँगना२३९
यहाँ आए हुये ऋषियोंका रामके द्वारा स्वागत-सत्कार और कामधेनुकी पूजा करके पाकशालामें बाँधना तथा उससे मनचाही वस्तुयें प्राप्त करके सब अभ्यागतोंकी इच्छा पूर्ण करना२१६तदनुसार रामका सीताको दान देना और पुनः वसिष्ठकी बतायी योजनाके अनुसार सुवर्णराशि देकर सीताको वापस लेना२४०
तृतीय सर्ग<br>श्यामकर्ण घोड़ेके साथ शत्रुघ्नका ब्रह्मावर्त पहुँचना, वहाँ गङ्गाकी रुकावटसे दुखी होकर गङ्गाकी प्रार्थना करना और गङ्गाका प्रसन्न होकर उन्हें मार्ग देना२१७नवम सर्ग<br>अश्वमेध यज्ञकी समाप्तिपर शिवजीका रामसे वरदान माँगना और उनका देना२४१
श्यामकर्ण घोड़ेका मगधमें पहुँचना और वहाँके राजासे उपहार पाना२१८पार्वतीका सीताजीसे वर माँगना और उनका देना२४३

विषयानुक्रमणिका

विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
यज्ञके ऋत्विजोंको रामका दान ओर अतिथियोंको उपहार भेंट२४४सप्तम सर्ग
सिंहासनारूढिन रामको नदी-समुद्र तथा अन्यान्य देवताओंसे विविध प्रकारके उपहार मिलना२४५रामके यहाँ व्यासजीका आगमन <br> व्यासका रामके एक पत्नीव्रतकी प्रशंसा करना२७९
अयोध्यामें रामका दरबार२४६रामका व्यासजीसे अगले जन्ममें बहुत-सी स्त्रियोंको प्राप्त करनेका उपाय पूछना२८०
यज्ञमें आये हुए अतिथियोंका प्रस्थान२४७व्यासजीके आज्ञानुसार रामका दोसह्र सीताकी सुवर्णमूर्तियें दान देना, रामके सम्मुख कितनी ही देवांगनाओंका आकर रामपर मुग्ध होना२८१
—:o:— <br> विलासकाण्ड <br> प्रथम सर्गउन स्त्रियोंको रामका वरदान२८२
शिवकृत रामस्तवराज२४९अष्टम सर्ग
द्वितीय सर्गगुणवतीका वृत्तान्त, अरण्यमें गुणवतीके पतिका मरण२८३
रामके द्वारा सीताके सौन्दर्यका वर्णन और पक्षियों द्वारा रामकी स्तुति२५७गुणवतीका अयोध्यामें रामके सम्मुख पहुँचना, रामकी तत्कालीन शोभाका वर्णन२८४
तृतीय सर्गगुणवतीको रामका वरदान मिलना२८५
सीतासे प्रश्न करनेपर रामका देहरामायण-वर्णन२६१पिंगला नागकी वेश्याका रामके समक्ष पहुँचना, राम द्वारा पिंगलाका वृत्तान्त सुनकर सीताका कुपित होना२८६
अपने दिये हुए ज्ञानके विषयमें रामका प्रश्न और सीताका उत्तर२६३क्रोधवश सीताका मरनेके लिए उद्यत होना, रामकी विकलता, आधी रातके समय रामका गुरु वसिष्ठको बुलानेके लिए लक्ष्मणको भेजना, गुरुके चरण छूकर रामका शपथ खाना२८८
चतुर्थ सर्गसवेरे सीताका पिंगला वेश्याको बुलाकर डांटना और मारना, पिंगलाको सीताका शाप और उससे उद्धारका समय निर्धारित करना२८९
रामकी दिनचर्या और बन्दीजनोंकी स्तुति२६६नवम सर्ग
सीताके अगणित अलंकारोंका वर्णन२६८रामकी कुरुक्षेत्रयात्रा, लोपामुद्रा और जानकीजीकी बातचीत२८९
पञ्चम सर्गलोपामुद्रासे शास्त्रार्थमें सीताकी विजय२९०
राम-सीताका जलविहार२७२विलासकाण्डका माहात्म्य एवं विलासकाण्डके पाठकी विधि२९१
षष्ठ सर्ग—:o:— <br> जन्मकाण्ड <br> प्रथम सर्ग
राम-सीताके शयनका वर्णन, राम-सीताका विहार२७६धात्रीके मुखसे रामका सीताके गर्भिणी होनेका समाचार सुनना२९३
राम और सीताका एक छज्परसे बाजारके कौतुक देखना, सीताका एक दीन-हीन ब्राह्मणीको अपना दरबा लिये भीख मांगनेपर उद्यत देखना, सीताका उसके उससे दरिद्रताका कारण पूछना और उसका बताना, सीताका उस ब्राह्मणीको एक लाख स्वर्णमुद्रा दिलदाना२७७सीताका जंगलोंमें सैर करनेकी इच्छा प्रकट करना और इसकी तैयारीके लिए रामका लक्ष्मणको आदेश देना२९४
सीताका लक्ष्मणके द्वारा सारे देशमें यह घोषणा करवाना कि कोई भी स्त्री बिना वस्त्राभूषणके दिखलायी न दे। यदि वह धनाभावके कारण वस्त्राभूषण न धारण कर सकती हो तो उसे राज्यसे दिया जाय२७८
भगवान् रामकी तत्कालीन दिनचर्या२७९
१२विषयानुक्रमणिका
विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
पालकीपर चढ़कर रामका सीता तथा सब परिवारको साथ लेकर वनकी यात्रा करना२९५पुष्पक विमान द्वारा उस समय रामका भी वहाँ पहुँचना और बादमें रामका भी अश्वमेध यज्ञ करनेका निश्चय करना३०९
इन लोगोंका वनमें पहुँचना और वनकी शोभाका वर्णन२९६स्वर्णमयी सीता बनाकर रामका यज्ञाारम्भ, रामके नन्द्वे यज्ञ पूर्ण होना और कुशकी उत्पत्तिका वृत्तान्त३१०
द्वितीय सर्गवाल्मीकिका कुश-लवको रामायणकी शिक्षा देना और अल्प समयमें उनका सीखना३११
राम-सीताका वनविहार२९८पञ्चम सर्ग
छठें मासमें सीमन्तोन्नयनसंस्कार और जनकजीसे रामका सीतालयारसम्बन्धी वार्तालाप२९९विष्णुदासकृत रामदाससे रामरक्षास्तोत्रके विषयमें प्रश्न और रामरक्षास्तोत्रका सार३१२
वनमें, जहाँ कि सीता आकर रहनेवाली थीं, वहाँपर जनकजीका प्रबन्ध३००रामरक्षास्तोत्रका माहात्म्य३१३
तृतीय सर्गरामनामके स्मरणका फल३१५
रामका सीताको त्यागनेका कारण बतलाना३०१षष्ठ सर्ग
रामका विजय नामक गुप्तचरसे जनताके गुप्त विचार पूछना३०२सीताका बारम्बार उसे पतिवियोग दूर करनेके लिए कोई व्रत पूछना और उनका बतलाना३१६
उसके मुखसे प्रजाके हृदयकी यह बात मालूम करना कि सीता कितने ही वर्ष रावणके यहाँ रह चुकी थीं, फिर भी उसे रामने अपना लिया। यह अच्छा नहीं किया। विजयका रामको एक धोबीकी बात सुनाना। कैकेयीका सीतासे रावणकी आकृति पूछना और सीताका दोपहरमें केवल रावणके एक अँगूठेका आकार बनाना३०३सीताका व्रतारम्भ और लवका रामके बगीचे-से कमल लाने जाना३१७
सीताके चली जानेपर कैकेयीका उस अँगूठे-के अनुरूप रावणके सारे शरीरकी तसवीर बना देना और इसी समय रामका पहुँचना, तसवीरके विषयमें रामके पूछनेपर कैकेयीका सीताकी बनायी बतलाना३०४लवका बगीचेके रक्षकोसे मुठभेड़ और विजयी होकर लौटना३१८
प्रातःकालके समय सीताको वनमें त्यागनेके लिए लक्ष्मणका प्रस्थान३०५दूसरे दिन फिर लवका उन लोगोंसे युद्ध और लवकी विजय३१९
वाल्मीकिके आश्रमपर पहुँचकर गद्गद वाणी-में लक्ष्मणका सीताको सब वृत्तान्त बतलाना३०६रामका लवको पकड़नेके लिये वाल्मीकि ऋषिके आश्रमपर दूत भेजना, इसपर वाल्मीकिका यह उत्तर देना कि चलो, मैं रामके अपराधीको लेकर स्वयं वहाँ आता हूँ३२०
चतुर्थ सर्गसप्तम सर्ग
रामकी उस आज्ञा पालन करनेके लिए लक्ष्मणका विचार करना-जिसमें उन्होंने कहा था कि लौटते समय सीताके दोनों हाथ काट ले आना। उस निर्दय कार्यको करनेमें असमर्थ लक्ष्मणका प्राण त्यागनेपर उद्यत होना और बढ़ईके रूपमें विश्वकर्मासे भेंट३०७रामका अन्तिम यज्ञके लिये श्यामकर्ण घोड़ा छोड़ने और उसरीतिसे वाल्मीकिका सीताके साथ रामके यज्ञमें जाना३२१
विश्वकर्माका सीताकी भुजा बनाकर देना और उसे लेकर लक्ष्मणका अयोध्या लौटना३०८कुश-लवका रामायणगान सुनकर सबका मुग्ध होना और बादमें रामकी सभामें लव-कुशका रामा-यणगान३२२
अर्धरात्रिके समय सीताके गर्भसे पुत्ररत्न उत्पन्न होना३०८रामका उन दोनों बालकोंको पुरस्कार दिला-दाना और उनका लेनेसे इनकार करना३२३
लवका रामके श्यामकर्ण बहेड़ेको पकड़ना और लव तथा शत्रुघ्नका संग्राम, लवका हनुमान्, सुमन्त्र और भरतको काँखमें दबाकर माता सीताके पास ले आना३२४
रामके आज्ञानुसार लवको पकड़नेके लिये

विषयानुक्रमणिका (पृष्ठ १३)

विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
लक्ष्मणका जाना, लव और लक्ष्मणमें युद्ध३२५विवाहकाण्ड<br>प्रथम सर्ग<br>रामकी सभामें महाराज भूरिकीर्तिका स्वयंवर पत्र आना३४५
लक्ष्मणका लवको ब्रह्मापाशमें बाँधकर राम- के समक्ष ले जाना, रामके आज्ञानुसार लोगों- का लवपर जलके घड़े उड़ेलना और लवका लड़ना३२६पत्र पढ़नेके अनन्तर रामका स्वयंवरमें जानेकी तैयारी करना, रामकी स्वयंवरयात्रा३४६
लवको छुड़ानेके लिए कुशका जाना३२७रामका अपने पुत्रोंके साथ स्वयंवरमें पहुँचना३४७
राम-लक्ष्मण और कुशका युद्ध३२८रामका आगमन सुनकर राजा भूरिकीर्तिकी नगरनिवासिनी महिलाओंकी प्रसन्नताका वर्णन३४८
अष्टम सर्ग<br>रामका एक मन्त्रीको वाल्मीकिके पास भेजना३२९द्वितीय सर्ग<br>दूसरे रोज रामका स्वंयबर-सभामें जाना और रामके दूतोंका वहाँ आये हुए राजाओंका परिचय देना३४९
रामकी सभामें वाल्मीकिका सीताके साथ लिये हुए आना३३०सभामें चम्पिका नामकी राजकन्याका प्रवेश३५०
रामके प्रति वाल्मीकिकी उक्ति और सीताको हाथों सहित देखकर रामका सन्देह३३१चम्पिकाको साथ लिये मुन्यन्दाका सब राजाओंके समक्ष जाना और चम्पिकाको उन राजाओंकी स्थिति समझाना३५१
सीताकी शपथ, सीताका पृथ्वीमें प्रवेश करना और पृथ्वीसे रामकी प्रार्थना३३२चम्पिकाका सब राजाओंके सामनेसे होकर रामके सम्मुख पहुँचना३५३
पृथ्वीपर रामका कोप और रामका पृथ्वीसे सीताको वापस पाना३३३अन्तमें चम्पिकाका कुशके सामने पहुँचना और कुशके गलेमें वरमाला डालना३५४
यज्ञमें आये हुए राजाओं और ऋषियोंकी विदाई३३४तृतीय सर्ग<br>मुनन्दाका सुमति नामकी दूसरी राजकन्याको साथ लेकर पहलेकी तरह सब राजाओंका यश सुनाना३५५
नवम सर्ग<br>ऊर्मिला, माण्डवी तथा श्रुतकीर्ति आदिका गर्भिणी होना और यथासमय पुत्र उत्पन्न करना, पुत्रोंकी उत्पत्तिके अवसरपर रामका उत्साह३३५सुमतिका सब राजाओंके सामनेसे होकर लवके समक्ष पहुँचना और उनके गलेमें वर- माला डालना, दूसरे दिन भूरिकीर्तिका रामके पास जाकर विदाईके लिए मुहूर्त निश्चित करना३५७
रामका कुलगुरु वशिष्ठसे सब बच्चोंके शुभाशुभ लक्षण पूछना और वशिष्ठका सब बालकोंके लक्षण बतलाना३३६विवाहकार्यका प्रारम्भ३५८
पुत्रवती बहिनोंके साथ सीताका सानन्दमय जीवन बिताना३३८लव-कुशका विवाहसण्डपमें पहुँचना और विवाह सम्पन्न होना३५९
गुरु वशिष्ठसे रामका लव-कुशके उपनयनका परामर्श और व्रतबन्धकी तैयारियोंके लिये रामका लक्ष्मणको आदेश३३९चतुर्थ सर्ग<br>विवाहके अनन्तर होनेवाले लोकाचार३६०
व्रतबन्ध (उपनयन) संस्कार समारोह३४०भूरिकीर्तिकी नगरीसे राम आदिको विदाई, रामका अयोध्या पहुँचना और अयोध्यावासियों द्वारा उनका स्वागत३६१
व्रतबन्धसंस्कार३४१
लव-कुश आदि बालकोंका वेदाध्ययन, बालकोंका गुरुगृहसे वापस आनेपर अयोध्या नगरीके उत्साहका वर्णन३४२
जन्मकांडके सुननेका फल और उसकी महिमाका वर्णन३४४
१४विषयानुक्रमणिका
विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
विदाहोत्सवमें आये हुए अभ्यागतोंको विदाई, रामदासका विष्णुदासको कुशके विषयमें गुप्त भविष्यकी बातें बतलाना३६२का विह्वल होना और नारदका सब हाल बतलाना, यूपकेतुका अपने मोहनशस्त्रसे सब राजाओंको मोहित करके मदनसुन्दरीको वरना३७५
पञ्चम सर्गयूपकेतुका सब राजाओंके साथ युद्ध३७६
सीता तथा भ्राताओंके साथ रामका वनमें अगस्त्यके आश्रमपर जाना३६३यूपकेतुका खड्ग उठाकर अपने श्वशुर कम्बुकण्ठको मारनेके लिए उद्यत होना और मदनसुन्दरीकी प्रार्थनासे छोड़ देना, अन्तमें शम्भुसे यूपकेतुका साक्षात्कार और वहांसे लौटकर फिर क्रान्तिपुरीको जाना३७७
अगस्त्य ऋषि द्वारा रामका सत्कार और वनमें रामको पांच अप्सराओंका मिलना३६४नवम सर्ग
अगस्त्यसे उन अप्सराओंके विषयमें रामका प्रश्न और उनका उत्तर, रामके बाण मारनेके लिए उद्यत होनेपर जलदेवियोंका प्रकट होना और बारह कन्यायें रामको अर्पित करना३६५दूतके मुखसे यूपकेतुका सब समाचार ज्ञात होनेपर रामका क्रान्तिपुरीके लिए प्रस्थान, क्रान्तिपुरीमें बाह्यपूर्वक रामका पहुंचना३७८
षष्ठ सर्गवहीं यूपकेतुका विवाह होना, भगवान्की स्तुति करके नारदका प्रस्थान, विवाहकाण्डका श्रवणफल३७९
बहुतसे गंधर्व और पन्नगोंका आना और रामकी स्तुति करना, अपने तथा लक्ष्मण आदिके पुत्रोंकी कुछ भविष्यकी बातें अगस्त्य ऋषिसे रामको मालूम होना३६६विवाहकाण्डके अनुष्ठानकी विधि३८०
गंधर्वोंको अयोध्या आनेकी आज्ञा देकर रामका अपनी पुरीको वापस लौटना३६७राज्यकाण्ड (पूर्वार्द्ध)
अयोध्यामें पहुंचकर उन कन्याओंको वशिष्ठके यहां रखना, गंधर्वो और नागोंका अयोध्यापुरीमें पहुंचना तथा विवाहके मुहूर्तका निश्चित होना३६८प्रथम सर्ग
सप्तम सर्गरामसहस्रनामके विषयमें विष्णुदासका प्रश्न और रामदासका उत्तर३८१
सब कन्याओंके साथ राम आदिके पुत्रोंके विवाहकी तैयारी३६९सनत्कुमार और गणेशका वार्तालाप३८२
मन्दोदरी नामकी कन्याके संग लवका विवाह, अन्य कन्याओंके सङ्ग अन्य पुत्रोंका विवाह, राम आदिके आनन्दका वर्णन३७१राम सहस्रनाम३८३
अष्टम सर्गरामसहस्रनामका माहात्म्य३९१
रामके पास कम्बुकण्ठ नामक राजाका पत्र आना, कम्बुकण्ठकी कन्या मदनसुन्दरीके पास नारदजीका पहुंचना३७३द्वितीय सर्ग
मदनसुन्दरीका नारदजीसे रामचन्द्रजीको पति बनानेका उपाय पूछना और नारदका उसे उपाय बताना३७३कल्पवृक्षके विषयमें रामदास-विष्णुदासका प्रश्नोत्तर३९२
नारदका अयोध्या पहुंचना और उनके मुखसे सब हाल सुनकर यूपकेतुका क्रान्तिपुरीको चल देना३७४रामके पास साठ हजार शिष्योंके साथ दुर्वासाका आगमन और सबके लिए भोजन तथा पूजनके लिए ऐसे फूल माँगना, जिन्हें संसारमें किसीने न देखा हो३९३
यूपकेतुको न देखकर परिवार समेत राम-रामका पत्रके साथ एक बाण इन्द्रके पास भेजना और इन्द्रका कल्पवृक्ष तथा पारिजात स्वयं लाकर अयोध्यामें रामको देना३९४
सीताका कल्पवृक्षकी स्तुति करके उसके द्वारा प्राप्त सामग्रीसे शिष्यों समेत दुर्वासाको भोजन कराना३९५
भोजनके बाद प्रसन्न दुर्वासाका रामसे स्तुति करके प्रस्थान३९६