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सर्वकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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श्रीहरिः

श्रीमदानन्दरामायणस्थविषयानुक्रमणिका


विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
सारकाण्ड<br>प्रथम सर्गराम-लक्ष्मणको लेकर विश्वामित्रका जनकपुरको प्रस्थान और महल्योद्धार११
मङ्गलाचरण१रामके आगमनसे जनकपुरनिवासियो सब-लोगोंका हर्षोल्लास१२
रघुवंशकी संक्षिप्त वंशावली१राजा जनक द्वारा अपनी प्रतिज्ञाकी घोषणा१४
रावणका ब्रह्मासे अपने मरणका हेतु पूछना, ब्रह्माका रामके हाथों रावणके मरणका भविष्य बतलाना और रावणका कौसल्याको सन्दूकमें बंद करके समुद्रनिवासी तिमिंगलको सौंपना३रावण द्वारा धनुष उठानेका प्रयास और उसमें विफलता, सभामें रामका आगमन१५
महाराज दशरथके साथ कौसल्याका गान्धर्व-विवाह४सीताका रामको देखना और मुग्ध होकर मन ही मन देवताओंसे प्रार्थना करना१७
दशरथजीका सुमित्रा-कैकेयीके साथ विवाह, महाराज दशरथका देव-दानवयुद्धमें जाना५रामके हाथों शिवधनुष टूटना१८
उस युद्धमें कैकेयीका रथकी टूटी धुरीमें अपना हाथ लगाकर राजा दशरथके प्राण बचाना, जिससे दशरथजीका कैकेयीको दो वरदान देना तथा अयोध्याको सकुशल लौटना६राजा जनकके आज्ञानुसार सीताका राजसभामें आना और रामके गलेमें वरमाला डालना१९
राजा दशरथ द्वारा श्रवणका वध और श्रवणके अंधे माता-पिताका शाप देना७राजा जनकका महाराज दशरथके पास निमंत्रण भेजना, रामादि चारों भ्राताओंके विवाहका निश्चय और सीताके जन्मका वृत्तान्त२१
ऋष्यशृङ्ग द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ सम्पन्न होना और अग्निका प्रकट होकर हवि देना७राम-लक्ष्मण-भरत-शत्रुघ्नका क्रमशः सीता-उर्मिला-माण्डवी और श्रुतकीर्तिके साथ विवाह और एक मास बाद महाराज दशरथका अयोध्याको प्रस्थान३०
द्वितीय सर्गमार्गमें राम-परशुरामका साक्षात्कार३१
पृथ्वीका दुःखित होकर देवताओंके पास जाना और सब देवताओंका क्षीरसागर जाकर विष्णुभगवान्‌की स्तुति करना और भगवान्‌की आकाशवाणी सुनना, राम-लक्ष्मण-भरत-शत्रुघ्नका जन्म और उन पुत्रोंकी बाल-लीला८राम द्वारा परशुरामका गर्वभञ्जन और परशुराम-का रामको आत्मरूपता सुनाना३२
गुरु वसिष्ठका रामादि चारों भाइयोंको शास्त्रीय शिक्षा देना९महाराज दशरथका अयोध्यामें पहुँचना और उत्सव मनाना३३
तृतीय सर्गचतुर्थ सर्ग
महामुनि विश्वामित्रका राजा दशरथकी सभामें जाकर यज्ञरक्षार्थ राम-लक्ष्मणको माँगना, मार्गमें विश्वामित्रका दोनों बालकोंको शस्त्रास्त्रकी शिक्षा देना और श्रीरामके हाथों ताडुकावध१०दीपावलीके अवसरपर पुनः राजा जनकका महाराज दशरथको बुलाना और तदनुसार उनका प्रस्थान३४
जनकपुरमें राजा दशरथका सत्कार और जनकपुरसे लौटते समय रास्तेमें उनको बहुतसे वैरी राजाओंका घेरना३५
रामका उन राजाओंके साथ घोर युद्ध और भरतका मूर्छित होना३६
रामके आज्ञानुसार लक्ष्मणका मुद्गल मुनिके आश्रममें सञ्जीवनी बूटी लेने जाना और आश्रमवासियों द्वारा उपस्थित की गयी