Skip to content
SarvaKosh
Back to the archive

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

मुनीन्द्रजीका अयोध्या जाना०

Page 268Permalink

सोलहवाँ प्रकरण ।

दूसरे मलकूत मुकामका वर्णन ।

दूसरा मुकाम मलकूत है । यह स्थान नासूतसे चौबीस सहस्र योजन उंचाई पर है और पृथ्वीसे साठ सहस्र योजनकी उंचाईपर है । इसी श्रेष्ठ स्थानको दूसरे शब्दोंमें वैकुण्ठ कहते हैं । यह वैकुण्ठ विष्णुका स्थान है । इसी स्थानपर पाप पुण्य का लेखा लगता है । इस विष्णुकी सभामें ब्रह्मा विष्णु शिव इन्द्रादिक समस्त देवतागण उपस्थित रहते हैं । इस विष्णुकाही नाम धर्मराय है । और आपकी आज्ञासे नरक, वैकुण्ठ और आवागमन आदि सब कुछ होता है । इसी स्थानसे विष्णु महाराज समस्त पृथ्वी और आकाशादिमें जाया आया करते हैं । यहाँही चित्रगुप्तजी विष्णुके मंत्रीके रूपमें सबके पाप पुण्यका लेखा रखते हैं जब कबीर साहब मुहम्मद साहबको अपने साथ लेकर इस मलकूत पर पहुँचे तो, वहाँ मूसा को बैठे तौरीत पढ़ता पाया । कबीर साहबने वहाँ पहुँचकर सलाम अलैक किया। तब वह मूसा सलामका उत्तर देकर उठे और उनका हाथ चूमकर बड़ी ताजौम की । तब कबीर साहबने मुहम्मद साहबको इस मुकामके समस्त गुण बतलाये तथा वहाँके वृत्तान्तसे विज्ञ कराकर आगे चले ।

सत्रहवाँ प्रकरण ।

तीसरे जिबरुत मुकामका वर्णन ।

तीसरा स्थान जिबरुत है । इस जिबरुत स्थानको कबीर साहबने आँझरी द्वीप कहा है । यह निर्गुण ब्रह्म अलख निरञ्जनका स्थान है । यही तीनों लोकका कर्ता धर्ता सम्प्राट है, यह स्थान, वैकुण्ठसे अठारह करोड़ योजन ऊपरको ऊँचा है, यह बड़ा सुन्दर स्थान है, यहाँपर चार करोड़ ज्योतिका प्रकाश है । इस मुकाम में चारों फरिश्ते जिबराईल, मेकाईल, इसराफ़ील, इजराईल सदा खड़े रहते हैं । इन्हीं चारोंको ब्रह्मा, विष्णु, शिव और यम-इत्यादिके नामसे पुकारते हैं । समस्त आज्ञाएँ इसी स्थानमें प्रचलित हुआ करती हैं । चारों फरिश्ते इन्हींके आज्ञाकारी हैं । वेद तथा किताबोंके प्रचार कर्ता आपही हैं और सब आपहीके आज्ञाकारी तथा अधीन सब हैं । अध्या तथा निरञ्जन इसी राजधानीमें बैठकर तीनों लोकको राज्य, करते हैं । जब कबीर साहब रसूल अल्लाहको साथ लेकर पहुँचे तो, देखा कि हजरत ईसा वहाँ बैठे हुए इञ्जील पढ़ रहे हैं । वहाँ पहुँचकर कबीर साहबने अस्सलाम अलैक कहा। तब हजरत ईसा सलामको उत्तर देकर उठखड़े हुए और