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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

नमरूह बादशाहकी बतख कौज, दोनोंकी प्रेमाधिक्यसे मृत्यु कौवा तथा कुलाग, कागोंका न्याय

Page 960Permalink

रागसे कार्यं विशेष—रागके गानेसे बुझा हुआ दीपक आपसे आप प्रज्वलित हो जाता है। वर्षा होने लगती है, पत्थर मोम हो जाता है। चुंबक लोहा खींच लेता है।

सबकी बातें—एहवालूल आखरतमें लिखा है कि, क्यामतके निकट आनेपर वृक्ष दीवार आदि भी जड़ पदार्थ आपसमें बातें करके भविष्य कहेंगे।

इसी प्रकारकी हजारों बातें हैं कि, जड़ स्थावरके बात करनेके विषयमें लिखी हैं। जिससे सिद्ध होता है कि, जड़ चैतन्य है चैतन्य जड़ हैं; स्थावर जंगम हो जाता है जंगम स्थावर हो जाता है।

बिच्छूके बदले चांदी —मैंने लड़कपनमें अपने पितासे सुना था कि, एक दिन एक मनुष्य उजाड़ मैदानमें शौच फिर रहा था उस समय क्या देखता है कि, सफेद बिच्छूओंकी सेना तार लगाये चली आ रही है। सफेद बिच्छू उसने पहले कभी नहीं देखा था, इस कारण लकड़ीसे थोड़ेसे बिच्छूओंको पकड़के, गामके लोगोंको दिखानेके हेतु ले गया। घर पहुँचकर बिच्छूकी फौजका हाल सबसे कहकर, लाये हुये बिच्छूओंको लोटेसे दिखलाने लगा कि, जिससे लोगोंको विश्वास हो जावे। लोटेको उलटतेही बिच्छूके बदले सफेद २ चांदीके रुपये निकल पड़े। लोगोंको बड़ा आश्चर्य हुआ। लोभके मारे कितने लोग उस बिच्छूकी फौजको देखने गये पर पीछे पता न मिला कि, कहाँ चली गई।

ऐसा कहते हैं कि, जब धन लबारिस हो जाता है सौ वर्षतक उसका कोई स्वामी नहीं होता, तो वह पृथ्वीमें गड़े २ एकही जगह रहनेसे घबराता है वहांसे दूसरी जगह चला जाता है। या तो बिच्छूके रूपमें बाहरसे नाना प्रकारके स्वरूपसे पृथ्वीके भीतरसे एक जगहसे दूसरी जगह चला जाता है। जिस समय अपने स्थानको छोड़ता है उस समय बड़ा भारी शब्द होता है पृथ्वी कांपती है। जिस मनुष्यने जो दश बीस पा लिया था, उसमें उसका उतनाही भाग था, शेषके जिसका भाग होगा वह पावेगा।

जगदीशका समभाव ।

सब जीवधारियोंपर परमात्माकी समान दयादृष्टि है वह सबको एक दृष्टीसे देखता है जो जीव जिस अवस्थामें होता है वह उसी अवस्थामें उसकी रक्षा करता है वह न्यायी दयालु और भक्त वत्सल है उसकी ऊंचे नीचे सभी लोकोंपर एकही दृष्टि है। जिस लोकमें जैसा देह चाहिये वो उन्हें वैसाही देह देता है। यदि स्वर्गस्थ जीवोंको पृथिवी पर लाया जाय तो उनके देह यहाँके