सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संग्रह पर लौटें

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished2,136 पृष्ठ

प्रारंभिक पृष्ठ (ज्ञान सागर)

कबीरसागर

(सम्पूर्ण ११ भाग)

खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई.

This image shows a blank, aged, light gray page, likely an endpaper or flyleaf from an old book. The paper has a slightly textured appearance with subtle variations in tone. A prominent vertical crease or fold line is visible along the right edge, suggesting the page was once part of a bound volume. There are no markings, text, or illustrations on the page.

कबीरसागर

( सम्पूर्ण ११ भाग )

मूल्य : १२०० रुपये मात्र

खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई

हमारे प्रकाशनों की अधिक जानकारी व खरीद के लिये हमारे निजी स्थान

खेमराज श्रीकृष्णदास

अध्यक्ष : श्रीवेंकटेश्वर प्रेस,

११/१०१, खेमराज श्रीकृष्णदास मार्ग,

७ वी खेतवाडी बैंक रोड कान्नी,

मुंबई - ४०० ००४.

दूरभाष/फैक्स-०२२-२३८५७४५६.

खेमराज श्रीकृष्णदास-

६६, हडप्सर इण्डस्ट्रियल इस्टेट,

पुणे - ४११ ०१३.

दूरभाष-०२०-२६८७१०२५.

गंगाविष्णु श्रीकृष्णदास,

लक्ष्मी वेंकटेश्वर प्रेस व बुक डिपो

श्रीलक्ष्मीवेंकटेश्वर प्रेस बिल्डींग,

बुना छापाखाना गली, अहिल्याबाई चौक,

कल्याण, जि. ठाणे, महाराष्ट्र - ४२१ ३०१

दूरभाष - ०२५१-२२०९०६१.

खेमराज श्रीकृष्णदास

चौक, वाराणसी (उ.प्र.) २२१ ००१

दूरभाष - ०५४२-२४२००७८.

© सर्वाधिकार : प्रकाशक द्वारा सुरक्षित

मुद्रक एवं प्रकाशक:

खेमराज श्रीकृष्णदास TM,

अध्यक्ष : श्रीवेंकटेश्वर प्रेस,

खेमराज श्रीकृष्णदास मार्ग,

मुंबई - ४०० ००४.

Printers & Publishers

Khemraj Shrikrishnadass

Prop: Shri Venkateshwar Press

Khemraj Shrikrishnadass Marg,

7th Khetwadi, Mumbai - 400 004.

Web Site : http://www.khe-shri.com

E-mail : [email protected]

Printed by Sanjay Bajaj for M/s Khemraj Shrikrishnadass

Prop. Shri Venkateshwar Press, Mumbai-400004,

at their Shri Venkateshwar Press, 66 Hadapsar Industrial Estate,

Pune -411 013.

सत्य

कबीरसागर

ज्ञानसागर

(प्रथम खण्ड)

कबीरपंथी भारत पथिक स्वामी युगलानन्द
(विहारी) द्वारा परिष्कृत

मुद्रक एवं प्रकाशकः

खेमाराजा श्रीकृष्णदासा,

अध्यक्ष : श्रीवेंकटेश्वर प्रेस,

खेमराज श्रीकृष्णदास मार्ग, मुंबई - ४०० ००४.

नं. १ कबीरसागर -

संस्करण : फरवरी २०२०, संवत् २०७६

मूल्य : १०० रुपये मात्र ।

मुद्रक एवं प्रकाशक:

खेमराज श्रीकृष्णदासTM

अध्यक्ष : श्रीवेंकटेश्वर प्रेस,

खेमराज श्रीकृष्णदास मार्ग,

मुंबई - ४०० ००४.

Printers & Publishers :

Khemraj Shrikrishnadass,

Prop: Shri Venkateshwar Press,

Khemraj Shrikrishnadass Marg, 7th Khetwadi,

Mumbai - 400 004.

Web Site : http://www.Khe-shri.com

Email : [email protected]

Printed by Sanjay Bajaj For M/s. Khemraj Shrikrishnadass

Proprietors Shri Venkateshwar Press, Mumbai - 400 004,

at their Shri Venkateshwar Press, 86 Hadapsar Industrial

Estate, Pune 411 013.

सत्यनाम

A black and white woodcut-style illustration of a bearded man, likely a Sikh Guru, seated in a meditative posture on an ornate throne. He wears a tall, pointed turban and holds a mala. A large, ornate umbrella is positioned above him. A small pot is visible on the floor to the left.

श्री कबीर साहिब

महात्म्यम्

श्री श्री गणेशाय नमः

A faint, stylized illustration of a seated figure, likely Lord Ganesha, holding a conch shell and a sword, surrounded by a decorative border.

श्री गणेशाय नमः

श्रीज्ञानसागरकी अनुक्रमणिका

★

विषय.पृष्ठ
मुक्तिभेद, अमरलोक वर्णन१
सत्य पुरुष का वर्णन३
सृष्टि उत्पत्ति वर्णन प्रारंभ४
द्वीप वर्णन५
धर्मरायके द्वीप नहीं पानेका वर्णन६
धर्मरायका सत्य पुरुषकी सेवा करके द्वीप पानेका वर्णन । सहज की विन्ती७
धर्मरायका अधिकस्थान मांगना और मान-सरोवरका पाना८
धर्मरायका कामिनीको निगल जाना”
पुरुषका निरञ्जनको शाप देना९
पुरुषका योगसंतायनको जीवोंको कालके फन्दसे छुड़ानेकी आज्ञा देना और योग संतायन तथा कालका युद्ध”
कन्याका धर्मरायके पटसे निकलना और धर्मरायका उसे ठगना तथा दोनोंका मिल-कर सृष्टिकी रचना करनेका विचार करना और रचना११
चौदह यमका नाम और कर्म१२
कालका जीवोंको दुःखित करना और सत्य पुरुषकी आज्ञासे ज्ञानीजीका पृथ्वी-पर आना१३
धर्मराय और ज्ञानीजीका वार्तालाप और कोल करार”
धर्मरायका ज्ञानीजीसे जगन्नाथ की स्थापनाका वचन लेना”
सृष्टि उत्पत्तिकी कथा वर्णन१६
तीन देवका प्रगट होना और आदि मायाका तीनोंका काम बताना१७
विषय.पृष्ठ.
ब्रह्माका समुद्र खुदवाना१८
श्वानीकी आज्ञासे तीनों देवका समुद्र मंथन करना और तीन कन्याका प्रकट होना”
श्वानीकी आज्ञासे तीनों देवका छारे समुद्रको मंथन करना और उससे वेद आदिक प्रकट होना१९
चार खानिकी उत्पत्ति२०
ब्रह्माको वेद पढ़कर संदेह होना और माताकी आज्ञासे पिताकी खोजमें जाना२१
मायाका मायत्रीको उत्पन्न करके ब्रह्माको बुलानेके लिये भजना और मायाका ब्रह्माको झूठ बोलनेके कारण शाप देकर निरंजन से आप शाप पाना२२
मायाका विष्णुको पिताके खोजके लिये भजना । विष्णुका शुक्लसे श्याम हो जाना । मायाके पास आकर विष्णुका सत्य बोलना और तीनों लोकका राज्य पाना२३
मायाका महादेवको वर देना२४
तीनों देवका मानुषी सृष्टिकी उत्पत्ति करना । मनुष्य की अधिकतासे पीड़ित होकर पृथ्वीका गौरूपधरके विष्णुके समीप जाना और विष्णुका अवतार लेनेका वचन देना२५
अवतारों की कथा
बलिचरित्र (वामन अवतार)२७
सनक सनन्दन चरित्र२९

( ६ )

ज्ञानसागरकी अनुक्रमणिका

विषय.पृष्ठ.विषय.पृष्ठ.
नारदचरित्र३१कलियुग में कबीरसाहबका प्रगटघ६७
श्वेषणचरित्र३२जगन्नाथके मन्दिरकी स्थापना६८
सती दाहकी कथा३३चन्दवारमें कबीरसाहबका जाना७१
शिवकी समाधि छुड़ानेके लिये कामदेवका प्रयत्न करना और नारदका कामवश होना तथा विष्णुको शाप देना३४नूरीको मिलनेकी कथा७२
विष्णुका दशरथके घर अवतार लेना अर्थात् रामकथावर्णन३५नूरीके पूर्वजन्मकी कथा"
कृष्णचरित्रवर्णन४४बाललीला और रामानन्दको गुह करनेका वर्णन७५
पाण्डव यज्ञ तथा सुपच मुदशान कथा-वर्णन५२सिकन्दरसाहूकी वार्ता और रामानन्दजीका कत्ल होना७७
कृष्णका स्वर्गारोहण और जगन्नाथकी स्थापना५४मगहर गमनकी कथा"
निकलंक अवतारकी वार्ता५५रतनाकी कथा८०
उत्पति परलयका लेखा५६चौका आरतीकी विधि८३
कबीर वचनयोग कर्मका वर्णन८५
कृत्ययुगमें कबीरसाहबका पृथ्वीपर आना५७अष्ट कमल वर्णन८६
त्रेतामें कबीर साहबका पृथ्वीपर आना५८गैही रहनी९०
द्वापरमें कबीरसाहबका पृथ्वीपर आना६१आरतीका योगरूपसे वर्णन९१
नुमतीकी कथा"योगकी श्रेष्ठता"
पुनोकी बड़ाई९२
गुहवाके लक्षण९३
गुरुलक्षण९६
परलोकका मार्ग । सत्यलोक और हंसका वर्णन९७
भविष्यत् कथा । चक्रवर्षीका वर्णन१०५

इति अनुक्रमणिका समाप्त