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कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished2,136 पृष्ठ

मोह परिवार

( ९२ )

विवेकसागर

न्द्रोदयनाटक जिसके आधारपर यह मोह और विवेकके युद्धकी कथा प्रचलित हुई है, उसके अनुसार प्रवृत्तिकी सन्तानका वर्णन नीचे लिखता हूँ। देखो श्रीअनाथदासजीकृत प्रबोधचन्द्रोदयनाटक—

दोहा-त्रिया युगल मनभूपके, तिन ढिग सब संपत्ति ॥
एक नाम प्रवृत्ति है, एक नाम निवृत्ति ॥
प्रथमै दल प्रवृत्तिको, वरणि कहौ विस्तार ॥
तेहि पाछे निवृत्तिको, वरणों सब परिवार ॥
प्रथमें पुत्र प्रवृत्तिके, भयो मोहैं भयभीत ॥
दूजो सूत उत्पत्ति भयो, कामैसकलरणजीत ॥
महाकूर भौ तीसरो, क्रोधै नाम अतितेज ॥
चौथो अतिदारुण भयो, लोभै पापको एज ॥
दमैं पुत्र भयो पश्चमो, छठो गर्वै परियार ॥
सातैं मदैं उत्पत्ति भयो, विकटवीर विकरार ॥
अष्टम पुत्र प्रवृत्तिके, नाम अर्धर्म कुरूप ॥
सुक्तिपंथते चरण गहि, डारत है भवकूप ॥
आठैं पुत्र प्रवृत्तिके, असत्य वासना धीर ॥
वर्णनकरोंकुटुम्ब अब, जो जाको सुत तीर ॥

मोहपरिवार

महामोहकी नारिप्रिय, मिथ्या दृष्टि प्रमान ॥
पुत्र तासु हंकार है, ममता वधू सुजान ॥

कामपरिवार

मदननारि रतिप्रकट है, लालच सुवन बखान ॥
लोलुपता ताकी वधू, रंच नहीं परमान ॥

१ प्रबोधचन्द्रोदय नाटक संस्कृतका वेदान्त विषयक एक प्रसिद्ध नाटक है।