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सर्वकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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श्रीज्ञानसागरकी अनुक्रमणिका

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विषय.पृष्ठ
मुक्तिभेद, अमरलोक वर्णन१
सत्य पुरुष का वर्णन३
सृष्टि उत्पत्ति वर्णन प्रारंभ४
द्वीप वर्णन५
धर्मरायके द्वीप नहीं पानेका वर्णन६
धर्मरायका सत्य पुरुषकी सेवा करके द्वीप पानेका वर्णन । सहज की विन्ती७
धर्मरायका अधिकस्थान मांगना और मान-सरोवरका पाना८
धर्मरायका कामिनीको निगल जाना”
पुरुषका निरञ्जनको शाप देना९
पुरुषका योगसंतायनको जीवोंको कालके फन्दसे छुड़ानेकी आज्ञा देना और योग संतायन तथा कालका युद्ध”
कन्याका धर्मरायके पटसे निकलना और धर्मरायका उसे ठगना तथा दोनोंका मिल-कर सृष्टिकी रचना करनेका विचार करना और रचना११
चौदह यमका नाम और कर्म१२
कालका जीवोंको दुःखित करना और सत्य पुरुषकी आज्ञासे ज्ञानीजीका पृथ्वी-पर आना१३
धर्मराय और ज्ञानीजीका वार्तालाप और कोल करार”
धर्मरायका ज्ञानीजीसे जगन्नाथ की स्थापनाका वचन लेना”
सृष्टि उत्पत्तिकी कथा वर्णन१६
तीन देवका प्रगट होना और आदि मायाका तीनोंका काम बताना१७
विषय.पृष्ठ.
ब्रह्माका समुद्र खुदवाना१८
श्वानीकी आज्ञासे तीनों देवका समुद्र मंथन करना और तीन कन्याका प्रकट होना”
श्वानीकी आज्ञासे तीनों देवका छारे समुद्रको मंथन करना और उससे वेद आदिक प्रकट होना१९
चार खानिकी उत्पत्ति२०
ब्रह्माको वेद पढ़कर संदेह होना और माताकी आज्ञासे पिताकी खोजमें जाना२१
मायाका मायत्रीको उत्पन्न करके ब्रह्माको बुलानेके लिये भजना और मायाका ब्रह्माको झूठ बोलनेके कारण शाप देकर निरंजन से आप शाप पाना२२
मायाका विष्णुको पिताके खोजके लिये भजना । विष्णुका शुक्लसे श्याम हो जाना । मायाके पास आकर विष्णुका सत्य बोलना और तीनों लोकका राज्य पाना२३
मायाका महादेवको वर देना२४
तीनों देवका मानुषी सृष्टिकी उत्पत्ति करना । मनुष्य की अधिकतासे पीड़ित होकर पृथ्वीका गौरूपधरके विष्णुके समीप जाना और विष्णुका अवतार लेनेका वचन देना२५
अवतारों की कथा
बलिचरित्र (वामन अवतार)२७
सनक सनन्दन चरित्र२९