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कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished2,136 पृष्ठ

कलियुगका वर्णन

(१३२)

सर्वज्ञसागर

दुसरे राय युधिष्ठिर कहैं आये । द्रौपदी सहित परवाना पाये ॥
तिसरे पाराशर पहाँ आये । निर्णय ज्ञान ताहि समझाये ॥
चौथे राय धुधुल लहि भेदा । बहुत ज्ञानको कीन्ह निखेदा ॥
पचये पारसदास समझावा । स्त्री सहित परवाना पावा ॥
छठये गरुडबोध हम कीन्हा । विहँग शब्द गरुडको दीन्हा ॥
सातें हरिदास सुपच समझावा । नीमषार महाँ उसको पावा ॥
अठयें शुक्रदेव पहाँ ज्ञान पसारा । सकल सरब भेद निरवारा ॥
नवमें राजा विदुर समझाया । भक्तिरूप उन दर्शन पाया ॥
दशमें राजा भोज बुझाया । सत्य शब्द पुनि उसे चिह्नाया ॥
ग्यारहें राजा मुचकुन्दहि तारे । बारहें राजा चन्द्रहास उबारे ॥
तेरहे चलि वृन्दावन आये । चारि ग्वाल गोपी समझाये ॥
गुरु रूप पुनि पन्थ चलाये । भौसे हंसा आनि छुडाये ॥
बावन लाख जो जीव उवारा । कलियुग चौथे यहाँ पर धारा ॥

कलियुग वर्णन

प्रथमें गोरखदत्त समझाये । तारक भेद हम तुमहिं बताये ॥
दुसरे शाह बलखको बोधा । षट् आरबी बहुविधि सोधा ॥
तिसरे रामानन्द पहाँ आये । गुप्त भेद हम उन्हें सुनाये ॥
चौथे पीरकी परचे दीन्हा । पचये शरण सिकन्दर लीन्हा ॥
छठे वीरसिंह राजा भयऊ । ताको हम शब्द सुनयऊ ॥
सतयें कनकसिंध समझाये । सोलह रानी लोक पठाये ॥
अठहँ राव भूपाले आये । ग्यारह रानी लोक पठाये ॥
नौमें रतना बनिन समझाई । जाति अग्रवालिन करत मिठाई ॥
दशहँ अलिदास धोबी गयऊ । सात जीव परवाना पयऊ ॥
ग्यारहें राजा भोज समझायी । तिन बहु भक्ति करी चितलायी ॥
बारहें सुहम्मदसोकहचोकुराना । हद हुकुम जीव कर माना ॥