संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Sankshipta Narasimha Purana Gita Press
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
प्रारंभिक पृष्ठ व विषय-सूची
॥ ॐ श्रीलक्ष्मीनृसिंहाभ्यां नमः ॥
1113
महर्षिवेदव्यासप्रणीत
श्रीनरसिंहपुराण
( सचित्र, हिन्दी-अनुवादसहित )
गीताप्रेस गोरखपुर
GITA PRESS, GORAKHPUR [SINCE 1923]
गीताप्रेस, गोरखपुर
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ॐ श्रीलक्ष्मीनृसिंहाभ्यां नमः 1113
महर्षिवेदव्यासप्रणीतम्
श्रीनरसिंहपुराणम्
(श्रीभरद्वाजमुनि और लोमहर्षण सूतजीके संवादरूपमें)
मूल संस्कृत हिंदी-अनुवादसहित
गीताप्रेस, गोरखपुर
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ॐ श्रीलक्ष्मीनृसिंहाभ्यां नमः 1113
महर्षिवेदव्यासप्रणीत
श्रीनरसिंहपुराण
( श्रीभरद्वाजमुनि और लोमहर्षण सूतजीके संवादरूपमें )
( सचित्र, हिन्दी-अनुवादसहित )
त्वमेव माता च पिता त्वमेव
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव
त्वमेव सर्वं मम देवदेव॥
गीताप्रेस, गोरखपुर
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सं० २०७५ चौदहवाँ पुनर्मुद्रण ३,०००
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॥ श्रीहरिः ॥
श्रीनरसिंहपुराणका संक्षिप्त परिचय और निवेदन
श्रीनरसिंह पुराण सम्पूर्ण, हिन्दी-अनुवादके साथ आप सभी भगवत्प्रेमी महानुभावोंकी सेवामें
प्रस्तुत है। इसके पूर्व यह 'कल्याण' वर्ष ४५—'अग्निपुराण' तथा 'गर्गसंहिता' के उत्तरार्धके साथ
(सन् १९७१ ई० के) विशेषाङ्कके रूपमें प्रकाशित हुआ था। इसके महत्त्व, उपयोगिता तथा अत्यधिक
माँगको देखते हुए अब यह ग्रन्थाकारमें पुनः प्रकाशित किया गया है।
अन्यान्य पुराणोंकी भाँति श्रीनरसिंहपुराण भी भगवान् श्रीवेदव्यासरचित ही माना जाता है। इसमें
भी पुराणोंके लक्षणके अनुसार ही सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, मन्वन्तर और वंशानुचरितका सुन्दर वर्णन है।
भगवान्के अवतारोंकी लीला-कथा है, उसमें भगवान् श्रीरामका लीलाचरित प्रधानरूपसे वर्णित है।
श्रीमार्कण्डेय मुनिकी मृत्युपर विजय प्राप्त करनेकी सुन्दर कथा है, उसमें 'यमगीता' है।
कलियुगके मनुष्योंके लिये बड़ी ही आशाप्रद बातें हैं। इसमें कई ऐसे स्तोत्र-मन्त्रोंका विधान बताया
गया है, जिनके अनुष्ठानसे भोग-मोक्षकी सिद्धि प्राप्त हो सकती है। भक्तिके स्वरूप, भक्तोंके लक्षण
तथा ध्रुव आदि भक्तोंके सुन्दर चरित्रोंका वर्णन है।
इस छोटेसे पुराणमें बहुत ही उपयोगी तथा जाननेयोग्य सामग्री है। आशा है, पाठक-पाठिका
इसका पठन-मनन करेंगे तथा इसमें उल्लिखित कल्याणकारी विषयोंको यथारुचि यथावश्यक अपने
जीवनमें उतारकर लाभ उठावेंगे।
पठतां शृण्वतां नॄणां नरसिंहः प्रसीदति।
प्रसन्ने देवदेवेशे सर्वपापक्षयो भवेत्।
प्रक्षीणपापबन्धास्ते मुक्तिं यान्ति नरा इति॥
—प्रकाशक
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॥ श्रीहरिः ॥
श्रीनरसिंहपुराणकी विषय-सूची
अध्याय विषय पृष्ठ-संख्या अध्याय विषय पृष्ठ-संख्या
१- प्रयागमें ऋषियोंका समागम; सूतजीके ११- मार्कण्डेयजीद्वारा शेषशायी भगवान्का
प्रति भरद्वाजजीका प्रश्न; सूतजीद्वारा स्तवन ................................................ ४२
कथारम्भ और सृष्टिक्रमका वर्णन .... ७ १२- यम और यमीका संवाद ....................... ४८
२- ब्रह्मा आदिकी आयु और कालका १३- पतिव्रताकी शक्ति; उसके साथ एक
स्वरूप .......................................... १२ ब्रह्मचारीका संवाद; माताकी रक्षा परम
३- ब्रह्माजीद्वारा लोकरचना और नौ प्रकारकी धर्म है, इसका उपदेश.......................... ५१
सृष्टियोंका निरूपण .......................... १४ १४- तीर्थसेवन और आराधनसे भगवान्की
४- अनुसर्गके स्रष्टा ................................. १७ प्रसन्नता; 'अनाश्रमी' रहनेसे दोष तथा
५- रुद्र आदि सर्गों और अनुसर्गोंका वर्णन, आश्रमधर्मके पालनसे भगवत्प्राप्तिका
दक्ष प्रजापतिकी कन्याओंकी संततिका कथन ................................................ ५६
विस्तार .......................................... १८ १५- संसारवृक्षका वर्णन तथा इसे नष्ट करनेवाले
६- अगस्त्य तथा वसिष्ठजीके मित्रावरुणके ज्ञानकी महिमा ..................................... ५८
पुत्ररूपमें उत्पन्न होनेका प्रसङ्ग ....... २३ १६- भगवान् विष्णुके ध्यानसे मोक्षकी प्राप्तिका
७- मार्कण्डेयजीके द्वारा तपस्यापूर्वक श्रीहरिकी प्रतिपादन ........................................... ५९
आराधना; 'मृत्युञ्जय-स्तोत्र' का पाठ १७- अष्टाक्षरमन्त्र और उसका माहात्म्य . ६३
और मृत्युपर विजय प्राप्त करना ..... २७ १८- भगवान् सूर्यद्वारा संज्ञाके गर्भसे मनु, यम
८- मृत्यु और दूतोंको समझाते हुए यमका और यमीकी, छायाके गर्भसे मनु, शनैश्चर
उन्हें वैष्णवोंके पास जानेसे रोकना; एवं तपतीकी उत्पत्ति तथा अश्वरूपधारिणी
उनके मुँहसे श्रीहरिके नामकी महिमा संज्ञासे अश्विनीकुमारोंका प्रादुर्भाव .... ६६
सुनकर नरकस्थ जीवोंका भगवान्को १९- विश्वकर्माद्वारा १०८ नामोंसे भगवान्
नमस्कार करके श्रीविष्णुके धाममें सूर्यका स्तवन ...................................... ६८
जाना............................................... ३३ २०- मारुतौंकी उत्पत्ति ................................ ७२
९- यमाष्टक-यमराजका अपने दूतके प्रति २१- सूर्यवंशका वर्णन .................................. ७३
उपदेश ........................................... ३६ २२- चन्द्रवंशका वर्णन................................... ७४
१०-मार्कण्डेयका विवाह कर, वेदशिराको उत्पन्न २३- चौदह मन्वन्तरोंका वर्णन ..................... ७६
करके प्रयागमें अक्षयवटके नीचे तप एवं २४- सूर्यवंश-राजा इक्ष्वाकुका भगवत्प्रेम;
भगवान्की स्तुति करना; फिर उनका भगवद्दर्शनके हेतु तपस्याके लिये
आकाशवाणीके अनुसार स्तुति करनेपर प्रस्थान ............................................. ७९
भगवान्का उन्हें आशीर्वाद एवं वरदान २५- इक्ष्वाकुकी तपस्या और ब्रह्माजीद्वारा
देना तथा मार्कण्डेयजीका क्षीरसागरमें विष्णुप्रतिमाकी प्राप्ति ............................. ८२
जाकर पुनः उनका दर्शन करना..... ३८ २६- इक्ष्वाकुकी संततिका वर्णन ..................... ८९
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