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संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Sankshipta Narasimha Purana Gita Press

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished318 पृष्ठ

७४ श्रीनरसिंहपुराण [ अध्याय २२

७४ श्रीनरसिंहपुराण [ अध्याय २२
आदौ तावद्ब्रह्मा ब्रह्मणो मरीचिः। मरीचेः सबसे पहले ब्रह्माजी प्रकट हुए; उनसे मरीचि,
कश्यपः कश्यपादित्यः ॥ ४ ॥ आदित्यान्मनुः । मरीचिसे कश्यप, कश्यपसे सूर्य, सूर्यसे मनु, मनुसे
मनोरिक्ष्वाकुः, इक्ष्वाकोर्विकुक्षिः। विकुक्षेर्द्योतः, इक्ष्वाकु, इक्ष्वाकुसे विकुक्षि, विकुक्षिसे द्योत, द्योतसे
द्योताद्वेनो वेनात्पृथुः पृथोः पृथाश्वः ॥ ५ ॥ वेन, वेनसे पृथु और पृथुसे पृथाश्वकी उत्पत्ति हुई।
पृथाश्वादसंख्याताश्वः। असंख्याताश्वा- पृथाश्वसे असंख्याताश्व, असंख्याताश्वसे मान्धाता, मान्धातासे
न्मान्धाता ॥ ६ ॥ मान्धातुः पुरुकुत्सः पुरुकुत्साद्दृषदो पुरुकुत्स, पुरुकुत्ससे दृषद, दृषदसे अभिशम्भु,
दृषदादभिशम्भुः ॥ ७ ॥ अभिशम्भोर्दारुणो दारुणात् अभिशम्भुसे दारुण, दारुणसे सगर, सगरसे हर्यश्व, हर्यश्वसे
सगरः ॥ ८ ॥ सगराद्धर्यश्वो हर्यश्वाद्धारीतः ॥ ९ ॥ हारीत, हारीतसे रोहिताश्व, रोहिताश्वसे अंशुमान् तथा
हारीताद्रोहिताश्वो रोहिताश्वादंशुमान्। अंशुमतो अंशुमान्से भगीरथ उत्पन्न हुए। भगीरथसे सौदास,
भगीरथः ॥ १० ॥ भगीरथात् सौदासः सौदासा- सौदाससे शत्रुंदम, शत्रुंदमसे अनरण्य, अनरण्यसे
च्छत्रुंदमः ॥ ११ ॥ शत्रुंदमादनरण्यः। दीर्घबाहु, दीर्घबाहुसे अज, अजसे दशरथ, दशरथसे
अनरण्याद्दीर्घबाहुः। दीर्घबाहोरजः ॥ १२ ॥ श्रीराम, श्रीरामसे लव, लवसे पद्म, पद्मसे अनुपर्ण और
अजाद्दशरथः, दशरथाद्रामः, रामाल्लवः, अनुपर्णसे वस्त्रपाणिका जन्म हुआ। वस्त्रपाणिसे शुद्धोदन
लवात् पद्मः ॥ १३ ॥ पद्मादनुपर्णः । और शुद्धोदनसे बुध (बुद्ध)-की उत्पत्ति हुई। बुधसे
अनुपर्णाद्वस्त्रपाणिः ॥ १४ ॥ वस्त्रपाणेः शुद्धोदनः । सूर्यवंश समाप्त हो जाता है ॥ ४-१५ ॥
शुद्धोदनाद्बुधः। बुधादादित्यवंशो निवर्तते ॥ १५ ॥
सूर्यवंशभवा ये ते प्राधान्येन प्रकीर्तिताः। सूर्यवंशमें उत्पन्न हुए जो क्षत्रिय हैं, उनमेंसे
यैरियं पृथिवी भुक्ता धर्मतः क्षत्रियैः पुरा ॥ १६ मुख्य-मुख्य लोगोंका यहाँ वर्णन किया गया है, जिन्होंने
पूर्वकालमें इस पृथ्वीका धर्मपूर्वक पालन किया है।
सूर्यस्य वंशः कथितो मया मुने मुने ! यह मैंने सूर्यवंशका वर्णन किया है, जिसमें प्राचीन
समुद्गता यत्र नरेश्वराः पुरा। कालमें अनेकानेक नरेश हो गये हैं। अब मेरे द्वारा
मयोच्यमानाञ्छशिनः समाहितः बतलाये जानेवाले चन्द्रवंशीय परम उत्तम राजाओंका
शृणुष्व वंशेऽथ नृपाननुत्तमान् ॥ १७ वर्णन आपलोग सुनें ॥ १६-१७ ॥
इति श्रीनरसिंहपुराणे सूर्यवंशकथनं नामैकविंशोऽध्यायः ॥ २१ ॥
इस प्रकार श्रीनरसिंहपुराणमें 'सूर्यवंशका वर्णन' नामक इक्कीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ २१ ॥
बाईसवाँ अध्याय
चन्द्रवंशका वर्णन
सूत उवाच सूतजी बोले—महामुने भरद्वाज ! अब चन्द्रवंशका
सोमवंशं शृणुष्वाथ भरद्वाज महामुने । वर्णन सुनो। (अन्य) पुराणोंमें इसका विस्तारपूर्वक
पुराणे विस्तरेणोक्तं संक्षेपात् कथयेऽधुना ॥ १ वर्णन किया गया है, अतः इस समय मैं यहाँ संक्षेपसे
आदौ तावद्ब्रह्मा। ब्रह्मणो मानसः पुत्रो इसका वर्णन करता हूँ ॥ १ ॥
मरीचिर्मरीचेर्दाक्षायण्यां कश्यपः ॥ २ ॥ कश्यपा- सर्वप्रथम ब्रह्माजी हुए, उनके मानसपुत्र मरीचि हुए,
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अध्याय २२ ] चन्द्रवंशका वर्णन ७५


ददितेरादित्यः। आदित्यात् सुवर्चलायां मनुः ॥ ३ ॥ | मरीचिसे दाक्षायणीके गर्भसे कश्यपजी उत्पन्न हुए। कश्यपसे
मनोः सुरूपायां सोमः। सोमाद्रोहिण्यां बुधः। | अदितिके गर्भसे सूर्यका जन्म हुआ। सूर्यसे सुवर्चला
बुधादिलायां पुरूरवाः ॥ ४ ॥ पुरूरवस आयुः। | (संज्ञा)-के गर्भसे मनुकी उत्पत्ति हुई। मनुके द्वारा सुरूपामके
आयो रूपवत्यां नहुषः ॥ ५ ॥ नहुषात् पितृवत्यां | गर्भसे सोम और सोमके द्वारा रोहिणीके गर्भसे बुधका
ययातिः। ययातेः शर्मिष्ठायां पूरुः ॥ ६ ॥ पूरोर्वंशदायां | जन्म हुआ तथा बुधके द्वारा इलाके गर्भसे राजा पुरूरवा
सम्पातिः। सम्पातेर्भानुदत्तायां सार्वभौमः। | उत्पन्न हुए। पुरूरवासे आयुका जन्म हुआ, आयुद्वारा
सार्वभौमस्य वैदेह्यां भोजः ॥ ७ ॥ भोजस्य लिङ्गायां | रूपवतीके गर्भसे नहुष हुए। नहुषके द्वारा पितृवतीके
दुष्यन्तः। दुष्यन्तस्य शकुन्तलायां भरतः ॥ ८ ॥ | गर्भसे ययाति हुए और ययातिसे शर्मिष्ठाके गर्भसे पूरुका
भरतस्य नन्दायामजमीढः। अजमीढस्य सुदेव्यां | जन्म हुआ। पूरुके द्वारा वंशदाके गर्भसे सम्पाति और
पृश्निः। पृश्नेरुग्रसेनायां प्रसरः। प्रसरस्य बहुरूपायां | उससे भानुदत्ताके गर्भसे सार्वभौम हुआ। सार्वभौमसे वैदेहीके
शांतनुः। शांतनोर्योजनगन्धायां विचित्रवीर्यः। | गर्भसे भोजका जन्म हुआ। भोजके लिङ्गाके गर्भसे दुष्यन्त
विचित्रवीर्यस्याम्बिकायां पाण्डुः ॥ ९ ॥ पाण्डोः | और दुष्यन्तके शकुन्तलासे भरत हुआ। भरतके नन्दासे
कुन्तिदेव्यामर्जुनः। अर्जुनात् सुभद्राया- | अजमीढ नामक पुत्र हुआ, अजमीढके सुदेवीके गर्भसे
मभिमन्युः ॥ १० ॥ अभिमन्योरुत्तरायां परीक्षित्। | पृश्नि हुआ तथा पृश्निके उग्रसेनाके गर्भसे प्रसरका आविर्भाव
परीक्षितस्य मातृवत्यां जनमेजयः। जनमेजयस्य | हुआ। प्रसरके बहुरूपाके गर्भसे शांतनु हुए, शांतनुसे
पुण्यवत्यां शतानीकः ॥ ११ ॥ शतानीकस्य पुष्पवत्यां | योजनगन्धाने विचित्रवीर्यको जन्म दिया। विचित्रवीर्यके
सहस्रानीकः। सहस्रानीकस्य मृगवत्यामुदयनः। | अम्बिकाके गर्भसे पाण्डुका जन्म हुआ। पाण्डुसे
तस्य वासवदत्तायां नरवाहनः ॥ १२ ॥ | कुन्तीदेवीके गर्भसे अर्जुन हुआ, अर्जुनसे सुभद्राने
नरवाहनस्याश्वमेधायां क्षेमकः। क्षेमकान्ताः | अभिमन्युको उत्पन्न किया। अभिमन्युसे उत्तराके गर्भसे
पाण्डवाः सोमवंशो निवर्तते ॥ १३ ॥ | परीक्षित् हुआ, परीक्षित्के मातृवतीसे जनमेजय उत्पन्न
| हुआ और जनमेजयके पुण्यवतीके गर्भसे शतानीककी
| उत्पत्ति हुई। शतानीकके पुष्पवतीसे सहस्रानीक हुआ,
| सहस्रानीकसे मृगवतीसे उदयन उत्पन्न हुआ और उदयनके
| वासवदत्ताके गर्भसे नरवाहन हुआ। नरवाहनके अश्वमेधासे
| क्षेमक हुआ। यह क्षेमक ही पाण्डववंशका अन्तिम राजा
| है, इसके बाद सोमवंश निवृत्त हो जाता है॥ २-१३॥
य इदं शृणुयान्नित्यं राजवंशमनुत्तमम्। | जो पुरुष इस उत्तम राजवंशका सदा श्रवण करता
सर्वपापविशुद्धात्मा विष्णुलोकं स गच्छति ॥ १४ | है, वह सब पापोंसे मुक्त एवं विशुद्धचित्त होकर विष्णु-
यश्चेदं पठते नित्यं श्राद्धे वा श्रावयेत् पितॄन्। | लोकको प्राप्त होता है। जो इस पवित्र वंश-वर्णनको
वंशानुकीर्तनं पुण्यं पितॄणां दत्तमक्षयम् ॥ १५ | प्रतिदिन स्वयं पढ़ता अथवा श्राद्धकालमें पितृगणोंको
राज्ञां हि सोमस्य मया तवेरिता | सुनाता है उसके पितरोंको दिया हुआ दान अक्षय हो
वंशानुकीर्तिर्द्विज पापनाशनी। | जाता है। द्विज! यह मैंने आपसे सोमवंशी राजाओंका
शृणुष्व विप्रेन्द्र मयोच्यमानं | पाप-नाशक वंशानुकीर्तन सुनाया। विप्रवर! अब मेरे द्वारा
मन्वन्तरं चापि चतुर्दशाख्यम् ॥ १६ ॥ | बताये जानेवाले चौदह मन्वन्तरोंको सुनिये ॥ १४-१६ ॥

इति श्रीनरसिंहपुराणे सोमवंशानुकीर्तनं नाम द्वाविंशोऽध्यायः ॥ २२ ॥
इस प्रकार श्रीनरसिंहपुराणमें 'सोमवंशका वर्णन' नामक बाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ २२ ॥


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