संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Sankshipta Narasimha Purana Gita Press
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 7, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ें॥ श्रीहरिः ॥
श्रीनरसिंहपुराणकी विषय-सूची
अध्याय विषय पृष्ठ-संख्या अध्याय विषय पृष्ठ-संख्या
१- प्रयागमें ऋषियोंका समागम; सूतजीके ११- मार्कण्डेयजीद्वारा शेषशायी भगवान्का
प्रति भरद्वाजजीका प्रश्न; सूतजीद्वारा स्तवन ................................................ ४२
कथारम्भ और सृष्टिक्रमका वर्णन .... ७ १२- यम और यमीका संवाद ....................... ४८
२- ब्रह्मा आदिकी आयु और कालका १३- पतिव्रताकी शक्ति; उसके साथ एक
स्वरूप .......................................... १२ ब्रह्मचारीका संवाद; माताकी रक्षा परम
३- ब्रह्माजीद्वारा लोकरचना और नौ प्रकारकी धर्म है, इसका उपदेश.......................... ५१
सृष्टियोंका निरूपण .......................... १४ १४- तीर्थसेवन और आराधनसे भगवान्की
४- अनुसर्गके स्रष्टा ................................. १७ प्रसन्नता; 'अनाश्रमी' रहनेसे दोष तथा
५- रुद्र आदि सर्गों और अनुसर्गोंका वर्णन, आश्रमधर्मके पालनसे भगवत्प्राप्तिका
दक्ष प्रजापतिकी कन्याओंकी संततिका कथन ................................................ ५६
विस्तार .......................................... १८ १५- संसारवृक्षका वर्णन तथा इसे नष्ट करनेवाले
६- अगस्त्य तथा वसिष्ठजीके मित्रावरुणके ज्ञानकी महिमा ..................................... ५८
पुत्ररूपमें उत्पन्न होनेका प्रसङ्ग ....... २३ १६- भगवान् विष्णुके ध्यानसे मोक्षकी प्राप्तिका
७- मार्कण्डेयजीके द्वारा तपस्यापूर्वक श्रीहरिकी प्रतिपादन ........................................... ५९
आराधना; 'मृत्युञ्जय-स्तोत्र' का पाठ १७- अष्टाक्षरमन्त्र और उसका माहात्म्य . ६३
और मृत्युपर विजय प्राप्त करना ..... २७ १८- भगवान् सूर्यद्वारा संज्ञाके गर्भसे मनु, यम
८- मृत्यु और दूतोंको समझाते हुए यमका और यमीकी, छायाके गर्भसे मनु, शनैश्चर
उन्हें वैष्णवोंके पास जानेसे रोकना; एवं तपतीकी उत्पत्ति तथा अश्वरूपधारिणी
उनके मुँहसे श्रीहरिके नामकी महिमा संज्ञासे अश्विनीकुमारोंका प्रादुर्भाव .... ६६
सुनकर नरकस्थ जीवोंका भगवान्को १९- विश्वकर्माद्वारा १०८ नामोंसे भगवान्
नमस्कार करके श्रीविष्णुके धाममें सूर्यका स्तवन ...................................... ६८
जाना............................................... ३३ २०- मारुतौंकी उत्पत्ति ................................ ७२
९- यमाष्टक-यमराजका अपने दूतके प्रति २१- सूर्यवंशका वर्णन .................................. ७३
उपदेश ........................................... ३६ २२- चन्द्रवंशका वर्णन................................... ७४
१०-मार्कण्डेयका विवाह कर, वेदशिराको उत्पन्न २३- चौदह मन्वन्तरोंका वर्णन ..................... ७६
करके प्रयागमें अक्षयवटके नीचे तप एवं २४- सूर्यवंश-राजा इक्ष्वाकुका भगवत्प्रेम;
भगवान्की स्तुति करना; फिर उनका भगवद्दर्शनके हेतु तपस्याके लिये
आकाशवाणीके अनुसार स्तुति करनेपर प्रस्थान ............................................. ७९
भगवान्का उन्हें आशीर्वाद एवं वरदान २५- इक्ष्वाकुकी तपस्या और ब्रह्माजीद्वारा
देना तथा मार्कण्डेयजीका क्षीरसागरमें विष्णुप्रतिमाकी प्राप्ति ............................. ८२
जाकर पुनः उनका दर्शन करना..... ३८ २६- इक्ष्वाकुकी संततिका वर्णन ..................... ८९
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