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संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished770 पृष्ठ

पूर्वभाग-तृतीय पाद

  • पूर्वभाग-तृतीय पाद *
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और असहायोंके बन्धु, ३३५. अनूपमः=जिनके समान दूसरा कोई नहीं, ३३६. अक्रूरगृहगोप्ताः=अक्रूरके गृहकी रक्षा करनेवाले, ३३७. प्रतिज्ञापालकः=प्रतिज्ञाका पालन करनेवाले, ३३८. शुभः=शुभस्वरूप।

३३९. जरासन्धजयी=सत्रह बार जरासन्धको जीतनेवाले, ३४०. विद्वान्=सर्वज्ञ, ३४१. यवनान्तः=कालयवनका अन्त करनेवाले, ३४२. द्विजाश्रयः=द्विजोंके आश्रय, ३४३. मुचुकुन्दप्रियकरः=मुचुकुन्दका प्रिय करनेवाले, ३४४. जरासन्धपलायितः=अठारहवीं बारके युद्धमें जरासन्धके सामनेसे युद्ध छोड़कर भाग जानेवाले।

३४५. द्वारकाजनकः=द्वारकापुरीको प्रकट करनेवाले, ३४६. गूढः=मानवरूपमें छिपे हुए परमात्मा, ३४७. ब्रह्मण्यः=ब्राह्मणभक्त, ३४८. सत्यसंगरः=सत्यप्रतिज्ञ, ३४९. लीलाधरः=लीलाधारी, ३५०. प्रियकरः= सबका प्रिय करनेवाले, ३५१. विश्वकर्मा=बहुत प्रकारके कर्म करनेवाले, ३५२. यशप्रदः=दूसरोंको यश देनेवाले।

३५३. रुक्मिणीप्रियसंदेशः=रुक्मिणीको प्रिय संदेश देनेवाले, ३५४. रुक्मिशोकविवर्धनः=रुक्मीका शोक बढ़ानेवाले, ३५५. चैद्यशोकालयः=शिशुपालके लिये शोकके भण्डार, ३५६. श्रेष्ठः=उत्तम गुणसम्पन्न, ३५७. दुष्टराजन्यनाशनः=दुष्ट राजाओंका नाश करनेवाले।

३५८. रुक्मिवैरूप्यकरणः=रुक्मीके आधे बाल मुड़ाकर उसे कुरूप बना देनेवाले, ३५९. रुक्मिणीवचने रतः=रुक्मिणीके वचनका पालन करनेमें तत्पर, ३६०. बलभद्रवचोग्राही=बलभद्रजीकी आज्ञा माननेवाले, ३६१. मुक्तरुक्मी=रुक्मीको जीवित छोड़ देनेवाले, ३६२. जनार्दनः=भक्तोंद्वारा याचित।

३६३. रुक्मिणीप्राणनाथः=रुक्मिणीके प्राणवल्लभ, ३६४. सत्यभामापतिः=सत्यभामाके स्वामी, ३६५. स्वयं भक्तपक्षी=स्वयं ही भक्तोंका पक्ष लेनेवाले, ३६६. भक्तिवश्यः=भक्तिसे वशमें हो जानेवाले, ३६७. अक्रूरमणिदायकः=अक्रूरजीको स्यमन्तकमणि देनेवाले।

३६८. शतधन्वप्राणहारी=शतधन्वाके प्राण लेनेवाले, ३६९. ऋक्षराजसुताप्रियः=रीछोंके राजा जाम्बवान्की पुत्रीके प्रियतम पति, ३७०. सत्राजित्तनयाकान्तः=सत्राजित्की सुपुत्री सत्यभामाके प्राणवल्लभ, ३७१. मित्रविन्दापहारकः=मित्रविन्दाका अपहरण करनेवाले।

३७२. सत्यापतिः=नग्नजित्की पुत्री सत्याके स्वामी, ३७३. लक्ष्मणाजित्=स्वयंवरमें लक्ष्मणाको जीतनेवाले, ३७४. पूज्यः=पूजाके योग्य, ३७५. भद्राप्रियङ्करः=भद्राका प्रिय करनेवाले, ३७६. नरकासुरघाती=नरकासुरका वध करनेवाले, ३७७. लीलाकन्याहरः=लीलापूर्वक षोडश सहस्र कन्याओंको नरकासुरकी कैदसे छुड़ाकर अपने साथ ले जानेवाले, ३७८. जयी=विजयशील।

३७९. मुरारिः=मुर दैत्यका नाश करनेवाले, ३८०. मदनेशः=कामदेवपर भी शासन करनेवाले, ३८१. धरित्रीदुःखनाशनः=धरतीका दुःख दूर करनेवाले, ३८२. वैनतेयी=गरुड़के स्वामी, ३८३. स्वर्गगामी=पारिजातके लिये स्वर्गलोककी यात्रा करनेवाले, ३८४. अदित्याः कुण्डलप्रदः=अदितिको कुण्डल देनेवाले।

३८५. इन्द्रार्चितः=इन्द्रके द्वारा पूजित, ३८६. रमाकान्तः=लक्ष्मीके प्रियतम, ३८७. वज्रिभार्याप्रपूजितः=इन्द्रपत्नी शचीके द्वारा पूजित, ३८८. पारिजातापहारी=पारिजात वृक्षका अपहरण करनेवाले, ३८९. शक्रमानापहारकः=इन्द्रका अभिमान चूर्ण करनेवाले।

३९०. प्रद्युम्नजनकः=प्रद्युम्नके पिता, ३९१. साम्बतातः=साम्बके पिता, ३९२. बहुसुतः=अधिक पुत्रोंवाले, ३९३. विधुः=विष्णुस्वरूप,

५१० * संक्षिप्त नारदपुराण *


३९४. गर्गाचार्यः=गर्गमुनिको आचार्य बनानेवाले, ३९५. सत्यगतिः=सत्यसे ही प्राप्त होनेवाले, ३९६. धर्माधारः=धर्मके आश्रय, ३९७. धराधरः=पृथ्वीको धारण करनेवाले।

३९८. द्वारकामण्डनः=द्वारकाको सुशोभित करनेवाले, ३९९. श्लोक्यः=यशोगानके योग्य, ४००. सुश्लोकः=उत्तम यशवाले, ४०१. निगमालयः=वेदोंके आश्रय, ४०२. पौण्ड्रकप्राणहारी= मिथ्या वासुदेवनामधारी पौण्ड्रकके प्राण लेनेवाले, ४०३. काशिराजशिरोहरः= काशिराजका सिर काटनेवाले।

४०४. अवैष्णवविप्रदाही=अवैष्णव ब्राह्मणोंको, जो यदुवंशियोंके प्रति मारणका प्रयोग कर रहे थे, दग्ध करनेवाले, ४०५. सुदक्षिणभयावहः=काशिराजके पुत्र सुदक्षिणको भय देनेवाले, ४०६. जरासन्धविदारी=भीमसेनके द्वारा जरासन्धको चीर डालनेवाले, ४०७. धर्मनन्दनयज्ञकृत्=धर्मपुत्र युधिष्ठिरका यज्ञ पूर्ण करनेवाले।

४०८. शिशुपालशिरश्छेदी=शिशुपालका सिर काटनेवाले, ४०९. दन्तवक्त्रविनाशनः=दन्तवक्त्रका नाश करनेवाले, ४१०. विदूरथान्तकः=विदूरथके काल, ४११. श्रीशः=लक्ष्मीके स्वामी, ४१२. श्रीदः=सम्पत्ति देनेवाले, ४१३. द्विविदनाशनः=बलभद्ररूपसे द्विविद वानरका नाश करनेवाले।

४१४. रुक्मिणीमानहारी=रुक्मिणीका अभिमान दूर करनेवाले, ४१५. रुक्मिणीमानवर्धनः=रुक्मिणीका सम्मान बढ़ानेवाले, ४१६. देवर्षिशापहर्ता=देवर्षि नारदका शाप दूर करनेवाले, ४१७. द्रौपदीवाक्यपालकः=द्रौपदीके वचनोंका पालन करनेवाले।

४१८. दुर्वासोभयहारी=दुर्वासाका भय दूर करनेवाले, ४१९. पाञ्चालीस्मरणागतः=द्रौपदीके स्मरण करते ही आ पहुँचनेवाले, ४२०. पार्थदूतः=कुन्तीपुत्रोंके दूत, ४२१. पार्थमन्त्री=कुन्तीपुत्रोंके मन्त्री (सलाहकार), ४२२. पार्थदुःखौघनाशनः=कुन्तीपुत्रोंके दुःखसमुदायका नाश करनेवाले।

४२३. पार्थमानापहारी=कुन्तीपुत्रोंका अभिमान दूर करनेवाले, ४२४. पार्थजीवनदायकः= कुन्तीपुत्रोंको जीवन देनेवाले, ४२५. पाञ्चालीवस्त्रदाता= कौरवोंकी सभामें द्रौपदीको वस्त्रराशि अर्पण करनेवाले, ४२६. विश्वपालकपालकः=विश्वकी रक्षा करनेवाले देवताओंके भी रक्षक।

४२७. श्वेताश्वसारथिः=श्वेत घोड़ोंवाले अर्जुनके सारथि, ४२८. सत्यः=सत्यस्वरूप, ४२९. सत्यसाध्यः=सत्यसे ही प्राप्त होने योग्य, ४३०. भयापहः=भक्तोंके भयका नाश करनेवाले, ४३१. सत्यसन्धः=सत्यप्रतिज्ञ, ४३२. सत्यरतिः=सत्यमें रत, ४३३. सत्यप्रियः=सत्य जिनको प्यारा है, ४३४. उदारधीः=उदार बुद्धिवाले।

४३५. महासेनजयी=शोणितपुरमें बाणासुरके पक्षमें युद्धके लिये आये हुए स्वामिकार्तिकेयको भी परास्त करनेवाले, ४३६. शिवसैन्यविनाशनः=भगवान् शिवकी सेनाको मार भगानेवाले, ४३७. बाणासुरभुजच्छेत्ता=बाणासुरकी भुजाओंको काटनेवाले, ४३८. बाणबाहुवरप्रदः=बाणासुरको चार भुजाओंसे युक्त रहनेका वर देनेवाले।

४३९. तार्क्ष्यमानापहारी=गरुड़का अभिमान चूर्ण करनेवाले, ४४०. तार्क्ष्यतेजोविवर्धनः=गरुड़के तेजको बढ़ानेवाले, ४४१. रामस्वरूपधारी=श्रीरामका स्वरूप धारण करनेवाले, ४४२. सत्यभामामुदावहः=सत्यभामाको आनन्द देनेवाले।

४४३. रत्नाकरजलक्रीडः=समुद्रके जलमें क्रीडा करनेवाले, ४४४. व्रजलीलाप्रदर्शकः=अधिकारी भक्तोंको व्रजलीलाका दर्शन करानेवाले, ४४५. स्वप्रतिज्ञापरिव्ध्वंसी=भीष्मजीकी प्रतिज्ञा रखनेके लिये अपनी प्रतिज्ञा तोड़ देनेवाले, ४४६. भीष्माज्ञापरिपालकः=भीष्मकी आज्ञाका पालन करनेवाले।