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संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished770 पृष्ठ

पूर्वभाग-तृतीय पाद

  • पूर्वभाग-तृतीय पाद *
    ५१३

प्रिय, ५५८. कृष्णक्रीडा=श्रीकृष्णके साथ लीला करनेवाली, ५५९. कृष्णरतिः=श्रीकृष्णके प्रति प्रगाढ़ प्रेमवाली, ५६०. श्रीकृष्णसहचारिणी=वृन्दावनमें श्रीकृष्णके साथ विचरनेवाली।

५६१. वंशीवटप्रियस्थाना=वंशीवट जिनका प्रिय स्थान है, ५६२. युग्मायुग्मस्वरूपिणी=युगलरूपा और एक रूपा, ५६३. भाण्डीरवासिनी=भाण्डीर वनमें निवास करनेवाली, ५६४. शुभ्रा=गौरवर्णा, ५६५. गोपीनाथप्रिया=गोपीवल्लभ श्रीकृष्णकी प्रियतमा, ५६६. सखी=श्रीकृष्णकी सखी।

५६७. श्रुतिनिःश्वसितः=श्रुतियाँ जिनके निःश्वाससे प्रकट होती हैं, ५६८. दिव्या=दिव्यस्वरूपा, ५६९. गोविन्दरसदायिनी=गोविन्दको माधुर्यरस प्रदान करनेवाली, ५७०. श्रीकृष्णप्रार्थिनी=केवल श्रीकृष्णको चाहनेवाली, ५७१. ईशाना=ईश्वरी, ५७२. महानन्दप्रदायिनी=परमानन्द प्रदान करनेवाली।

५७३. वैकुण्ठजनसंसेव्या=वैकुण्ठवासियोंद्वारा सेवन करने योग्य, ५७४. कोटिलक्ष्मीसुखावहा=कोटि-कोटि लक्ष्मीसे भी अधिक सुख देनेवाली, ५७५. कोटिकन्दर्पलावण्या=करोड़ों कामदेवोंसे अधिक रूपलावण्यसे सम्पन्न, ५७६. रतिकोटिरतिप्रदा=करोड़ों रतियोंसे भी अधिक प्रगाढ़ प्रीतिरस प्रदान करनेवाली।

५७७. भक्तिग्राह्या=भक्तिसे प्राप्त होने योग्य, ५७८. भक्तिरूपा=भक्तिस्वरूपा, ५७९. लावण्यसरसी=सौन्दर्यकी पुष्करिणी, ५८०. उमा=योगमाया एवं ब्रह्मविद्यास्वरूपा, ५८१. ब्रह्मरुद्रादिसंराध्या=ब्रह्मा तथा रुद्रादिके द्वारा आराधना करने योग्य, ५८२. नित्यं कौतूहलान्विता=नित्य कौतुकयुक्त।

५८३. नित्यलीला=नित्य लीलापरायणा, ५८४. नित्यकामा=नित्य श्रीकृष्ण-मिलनको चाहनेवाली, ५८५. नित्यशृङ्गारभूषिता=नित्य नूतन शृङ्गारसे विभूषित, ५८६. नित्यवृन्दावनरसा=वृन्दावनके माधुर्यरसका सदा आस्वादन करनेवाली, ५८७. नन्दनन्दनसंयुता=नन्दनन्दन श्रीकृष्णके साथ रहनेवाली।

५८८. गोपिकामण्डलीयुक्ता=गोपियोंकी मण्डलीसे घिरी हुई, ५८९. नित्यं गोपालसङ्गता=सदा गोपाल श्रीकृष्णसे मिलनेवाली, ५९०. गोरसक्षेपिणी=गोरस फेंकने या लुटानेवाली, ५९१. शूरा=शौर्यसम्पन्न, ५९२. सानन्दा=आनन्दयुक्त, ५९३. आनन्ददायिनी=आनन्द देनेवाली।

५९४. महालीलाप्रकृष्टा=श्रीकृष्णकी महालीलाकी सर्वश्रेष्ठ पात्र, ५९५. नागरी=परम चतुरा, ५९६. नगचारिणी=गिरिराज गोवर्धनपर विचरनेवाली, ५९७. नित्यमाघूर्णिता=श्रीकृष्णकी खोजमें नित्य घूमनेवाली, ५९८. पूर्णा=समस्त सद्गुणोंसे परिपूर्ण, ५९९. कस्तूरीतिलकान्विता=कस्तूरीकी बेंदीसे सुशोभित।

६००. पद्मा=लक्ष्मीस्वरूपा, ६०१. श्यामा=सौन्दर्यसे सम्पन्न, ६०२. मृगाक्षी=मृगके समान विशाल एवं चञ्चल नेत्रोंवाली, ६०३. सिद्धिरूपा=सिद्धिस्वरूपा, ६०४. रसावहा=श्रीकृष्णको माधुर्यरसका आस्वादन करानेवाली, ६०५. कोटिचन्द्रानना=करोड़ों चन्द्रमाओंके समान सुन्दर मुखवाली, ६०६. गौरी=गौरवर्णा, ६०७. कोटिकोकिलसुस्वरा=करोड़ों कोकिलोंके समान मधुर स्वरवाली।

६०८. शीलसौन्दर्यनिलया=उत्तम शील तथा अनन्त सौन्दर्यकी आधारभूता, ६०९. नन्दनन्दन-लालिता=नन्दनन्दन श्रीकृष्णसे दुलार पानेवाली, ६१०. अशोकवनसंवासा=अशोकवनमें निवास करनेवाली, ६११. भाण्डीरवनसङ्गता=भाण्डीरवनमें मिलनेवाली।

५१४* संक्षिप्त नारदपुराण *

६१२. कल्पद्रुमतलाविष्टा = कल्पवृक्षके नीचे बैठी हुई, ६१३. कृष्णा = कृष्णस्वरूपा, ६१४. विश्वा = विश्वस्वरूपा, ६१५. हरिप्रिया = श्रीकृष्णकी प्रेयसी, ६१६. अजागम्या = ब्रह्माजीके लिये अगम्य, ६१७. भवागम्या = महादेवजीके लिये अगम्य, ६१८. गोवर्धनकृतालया = गोवर्धन पर्वतपर निवास करनेवाली।

६१९. यमुनातीरनिलया = यमुना तटपर रहनेवाली, ६२०. शश्वद्गोविन्दजल्पिनी = सदा श्रीकृष्ण गोविन्दकी रट लगानेवाली, ६२१. शश्वन्मानवती = नित्य मानिनी, ६२२. स्निग्धा = स्नेहमयी, ६२३. श्रीकृष्णपरिवन्दिता = श्रीकृष्णके द्वारा नित्य वन्दित।

६२४. कृष्णस्तुता = श्रीकृष्णके द्वारा जिनका गुणगान किया गया है, ६२५. कृष्णाव्रता = श्रीकृष्णपरायणा, ६२६. श्रीकृष्णहृदयालया = श्रीकृष्णके हृदयमें निवास करनेवाली, ६२७. देवद्रुमफला = कल्पवृक्षके समान मनोवाञ्छित फल देनेवाली, ६२८. सेव्या = सेवन करने योग्य, ६२९. वृन्दावनरसालया = वृन्दावनके रसमें निमग्न रहनेवाली।

६३०. कोटितीर्थमयी = कोटितीर्थस्वरूपा, ६३१. सत्या = सत्यस्वरूपा, ६३२. कोटितीर्थफलप्रदा = करोड़ों तीर्थोंका फल देनेवाली, ६३३. कोटियोग-सुदुष्प्राप्या = करोड़ों योगसाधनोंसे भी दुर्लभ, ६३४. कोटियज्ञदुराश्रया = कोटि यज्ञोंसे भी जिनकी शरणागति प्राप्त होनी कठिन है।

६३५. मनसा = मनसा नामसे प्रसिद्ध, ६३६. शशिलेखा = श्रीकृष्णरूपी चन्द्रमाकी कला, ६३७. श्रीकोटिसुभगा = कोटि लक्ष्मीके समान सौभाग्यवती, ६३८. अनघा = पापशून्य, ६३९. कोटिमुक्तसुखा = करोड़ों मुक्तात्माओंके समान सुखी, ६४०. सौम्या = सौम्यस्वरूपा, ६४१. लक्ष्मीकोटिविलासिनी = करोड़ों लक्ष्मियोंके समान विलासवती।

६४२. तिलोत्तमा = ठोढ़ीमें तिलके आकारकी बेंदी या चिह्न होनेके कारण अतिशय उत्तम सौन्दर्ययुक्त, ६४३. त्रिकालस्था = भूत, भविष्य, वर्तमान—तीनों कालोंमें विद्यमान, ६४४. त्रिकालज्ञा = तीनों कालोंकी घटनाओंको जाननेवाली, ६४५. अधीश्वरी = स्वामिनी, ६४६. त्रिवेदज्ञा = तीनों वेदोंको जाननेवाली, ६४७. त्रिलोकज्ञा = तीनों लोकोंको जाननेवाली, ६४८. तुरीयान्तनिवासिनी = जाग्रत्‌से लेकर तुरीयापर्यन्त सब अवस्थाओंमें निवास करनेवाली।

६४९. दुर्गाराध्या = उमाके द्वारा आराध्य, ६५०. रमाराध्या = लक्ष्मीकी आराध्य देवी, ६५१. विश्वाराध्या = सम्पूर्ण जगत्‌के लिये आराधनीया, ६५२. चिदात्मिका = चेतनस्वरूपा, ६५३. देवाराध्या = देवताओंकी आराध्य देवी, ६५४. पराराध्या = परम आराध्य देवी, ६५५. ब्रह्माराध्या = ब्रह्माजीके द्वारा उपास्य, ६५६. परात्मिका = परमात्मस्वरूपा।

६५७. शिवाराध्या = भगवान् शिवके लिये आराध्य, ६५८. प्रेमसाध्या = प्रेमसे प्राप्त होने योग्य, ६५९. भक्ताराध्या = भक्तोंकी उपास्य देवी, ६६०. रसात्मिका = रसस्वरूपा, ६६१. कृष्णप्राणार्पिणी = श्रीकृष्णको जीवन देनेवाली, ६६२. भामा = मानिनी, ६६३. शुद्धप्रेमविलासिनी = विशुद्ध प्रेमसे सुशोभित होनेवाली।

६६४. कृष्णाराध्या = श्रीकृष्णकी आराध्य देवी, ६६५. भक्तिसाध्या = अनन्य भक्तिसे प्राप्त होनेवाली, ६६६. भक्तवृन्दनिषेविता = भक्त-समुदायसे सेविता, ६६७. विश्वाधारा = सम्पूर्ण जगत्‌को आश्रय देनेवाली, ६६८. कृपाधारा = कृपाकी आधारभूमि, ६६९. जीवाधारा = सम्पूर्ण जीवोंको आश्रय देनेवाली, ६७०. अतिनायिका = सम्पूर्ण नायिकाओंसे उत्कृष्ट।

६७१. शुद्धप्रेममयी = विशुद्ध अनुरागस्वरूपा, ६७२. लज्जा = मूर्तिमती लज्जा, ६७३. नित्यसिद्धा-