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संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished770 पृष्ठ

पूर्वभाग-तृतीय पाद ५११

  • पूर्वभाग-तृतीय पाद * ५११

४४७. वीरायुधहरः=वीरोंके अस्त्र-शस्त्र हर लेनेवाले, ४४८. कालः=कालस्वरूप, ४४९. कालिकेशः=कालिकाके स्वामी, ४५०. महाबलः=महाशक्तिसम्पन्न, ४५१. बर्बरीकशिरोहारी=बर्बरीकका सिर काटनेवाले, ४५२. बर्बरीकशिरप्रदः=बर्बरीकका सिर देनेवाले।

४५३. धर्मपुत्रजयी=धर्मपुत्र युधिष्ठिरको जय दिलानेवाले, ४५४.शूरदुर्योधनमदान्तकः=शूरवीर दुर्योधनके मदका नाश करनेवाले, ४५५.गोपिकाप्रीतिनिर्वन्धनित्यक्रीडः=गोपाङ्गनाओंके प्रेमपूर्ण आग्रहसे वृन्दावनमें नित्य लीला करनेवाले, ४५६. व्रजेश्वरः=व्रजके स्वामी।

४५७. राधाकुण्डरतिः= राधाकुण्डमें खेल करनेवाले, ४५८. धन्यः=धन्यवादके योग्य, ४५९. सदान्दोलसमाश्रितः=सदा झूलेपर झूलनेवाले, ४६०. सदामधुवनानन्दी=सदा मधुवनमें आनन्द लेनेवाले, ४६१. सदावृन्दावनप्रियः= वृन्दावनके शाश्वत प्रेमी।

४६२. अशोकवनसन्नद्धः=अशोकवनमें लीलाके लिये सदा प्रस्तुत, ४६३. सदातिलकसङ्गतः=सदैव तिलक लगानेवाले, ४६४. सदागोवर्धनरतिः=गिरिराज गोवर्धनपर सदा क्रीडा करनेवाले, ४६५. सदागोकुलवल्लभः=सदैव गोकुल ग्राम एवं गो-समुदायके प्रिय।

४६६. भाण्डीरवटसंवासी=भाण्डीर वटके नीचे निवास करनेवाले, ४६७. नित्यं वंशीवटस्थितः= वंशीवटपर सदा स्थित रहनेवाले, ४६८. नन्दग्रामकृतावासः=नन्दगाँवमें निवास करनेवाले, ४६९. वृषभानुगृहप्रियः=वृषभानुजीके गृहको प्रिय माननेवाले।

४७०.गृहीतकामिनीरूपः=मोहिनीका रूप धारण करनेवाले, ४७१. नित्यं रासविलासकृत्=नित्य रासलीला करनेवाले, ४७२. वल्लवीजनसङ्गोप्ता=गोपाङ्गनाओंके रक्षक, ४७३. वल्लवीजनवल्लभः=गोपीजनोंके प्रियतम।

४७४. देवशर्मकृपाकर्ता=देवशर्मापर कृपा करनेवाले, ४७५. कल्पपादपसंस्थितः=कल्पवृक्षके नीचे रहनेवाले, ४७६. शिलानुगन्धनिलयः=शिलामय सुगन्धित भवनमें निवास करनेवाले, ४७७. पादचारी=पैदल चलनेवाले, ४७८. घनच्छविः=मेघके समान श्यामकान्तिवाले।

४७९. अतसीकुसुमप्रख्यः=तीसीके फूलके-से वर्णवाले, ४८०. सदा लक्ष्मीकृपाकरः=लक्ष्मीजीपर सदा कृपा करनेवाले, ४८१. त्रिपुरारिप्रियकरः= महादेवजीका प्रिय करनेवाले, ४८२. उग्रधन्वा=भयङ्कर धनुषवाले, ४८३. अपराजितः=किसीसे भी परास्त न होनेवाले।

४८४.षड्धुरध्वंसकर्ता=षड्धुरका नाश करनेवाले, ४८५. निकुम्भप्राणहारकः= निकुम्भके प्राणोंको हरनेवाले, ४८६. वज्रनाभपुरध्वंसी= वज्रनाभपुरका ध्वंस करनेवाले, ४८७. पौण्ड्रकप्राणहारकः=पौण्ड्रकके प्राणोंका अन्त करनेवाले।

४८८. बहुलाश्वप्रीतिकर्ता=मिथिलाके राजा बहुलाश्वपर प्रेम करनेवाले, ४८९.द्विजवर्यप्रियङ्करः=श्रेष्ठ ब्राह्मण भक्तशिरोमणि श्रुतदेवका प्रिय करनेवाले, ४९०. शिवसंकटहारी= भगवान् शिवका संकट टालनेवाले, ४९१. वृकासुरविनाशनः= वृकासुरका नाश करनेवाले।

४९२. भृगुसत्कारकारी=भृगुजीका सत्कार करनेवाले, ४९३. शिवसात्त्विकताप्रदः=भगवान् शिवको सात्त्विकता देनेवाले, ४९४.गोकर्णपूजकः=गोकर्णकी पूजा करनेवाले, ४९५. साम्बकुष्ठविध्वंस-कारणः=साम्बकी कोढ़का नाश करनेवाले।

४९६.वेदस्तुतः=वेदोंके द्वारा स्तुत, ४९७. वेदवेत्ताः= वेदज्ञ, ४९८. यदुवंशाविवर्धनः=यदुकुलको बढ़ानेवाले, ४९९. यदुवंशविनाशी=यदुकुलका संहार करनेवाले, ५००. उद्धवोद्धारकारकः=उद्धवका उद्धार करनेवाले।

५१२ | * संक्षिप्त नारदपुराण *

५०१. राधा=श्रीकृष्णकी आराध्या देवी, उन्हींकी आह्लादिनी शक्ति, ५०२. राधिका=श्रीकृष्णकी आराधना करनेवाली वृषभानुपुत्री, ५०३. आनन्दा=आनन्दस्वरूपा, ५०४. वृषभानुजा=वृषभानुगोपकी कन्या, ५०५. वृन्दावनेश्वरी=वृन्दावनकी स्वामिनी, ५०६. पुण्या=पुण्यमयी, ५०७. कृष्णमानसहारिणी= श्रीकृष्णका चित्त चुरानेवाली।

५०८. प्रगल्भा=प्रतिभा, साहस, निर्भयता और उदार बुद्धिसे सम्पन्न, ५०९. चतुरा=चतुराईसे युक्त, ५१०. कामा=प्रेमस्वरूपा, ५११. कामिनी=एकमात्र श्रीकृष्णको चाहनेवाली, ५१२. हरिमोहिनी=श्रीकृष्णको मोहित करनेवाली, ५१३. ललिता=मनोहर सौन्दर्यसे सुशोभित, ५१४. मधुरा=माधुर्यभावसे युक्त, ५१५. माध्वी=मधुमयी, ५१६. किशोरी=नित्यकिशोरावस्थासे युक्त, ५१७. कनकप्रभाः=सुवर्णके समान कान्तिवाली।

५१८. जितचन्द्रा=मुखके सौन्दर्यसे चन्द्रमाको भी परास्त करनेवाली, ५१९. जितमृगा=चञ्चल चकित नेत्रोंकी शोभासे मृगको भी मात करनेवाली, ५२०. जितसिंहा=सूक्ष्म कटि-भागकी कमनीयतासे मृगराज सिंहके भी मदको चूर्ण करनेवाली, ५२१. जितद्विपा=मन्द-मन्द गतिसे गजेन्द्रका भी गर्व खर्व करनेवाली, ५२२. जितरम्भा=ऊरुओंकी स्निग्धतासे कदलीको भी तिरस्कृत करनेवाली, ५२३. जितपिका=अपने मधुर कण्ठस्वरसे कोयलको भी तिरस्कृत करनेवाली, ५२४. गोविन्दहृदयोद्भवा=श्रीकृष्णके हृदयसे प्रकट हुई।

५२५. जितबिम्बा=अपने अधरकी अरुणिमासे बिम्बफलको भी तिरस्कृत करनेवाली, ५२६. जितशुका=नुकीली नासिकाकी शोभासे तोतेको भी लजा देनेवाली, ५२७. जितपद्मा=अपने अनिर्वचनीय रूप-लावण्यसे लक्ष्मीको भी लज्जित करनेवाली, ५२८. कुमारिका=नित्य कुमारी, ५२९. श्रीकृष्णाकर्षणा=श्रीकृष्णको अपनी ओर खींचनेवाली, ५३०. देवी=दिव्यस्वरूपा, ५३१. नित्ययुग्मस्वरूपिणी=नित्य युगलरूपा।

५३२. नित्यं विहारिणी=श्यामसुन्दरके साथ नित्य लीला करनेवाली, ५३३. कान्ता=नन्दनन्दनकी प्रियतमा, ५३४. रसिका=प्रेमरसका आस्वादन करनेवाली, ५३५. कृष्णवल्लभा=श्रीकृष्णप्रिया, ५३६. आमोदिनी=श्रीकृष्णको आमोद प्रदान करनेवाली, ५३७. मोदवती=मोदमयी, ५३८. नन्दनन्दनभूषिता=नन्दनन्दन श्रीकृष्णके द्वारा जिनका शृङ्गार किया गया है।

५३९. दिव्याम्बरा=दिव्य वस्त्र धारण करनेवाली, ५४०. दिव्यहारा=दिव्य हार धारण करनेवाली, ५४१. मुक्तामणिविभूषिता=दिव्य मुक्तामणियोंसे विभूषित, ५४२. कुञ्जप्रिया=वृन्दावनके कुञ्जोंसे प्यार करनेवाली, ५४३. कुञ्जवासा=कुञ्जमें निवास करनेवाली, ५४४. कुञ्जनायकनायिका=कुञ्जनायक श्रीकृष्णकी नायिका।

५४५. चारुरूपा=मनोहर रूपवाली, ५४६. चारुवक्त्रा=परम सुन्दर मुखवाली, ५४७. चारुहेमाङ्गदा=सुन्दर सुवर्णके भुजबंद धारण करनेवाली, ५४८. शुभा=शुभस्वरूपा, ५४९. श्रीकृष्णवेणुसङ्गीता=श्रीकृष्णद्वारा मुरलीमें जिनके नाम और यशका गान किया जाता है, ५५०. मुरलीहारिणी=विनोदके लिये श्रीकृष्णकी मुरलीका हरण करनेवाली, ५५१. शिवा=कल्याणस्वरूप।

५५२. भद्रा=मङ्गलमयी, ५५३. भगवती=षड्विध ऐश्वर्यसे सम्पन्न, ५५४. शान्ता=शान्तिमयी, ५५५. कुमुदा=पृथ्वीपर आनन्दोल्लास वितीर्ण करनेवाली, ५५६. सुन्दरी=अनन्त सौन्दर्यकी निधि, ५५७. प्रिया=सखियों तथा श्यामसुन्दरको अत्यन्त