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कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished2,136 पृष्ठ

मंत्रि आदिका राजाको महलमें न देखकर पश्चात्ताप और शोक करके भयसे नगर छोड़कर भाग जाना

बोधसागर

( १५ )

छन्द-गये राजा लोक कहैं तजिया सब मान गुमान हो ॥
इमि हंस धर्मनि जो मिले तुम देहु ताको पान हो ॥
कहै कबीर जो शब्द मानै सकल तजि नामे गहै ॥
अपवर्ग निश्चय ताहि कहैं नहि पला पकडत काल है ॥
सोरठा-जो हंसा इमि होय, शब्द सार तासों कहो ॥
काग चाल तिन खोय, हंस चाल गहि लोक लो ॥

इति श्रीप्रबंधभोपालबोध समाप्त

इति श्रीबोधसागरे कबीरधर्मदाससम्वादे भोपालबोधवर्णनो
नाम चतुर्थस्तरंगः


इति

श्रीबोधसागरान्तर्गत
ग्रन्थभोपालबोध

समाप्त

भारतपथिक कबीरपंथी-

स्वामी श्रीगुगलानन्दद्वारा संशोधित

श्री-जगजीवनबोध

मुद्रक एवं प्रकाशकः

खेमराज श्रीकृष्णदासः,

अध्यक्ष : श्रीवेंकटेश्वर प्रेस,

खेमराज श्रीकृष्णदास मार्गः, बम्बई-४०० ००४

सर्वज्ञः सर्वशक्तिः

सर्वज्ञः सर्वशक्तिः

सर्वज्ञः सर्वशक्तिः

सर्वज्ञः सर्वशक्तिः

सर्वज्ञः सर्वशक्तिः

सर्वज्ञः सर्वशक्तिः

सर्वज्ञः सर्वशक्तिः

सत्यनाम

श्री कबीर साहिब

श्रीगणेशाय नमः

A faint, stylized illustration of Lord Ganesha seated on a lotus. He is depicted with four arms, holding a small object in his hands. Above him is a traditional umbrella (chhatra). The entire illustration is rendered in a light, monochromatic style, appearing as a watermark or a very faded print.

श्रीगणेशाय नमः