कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
लोभ परिवार
विवेकसागर
( १३ )
क्रोधपरिवार
क्रोध नारि हिंसा असत, ताको सुत अविचार ॥
भूल वधू ताकी कठिन, पोषै सब परिवार ॥
लोभपरिवार
तृष्णा स्त्री लोभ की, ताको सुत है पाप ॥
चिन्ता त्रिय जाके चितै, करै सदा सन्ताप ॥
दम्भपरिवार
दंभ नारि आशा मलिन, ताको सुत पाखण्ड ॥
वधू अविद्या तासु तिय, भरमावे नौ खण्ड ॥
गर्वपरिवार
निन्दा वनिता गर्वकी, जाको अपयश पूत ॥
अपकीरति ताकी वधू, प्रकट निरंकुश धूत ॥
मदपरिवार
नारी मदकी ईषणा, जाके सुवन विरोध ॥
सा परधां ताकी, वधू, मेटै उरको बोध ॥
अधमपरिवार
अश्रद्धा नारि अधर्मकी, सुत असत्य बलवान ॥
विषय वधू आसक्ति पुनि, मेटै सुक्ति निधान ॥
आठ पुत्र कुटुम्ब यह, कहो भित्र विस्तार ॥
सुता प्रिया प्रवृत्ति की, बणीं तेहि परिवार ॥
जो अदया भगवान की, ताते भयो अज्ञान ॥
दीनी ताहि विवाहि सो, मोह हर्ष बलवान ॥
मिलि अज्ञान वासना, तिनते बहु संतान ॥
जेते लिखनेमो परै, तेते करौं बखान ॥
प्रथमै सुत संशय भयो, लै विशेष बहु भाव ॥
१ स्पर्धा ।