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कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished2,136 पृष्ठ

चन्दन साहूकी कथा

अनुरागसागर

( १०७ )

कहै नारि कृपा प्रभु कीन्हा । सूर्य व्रत करफल यह दीन्हा॥
बहुत दिवसलग तहाँ रहाये । नारि पुरुष मिल सेवा लाये॥
रहे दरिद्रते दुखी अपारा । हम मनमहँ असकीन विचारा॥
प्रथमहि दरिद्रता इनकर टारों। पुनिभक्तिमुक्तिकरवचनउचारों॥
जब हम पलना झटक झकोरा । मिलत सुवर्ण ताहि इकतोरा॥
नितप्रति सोन मिलै इक तोला । ताते भये वह सुखी अमोला॥
पुनि हम सत्य शब्द गोहराई । बहुप्रकारसे उनहि समुझाई॥
ता हृदये नहिं शब्द समायी । बालक ज्ञान प्रतीत न आई॥
ताहि देह चीन्हेसि नहिं मोहीं । भयोगुप्त तहँ तन तजि वोहीं॥

सुपच सुदर्शनके पिता माताके दूसरे जन्ममें चन्दसाहु
और ऊदाकी कथा

नारि द्विज दोई तन त्यागा । दरश प्रभाव मनुजतनु जागा॥
पुनि दोनों भये अंशु मिलाऊ । रहहि नगर चन्द वारे नाऊ॥
ऊदा नाम नारी कहँ भयऊ । पुरुष नाम चन्दन धरि गयऊ॥
परसोतमते हम चलि आये । तब चन्दवारा जाइ पगटाये॥
बालक रूप कीन्ह तेहि ठामा । कीन्हेउताल माहि विश्रामा॥
कमल पत्र पर आसन लाई । आठ पहर हम तहाँ रहाई॥
पीछे ऊदा अस्नानहि आयी । सुन्दर बालक देखि लुभाई॥
दरश दियोदेहि शिशुतनधारी । लेगई बालक निज घर नारी॥
ले बालक गृह अपने आई । चन्दन साहु अस कहा सुनाई॥

चन्दनसाहु वचन

कहु नारी बालक कहँ पायी । कौने विधिते इहँवा लायी ॥
ऊदावचन

कह ऊदा जल बालक पावा । सुन्दर देखि मोर मन भावा॥
चन्दनसाहुवचन

कह चन्दनते मूरख नारी । वेगि जाहु दै बालक डारी ॥
जाति कुटुम्बहँसिहँ सब लोगा । हँसत लोग उपजे तन सोगा॥