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कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

by कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished2,136 pages

ग्रन्भारम्भ मङ्गलाचरण

Page 131Permalink

अनुरागसागर प्रारंभ

सत्यसुकृत, आदिअदली, अजर; अचिन्त पुरुष, सुनीन्द्र,
करुणामयकवीर सुरतियोगसन्तायन, धनीधर्मदास,
च्रामणिनाम, सुदर्शन नाम, कुलपति नाम प्रमोध,
गुरबालापीर, केवल नाम, अमोलनाम, सुरति,
सनेही नाम, हक्कनाम, पाकनाम; प्रगट नाम,
धीरजनाम, उग्रनाम, साहबकी दया,
वंश्यालीसकी दया ।

★

मंगलाचरण । छन्द हरिगीतिका

प्रथमवन्दौसतिगुरुचरणजिन,अगमगम्यलखाइया ॥
गुरुज्ञान दीपप्रकाशकरि पट,खोलिदरशदिखाइया ॥
जिहि कारणे सिद्धचापचेसो, गुरु कृपाते पाइया ॥
अकह मूरति अमिय सूरति, ताहि जाय समाइया ॥

गुरुदेव पूर्ण है

सोरठा-कृपासिंधु गुरुदेव, दीनदयालु कृपालु है ॥
विरलेपावहि भेव, जिन चीन्हा परगट तहाँ ॥

अधिकारी कौन है ? छन्द

कोई बूझई जन जौहरी जो, शब्दकी पारख करै ॥
चितलाय सुनहि सिखावनो, हितजाके हिरदय धरै ॥