चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)
Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation
महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
इस ग्रन्थ के बारे में
चरकसंहिता आयुर्वेद की कायचिकित्सा का मूल ग्रन्थ है। परम्परा के अनुसार आचार्य पुनर्वसु आत्रेय के उपदेशों को उनके शिष्य अग्निवेश ने तन्त्र-रूप में लिखा, चरक ने उसका प्रतिसंस्कार किया और बाद में कश्मीर के दृढ़बल ने इसके अधूरे भाग पूरे किए। आठ स्थानों और 120 अध्यायों वाला यह ग्रन्थ सुश्रुतसंहिता और अष्टाङ्गहृदय के साथ 'बृहत्त्रयी' में गिना जाता है।
यह खण्ड सूत्र, निदान और विमान स्थान का है। इसमें दीर्घंजीवितीय, अपामार्गतण्डुलीय, मात्राशितीय और महाचतुष्पाद जैसे अध्याय; मदनफल आदि से बनने वाले विरेचन-योगों की गणना; दीपनीय आदि पचास महाकषाय; कृतान्नवर्ग और आहारयोनिवर्ग; विद्रधि और पिडका; तथा पाँच प्रकार के उन्माद के निदान जैसे विषय आते हैं।
मुखपृष्ठ के अनुसार यह 'महर्षि अग्निवेश प्रणीत, चरक और दृढ़बल से प्रतिसंस्कृत' चरकसंहिता का हिन्दी अनुवाद सहित प्रथम खण्ड है। अनुवादक गुरुकुल विश्वविद्यालय के कविराज श्री अत्रिदेव गुप्त, विद्यालंकार, भिषग्रत्न हैं और प्रकाशक भार्गव पुस्तकालय, गायघाट, बनारस। 'दो शब्द' में गंगाधर कविराज की जल्पकल्पतरु और योगीन्द्रनाथ सेन की चरकोपस्कार टीकाओं का उल्लेख है। यह द्वितीय संस्करण 639 पृष्ठों का है।
खण्ड एक
H
615.536
चरक T T <s>14071</s>
खण्ड एक
वर्ग न — T
Clas ।
लेखक अग्निवेश
Author
पुस्तक चरक संहिता ।
Title
H <s>14071</s>
615.536
LIBRARY
चरक LAL BAHADUR SHASTRI
भाग-1
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MUSSOORIE
Accession No 125794
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