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चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

अ० ३० ] सूत्रस्थानम् ४०७

अ० ३० ] सूत्रस्थानम् ४०७
अर्थे दशमहामूले सर्वमेतत्प्रकाशितम् ।
संग्रहश्चायमध्यायस्तन्त्रस्यास्यैव केवलः ॥ ८७ ॥
यथा सुमनसां सूत्रं संग्रहार्थं विधीयते ।
संग्रहार्थं तथाऽर्थानामृषिणा संग्रहः कृतः ॥ ८८ ॥
हृदय से सम्बन्धित दस धमनियां, 'महामूला' इस संज्ञा होने के कारण,
आयुवर्द्धक, छः उत्तम उपाय, आयुर्वेद का स्वरूप, सात व आठ प्रश्न विशेष,
वाक्यांश, अर्थौघ, निर्णय और अधूरे वैद्य, इतने विषयों का निरूपण इस
'अर्थे दशमहामूलीय' अध्याय में किया है । इस ग्रन्थ में वर्णित सब विषयों का
संक्षिप्त निरूपण भी इस अध्याय में किया है । जिस प्रकार कि फूलों की माला
को गूंथने के लिये सूत्र की आवश्यकता होती है उसी प्रकार सब विषयों का
संग्रह करने के लिये ऋषि ने यह सूत्र (सूत्रस्थान) बनाया है ॥ ८५-८८ ॥
इत्यग्निवेशकृते तन्त्रे चरकप्रतिसंस्कृते सूत्रस्थाने अर्थे दशमहामूलीयो
नाम त्रिंशत्तमोऽध्यायः ॥ ३० ॥
अग्निवेशकृते तन्त्रे चरकप्रतिसंस्कृते इयताऽवधिना सर्वं सूत्रस्थानं समाप्यते ॥
इति सूत्रस्थानं समाप्तम् ।