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श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)

श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा

DevanagariHindipublished711 पृष्ठ

२२ सितम्बर, १८८३ परिच्छेद ५३ ३०९

२२ सितम्बर, १८८३ परिच्छेद ५३ ३०९

बाद संसार में रहने से मनुष्य 'जनक राजा' बन सकता है। नहीं तो कैसे होगा?

"देखो न, कार्तिक, गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती सभी विद्यमान हैं, परन्तु शिव कभी समाधिस्थ, तो कभी 'राम राम' कहते हुए नृत्य कर रहे हैं।"

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