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पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)
Panchadashi by Swami Vidyaranya
स्वामी विद्यारण्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished726 पृष्ठ
कि अन्त में जाकर तो 'योग' और 'विवेक' एक ही हो जाते हैं।
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है, वह तो एक प्रकार से 'योगी' ही है, ऐसा यदि कोई समझे
तो वह भी ठीक ही समझ रहा है। पहले ही कहा जा चुका है
कि अन्त में जाकर तो 'योग' और 'विवेक' एक ही हो जाते हैं।
यों मन्दाधिकारियों पर अनुग्रह करने के लिए आत्मानन्द का
विवेक इस प्रकरण में किया है।