बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
महर्षि बौधायन द्वारा
स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)
प्रारंभिक पृष्ठ व विषय-सूची
श्रीमहर्षिबौधायनप्रणीतं
बौधायन-धर्मसूत्रम्
डॉ. उमेशचन्द्र पाण्डेय
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॥ श्रीः ॥
CHAUKHAMBHA PRAKASHAN
Post Box No. 1150
K. 37 / 116, Gopal Mandir Lane, Golghar (Near Maidagin)
Varanasi-221001 (India)
Telephone : 0542-2335929, 6452172
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चौखम्भा प्रकाशन
पोस्ट बाक्स नं. ११५०
के. ३७/११६, गोपाल मन्दिर लेन, गोलघर (समीप मैदागिन)
वाराणसी - २२१००१ (भारत)
टेलीफोन : ०५४२-२३३५९२९, ६४५२१७२
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© चौखम्भा प्रकाशन, वाराणसी
इस ग्रन्थ का परिष्कृत तथा परिवर्धित मूल-पाठ एवं टीका, परिशिष्ट आदि के सर्वाधिकार प्रकाशक के अधीन हैं।
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॥ श्रीः ॥
काशी संस्कृत ग्रन्थमाला
१०४
श्रीमहर्षिबौधायनप्रणीतं
बौधायन-धर्मसूत्रम्
श्रीगोविन्दस्वामिप्रणीतविवरणसमेत-
सटिप्पण-हिन्दीव्याख्योपेतम्
टिप्पणीकारः
महामहोपाध्यायः अ० चिन्नस्वामिशास्त्री
हिन्दीव्याख्याकारः
डॉ० उमेशचन्द्र पाण्डेय
एम०ए०, पी-एच०डी०
प्राध्यापक, संस्कृत विभाग, गोरखपुर विश्वविद्यालय
चौखम्भा प्रकाशन
पोस्ट बाक्स नं. ११५०
के. ३७/११६, गोपाल मन्दिर लेन
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प्रकाशक
चौखम्भा प्रकाशन
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संस्करण : पुर्नमुद्रित, वि० सं० २०६५
मूल्य : रु. २५०-००
पारस्करगृह्यसूत्रम् (कर्मकांड)। प्रथम दो काण्ड पर हरिहर भाष्य तथा गदाधर भाष्य एवं तृतीय कांड पर हरिहर तथा जयराम भाष्य। गोपाल शास्त्री नेन कृत भूमिका, नोट्स तथा सुधाकर मालवीय कृत हिन्दी व्याख्या (प्रथम कांड), सम्पूर्ण
(का 17)
मुद्रक : मित्तल आफसेट, वाराणसी
THE
KASHI SANSKRIT SERIES
104
BAUDHĀYANA-DHARMASŪTRA
with the ‘Vivaraṇa’ Commentary
By
ŚRĪ GOVINDA SWĀMĪ
And
Critical Notes by
M.M.A. CHINNASWĀMĪ ŚĀŚTRĪ
Edited with
Hindi Translation, Explanatory Notes,
Critical Introduction & Notes
By
Dr. UMEŚA CHANDRA PĀṆḌEYA, M.A., Ph.D.,
Department of Sanskrit & Pali,
University of Gorakhapur
CHAUKHAMBHA PRAKASHAN
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Publisher :
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Edition : Reprint, 2008
धर्मसिन्धुः (धर्मशास्त्र)। काशीनाथ उपाध्याय कृत। वशिष्ठ दत्त मिश्र कृत ‘धर्मदीपिका’ हिन्दी टीका तथा सुदामा मिश्र शास्त्री कृत ‘सुधा’ व्याख्या। सदाशिव शास्त्री मुसलगाँवकर कृत समीक्षात्मक प्रस्तावना। (का. 183)
| Chaukhambha Prakashan<br>Registration No. A-77539 |
|---|
आमुख
चौखम्बा संस्कृत सीरीज आफिस ने 'बौधायनधर्मसूत्र' का म० म० ए० चिन्न-स्वामी शास्त्री द्वारा सटिप्पण सम्पादित प्रथम संस्करण पहले प्रकाशित किया था। यह द्वितीय संस्करण आधुनिक विद्यार्थियों तथा अनुसन्धाताओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर हिन्दी अनुवाद, व्याख्यात्मक टिप्पणियों, विस्तृत आलोचनात्मक भूमिका एवम् अनुक्रमणिकाओं से संवलित कर प्रस्तुत किया गया है। इसके पूर्व मेरे द्वारा सम्पादित 'गौतमधर्मसूत्र' 'आपस्तम्बधर्मसूत्र' 'आपस्तम्बगृह्यसूत्र' तथा 'याज्ञवल्क्यस्मृति' के हिन्दीव्याख्या-सहित संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं और इन संस्करणों ने लोकप्रियता भी अर्जित की है। बौधायनधर्मसूत्र के इस संस्करण में सूत्रों का सरल हिन्दी अनुवाद दिया गया है और प्रायः प्रत्येक स्थल पर टिप्पणी देकर अर्थ को पूर्णतः स्पष्ट कर दिया गया है।
इस ग्रन्थ के प्रकाशन और मुद्रण का श्रेय चौखम्बा संस्कृत सीरीज आफिस तथा चौखम्बा वि०, वाराणसी के कुशल संचालकों को है और विशेषतः मुद्रण के स्तर के लिए उन्हें धन्यवाद देना मेरा कर्त्तव्य है। प्रस्तावना की प्रेसपाण्डुलिपि तथा अनुक्रमणिका के लिए मैं अपनी सहयोगिनी का आभारी हूँ।
धर्मसूत्रों की उपयोगिता आज भी अक्षुण्ण है। परम्परागत धर्म एवम् आचार-विषयक मान्यताओं के अध्ययन तथा युगसापेक्ष व्यवहार से ही आधुनिक सन्त्रास-पूर्ण जीवन में भी सुख और शान्ति के आविर्भाव की आशा की जा सकती है और यदि भारतीय धर्म के अवबोध में मेरी यह कृति स्वल्प भी योग दे सकी, तो अपना परिश्रम सफल मानूँगा।
<br>$$\left.\begin{array}{l}
\text{दीपावली, सं० २०२६} \
\quad\text{गोरखपुर}
\end{array}\right}$$
$$\begin{array}{r}
\text{विनीत—}\quad\quad\quad \
\text{\textbf{उमेशचन्द्र पाण्डेय}}
\end{array}$$
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