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महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
DevanagariSanskritpublished3,237 pages
अध्याय (पृष्ठ 3076)
Page 3076Permalink
चतुर्दशोऽध्यायः
अश्वत्थामाके अस्त्रका निवारण करनेके लिये अर्जुनके द्वारा ब्रह्मास्त्रका प्रयोग एवं वेदव्यासजी और देवर्षि नारदका प्रकट होना
वैशम्पायन उवाच
इङ्गितेनैव दाशार्हस्तमभिप्रायमादितः ।
द्रौणेर्बुद्ध्वा महाबाहुरर्जुनं प्रत्यभाषत ॥ १ ॥
वैशम्पायनजी कहते हैं— राजन्! दशार्हनन्दन महाबाहु भगवान् श्रीकृष्ण अश्वत्थामाकी चेष्टासे ही उसके मनका भाव पहले ही ताड़ गये थे। उन्होंने अर्जुनसे कहा— ॥ १ ॥