महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें॥ श्रीहरिः ॥
विषय-सूची
द्रोणपर्व
अध्याय विषय
(द्रोणाभिषेकपर्व)
१- [भीष्मजीके धराशायी होनेसे कौरवोंका शोक तथा उनके द्वारा कर्णका स्मरण]
२- [कर्णकी रणयात्रा]
३- [भीष्मजीके प्रति कर्णका कथन]
४- [भीष्मजीका कर्णको प्रोत्साहन देकर युद्धके लिये भेजना तथा कर्णके आगमनसे कौरवोंका हर्षोल्लास]
५- [कर्णका दुर्योधनके समक्ष सेनापति-पदके लिये द्रोणाचार्यका नाम प्रस्तावित करना]
६- [दुर्योधनका द्रोणाचार्यसे सेनापति होनेके लिये प्रार्थना करना]
७- [द्रोणाचार्यका सेनापतिके पदपर अभिषेक, कौरव-पाण्डव-सेनाओंका युद्ध और द्रोणका पराक्रम]
८- [द्रोणाचार्यके पराक्रम और वधका संक्षिप्त समाचार]
९- [द्रोणाचार्यकी मृत्युका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका शोक करना]
१०- [राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न]
११- [धृतराष्ट्रका भगवान् श्रीकृष्णकी संक्षिप्त लीलाओंका वर्णन करते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना]
१२- [दुर्योधनका वर माँगना और द्रोणाचार्यका युधिष्ठिरको अर्जुनकी अनुपस्थितिमें जीवित पकड़ लानेकी प्रतिज्ञा करना]
१३- [अर्जुनका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा युद्धमें द्रोणाचार्यका पराक्रम]
१४- [द्रोणका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका द्वन्द्वयुद्ध, रणनदीका वर्णन तथा अभिमन्युकी वीरता]
१५- [शल्यके साथ भीमसेनका युद्ध तथा शल्यकी पराजय]
१६- [वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय]
(संशप्तकवधपर्व)
१७- [सुशर्मा आदि संशप्तकवीरोंकी प्रतिज्ञा तथा अर्जुनका युद्धके लिये उनके निकट जाना]