रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)
Raghuvamsham of Kalidasa Hindi
महाकवि कालिदास द्वारा
स्रोत: Raghuvamsham with Mallinatha Sanjivani & Hindi Commentary by Dr. Shrikrishnamani Tripathi (उद्गम)
इस ग्रन्थ के बारे में
रघुवंश महाकवि कालिदास का उन्नीस सर्गों का महाकाव्य है, जिसमें सूर्यवंश के राजाओं की कथा दिलीप से लेकर अग्निवर्ण तक कही गई है। संस्कृत साहित्य में इसे कालिदास की सबसे परिपक्व काव्य-रचनाओं में गिना जाता है और सदियों से यह संस्कृत शिक्षा का एक मुख्य पाठ्य ग्रन्थ रहा है।
इसके प्रसिद्ध प्रसंगों में दिलीप द्वारा नन्दिनी गाय की सेवा, रघु की दिग्विजय, कौत्स को गुरुदक्षिणा का दान, इन्दुमती का स्वयंवर, इन्दुमती की मृत्यु पर अज का विलाप, दशरथ और फिर राम की पूरी कथा, कुश द्वारा अयोध्या का पुनर्वास और अन्त में भोगविलासी राजा अग्निवर्ण का पतन शामिल हैं।
यह चौखम्बा सुरभारती ग्रन्थमाला का ४०वाँ ग्रन्थ है, जिसका पञ्चम संस्करण १९९४ में प्रकाशित हुआ। इसमें मल्लिनाथ की प्रसिद्ध संस्कृत टीका 'सञ्जीविनी' के साथ डॉ. श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी की 'चन्द्रकला' हिन्दी व्याख्या है। डॉ. त्रिपाठी सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में पुराणेतिहास, संस्कृति और भूगोल विभाग के अध्यक्ष रहे थे। मूल श्लोक, मल्लिनाथ का अन्वय-आधारित विवेचन और सरल हिन्दी अर्थ एक साथ मिलने के कारण ७३५ पृष्ठों का यह संस्करण विद्यार्थियों और काव्य-प्रेमियों, दोनों के लिए उपयोगी है।
६७२ रघुवंशमहाकाव्ये
<div align="center">( देवानीकः )
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( पुत्री ) अहीनगुः
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पारियात्रः
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शीलः
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उन्नाभः
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शङ्खणः
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व्युषिताश्वः
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विश्वसहः
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हिरण्यनाभः
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कौशल्यः (सोमसुतः)
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पुत्रः
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पौष्यः
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ध्रुवसन्धिः
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सुदर्शनः
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अग्निवर्णः
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[मुद्रा (Seal/Stamp):]
... संस्कृत महाविद्यालय जय...
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