सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संग्रह पर लौटें

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

( २७० ) माधवनिदान ।

( २७० ) माधवनिदान ।
वातविस्फोटकके लक्षण ।
शिरोरुक्छूलभूयिष्ठं ज्वरतृट्पर्वभेदनम् ।
सुकृष्णवर्णता चेति वातविस्फोटलक्षणम् ॥ ४ ॥
मस्तकमें पीडा, शूल, देहमें पीडा, ज्वर, प्यास, संधियोंमें पीडा, फोडोंका वर्ण
काला होय, ये वातविस्फोटकके लक्षण हैं ॥
पित्तविस्फोटकके लक्षण ।
ज्वरदाहरुजास्रावपाकतृष्णाभिरन्वितम् ।
पीतलोहितवर्णं च पित्तविस्फोटलक्षणम् ॥ ५ ॥
ज्वर, दाह, पीडा, स्राव, फोडोंका पकना, प्यास, देह पीला हो अथवा लाल
होय ये पित्तविस्फोटकके लक्षण हैं ॥
कफविस्फोटकके लक्षण ।
छर्द्यरोचकजाड्यानि कंडूकाठिन्यपांडुताः ।
अवेदनश्चिरात्पाकी स विस्फोटः कफात्मकः ॥ ६ ॥
वमन, अरुचि, जडता तथा फोडा खुजलीयुक्त हो, कठिन, पीले और उनमें
पीडा होय नहीं और वे बहुत कालमें पकें, यह विस्फोट कफका जानना ॥
कफपित्तात्मकविस्फोटकके लक्षण ।
कण्डूर्दाहो ज्वरश्छर्दिरेतैस्तु कफपैत्तिकः ।
खुजली, दाह, ज्वर और वमन इन लक्षणोंसे कफपित्तजन्य विस्फोट जानना ॥
वातपित्तात्मकके लक्षण ।
वातपित्तकृतो यस्तु कुरुते तीव्रवेदनाम् ॥ ७ ॥
वातपित्तके विस्फोटकमें तीव्र पीडा होती है ॥
कफवातात्मकके लक्षण ।
कण्डूस्तैमित्यगुरुभिर्जानीयात्कफवातिकम् ।
खुजली, गीलापना, भारीपना इन लक्षणोंसे कफवातका विस्फोट जानना ॥
सन्निपातविस्फोटकके लक्षण ।
मध्ये निम्नोन्नतोऽन्ते च कठिनोऽल्पप्रपाकवान् ॥ ८ ॥
दाहरागतृषामोहेच्छर्दिमूर्च्छारुजो ज्वरः ।
प्रलापो वमथुस्तंद्रा सोऽसाध्यश्च त्रिदोषजः ॥ ९ ॥
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA

भाषाटीकासमेत । (२७१)
जो फोडा बीचमें नीचे होय और ओरपासके ऊंचा होय, कठिन कुछ पका
होय है तथा जिसके योगसे दाह, अंगमें लाली, प्यास, मोह, वमन, मूर्च्छा, पीडा,
ज्वर, प्रलाप, कम्प, तन्द्रा ये लक्षण होते हैं वह सन्निपातका विस्फोटक असाध्य है ॥
रक्तजविस्फोटकके लक्षण ।
रक्ता रक्तसमुत्थाना गुञ्जाफलनिभास्तथा ।
वेदितव्यास्तु रक्तेन पैत्तिकेन च हेतुना ॥
न ते सिद्धिं समायांति सिद्धैर्योगशतैरपि ॥ १० ॥
रुधिरसे प्रगट भया विस्फोटक तांबेके रंगका, गुंजा (चिरमिटी) के समान लाल,
वह रुधिरके दुष्ट होनेसे अथवा पित्तके दुष्ट होनेसे होय है, इसमें सैकडों अनुभव-
कारी औषधके करनेसे साध्य नहीं होय है ॥
साध्यासाध्यविचार ।
एकदोषोत्थितः साध्यः कृच्छ्रसाध्यो द्विदोषजः ।
सर्वरूपान्वितो घोरस्त्वसाध्यो भूर्युपद्रवः ॥ ११ ॥
एक दोषसे प्रगट भया जो विस्फोटक वह साध्य है, द्विदोषका कष्टसाध्य है और
सर्वलक्षणयुक्त होय सो भयंकर तथा जिसमें उपद्रव बहुत होयँ वह विस्फोटक
असाध्य है ॥
विस्फोटकके उपद्रव ।
हिक्का श्वासोऽरुचिस्तृष्णा अङ्गसादो हृदि व्यथा ।
विसर्पज्वरहृल्लासा विस्फोतानामुपद्रवाः ॥ १२ ॥
हिचकी, श्वास, अरुचि, प्यास, अंगग्लानि, हृदयमें पीडा, विसर्परोग, ज्वर,वमन
ये विस्फोटकके उपद्रव जानने ॥
इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थबोधिनीमाथुरीभाषाटीकायां
विस्फोटकनिदानं समाप्तम् ॥
अथ मसूरिकानिदानम् ।
कारण और सम्प्राप्ति ।
कट्वम्ललवणक्षारविरुद्धायशनाशनैः ।
दुष्टनिष्पावशाकाद्यैः प्रदुष्टपवनोदकैः ॥ १ ॥
क्रूरग्रहेक्षणाद्वापि देहे दोषाः समुद्धताः ।