माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 288, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ें( २७० ) माधवनिदान ।
वातविस्फोटकके लक्षण ।
शिरोरुक्छूलभूयिष्ठं ज्वरतृट्पर्वभेदनम् ।
सुकृष्णवर्णता चेति वातविस्फोटलक्षणम् ॥ ४ ॥
मस्तकमें पीडा, शूल, देहमें पीडा, ज्वर, प्यास, संधियोंमें पीडा, फोडोंका वर्ण
काला होय, ये वातविस्फोटकके लक्षण हैं ॥
पित्तविस्फोटकके लक्षण ।
ज्वरदाहरुजास्रावपाकतृष्णाभिरन्वितम् ।
पीतलोहितवर्णं च पित्तविस्फोटलक्षणम् ॥ ५ ॥
ज्वर, दाह, पीडा, स्राव, फोडोंका पकना, प्यास, देह पीला हो अथवा लाल
होय ये पित्तविस्फोटकके लक्षण हैं ॥
कफविस्फोटकके लक्षण ।
छर्द्यरोचकजाड्यानि कंडूकाठिन्यपांडुताः ।
अवेदनश्चिरात्पाकी स विस्फोटः कफात्मकः ॥ ६ ॥
वमन, अरुचि, जडता तथा फोडा खुजलीयुक्त हो, कठिन, पीले और उनमें
पीडा होय नहीं और वे बहुत कालमें पकें, यह विस्फोट कफका जानना ॥
कफपित्तात्मकविस्फोटकके लक्षण ।
कण्डूर्दाहो ज्वरश्छर्दिरेतैस्तु कफपैत्तिकः ।
खुजली, दाह, ज्वर और वमन इन लक्षणोंसे कफपित्तजन्य विस्फोट जानना ॥
वातपित्तात्मकके लक्षण ।
वातपित्तकृतो यस्तु कुरुते तीव्रवेदनाम् ॥ ७ ॥
वातपित्तके विस्फोटकमें तीव्र पीडा होती है ॥
कफवातात्मकके लक्षण ।
कण्डूस्तैमित्यगुरुभिर्जानीयात्कफवातिकम् ।
खुजली, गीलापना, भारीपना इन लक्षणोंसे कफवातका विस्फोट जानना ॥
सन्निपातविस्फोटकके लक्षण ।
मध्ये निम्नोन्नतोऽन्ते च कठिनोऽल्पप्रपाकवान् ॥ ८ ॥
दाहरागतृषामोहेच्छर्दिमूर्च्छारुजो ज्वरः ।
प्रलापो वमथुस्तंद्रा सोऽसाध्यश्च त्रिदोषजः ॥ ९ ॥
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