माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
इस ग्रन्थ के बारे में
माधवनिदान, जिसका दूसरा नाम 'रुग्विनिश्चय' है, आचार्य माधवकर का आयुर्वेदीय रोग-निदान पर ग्रन्थ है। चरक, सुश्रुत और वाग्भट की संहिताओं में बिखरे निदान-विषयक अंशों को उन्होंने एक जगह व्यवस्थित किया, और तब से यह ग्रन्थ आयुर्वेद में रोगों की पहचान का मानक ग्रन्थ बन गया। प्रत्येक रोग का विचार निदान-पञ्चक के क्रम से होता है: निदान (कारण), पूर्वरूप, रूप (लक्षण), उपशय और सम्प्राप्ति।
यह स्कैन खेमराज श्रीकृष्णदास, बम्बई का जुलाई २००७ (संवत् २०६४) का संस्करण है, जिसमें मूल श्लोकों के साथ श्रीकृष्णलाल के पुत्र दत्तराम की हिन्दी टीका दी गई है। प्रस्तावना में आयुर्वेद में निदान, रोगी, वैद्य और औषध के महत्त्व की चर्चा है।
विस्तृत विषयानुक्रमणिका से ग्रन्थ के क्षेत्र का अनुमान होता है। इसमें ज्वर और उसके धातुगत भेद (जैसे मांसगत और मेदोगत ज्वर), सन्निपात, अतिसार, ग्रहणी, श्वास के भेद (छिन्न, तमक, प्रतमक), मदात्यय अर्थात् मद्यपान के विकार, अपस्मार, शुक्रदोष और क्लीबता जैसे अनेक रोगों के लक्षण हैं, और जगह-जगह सुश्रुत आदि से उद्धरण दिए गए हैं।
( ३८४ ) माधवनिदानका परिशिष्ट ।
( ३८४ ) माधवनिदानका परिशिष्ट ।
अर्श ( बवासीर ), छर्दी ( रद्द ), मूर्च्छाय ( मूर्च्छा भ्रम तन्द्रा निद्रा संन्यास
पानात्यय मदात्यय ), अपस्मार ( मृगी ), अनिलामय ( वातव्याधि ), आनाह
( अफरा ), गुल्म ( गोलेका रोग ), अश्मरी ( पथरी ), वृद्धि ( अंडवृद्धि ), ग्रन्थि
( गांठ ), त्वगामय ( कोढरोग ), आलस्य ( मुखरोग ), ग्रह ( पूतनादिबालग्रह ) ये
हमने कठिन शब्दोंके अर्थ लिख दिये हैं, रोगानुक्रमणिका लिखनेका यह प्रयोजन
है कि इतने रोम इस ग्रन्थमें कहे हैं इससे विशेष रोग प्रक्षिप्त जानने ॥
टीकाकर्त्ताकी वंशावली ।
श्रीमन्माथुरमण्डले द्विजकुले श्रीमाथुराणां कुले
घासीराम इति प्रथामधिगतो जातः सतां मोदकृत् ।
श्रीचन्द्रः किल रामचन्द्रविबुधो जातो हरिश्चन्द्रकः
पुत्रास्ते त्रितयीव धर्मनिपुणा सर्वे नृपैः पूजिताः ॥ १ ॥
श्रीमन् माथुरमण्डल द्विजकुल श्रीमाथुर ( चौबे ) नके कुलमें श्रीघासीराम इस
नामसे प्रसिद्ध सज्जन मनुष्योंको आनन्दकर्त्ता प्रगट भये उनके श्रीचन्द्र और परम
बुद्धिमान् रामचन्द्र और हरिश्चन्द्र ये तीन पुत्र वेदत्रयी ( ऋक् साम यजुष ) के
समान और सर्व राजमान्य प्रगट भये ॥
तेषां हरिश्चन्द्रसमानकीर्तिर्जातो हरिश्चन्द्रगुणाभिरामः ।
बभूव तस्मात्किल कृष्णलालः संगीतशास्त्रार्थविचारदक्षः ॥ २ ॥
तिन घासीरामके तीन पुत्रोंमें हरिश्चन्द्रके समान कीर्ति जिनकी ऐसे हरिश्चन्द्र भये,
तिनके संगीतशास्त्र (गानविद्या) के अर्थ विचारमें कुशल कन्हैयालाल प्रगट होते भये॥
तस्य पुत्रस्त्वहं जज्ञे दत्तरामो विमूढधीः ।
भाषायां माधवस्यार्थो यथामति मयोरितः ॥ ३ ॥
तिन कन्हैयालालका पुत्र मैं तुच्छ बुद्धिवाला दत्तराम प्रगट हुआ, मैं अपनी
बुद्धिके अनुसार माधवनिदानका अर्थ भाषामें निरूपण किया ॥
समाप्तोऽयं ग्रन्थः ॥
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