गरुड़ पुराण
Garuda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
१२३- महाभारतकी कथा एवं बुद्ध आदि अवतारोंकी कथाका वर्णन
२४२ || संक्षिप्त गरुड़पुराण || [ आचार-
प्रद्युम्न, चारुदेष्ण तथा साम्ब कृष्णके प्रधान पुत्र हैं। प्रद्युम्नकी पत्नी ककुद्मिनीके गर्भसे महापराक्रमशाली अनिरुद्धका जन्म हुआ। अनिरुद्धके सुभद्रा नामक पत्नीके गर्भसे वज्र नामके राजा हुए। उनका पुत्र प्रतिबाहु था। प्रतिबाहुका पुत्र चारु हुआ।
ययाति-पुत्र तुर्वसुके वंशमें वह्नि नामक पुत्रका जन्म हुआ। वह्निसे भर्ग हुआ। भर्गसे भानु, भानुसे करन्धम तथा करन्धमसे मरुत्की उत्पत्ति हुई।
हे रुद्र! अब मुझसे द्रुह्युवंशका वर्णन सुनें—
ययातिपुत्र द्रुह्युका पुत्र सेतु, सेतुका पुत्र आरद्ध था। आरद्धके गान्धार, गान्धारके धर्म, धर्मके घृत, घृतके दुर्गम, दुर्गमके प्रचेता हुए।
अब आप अनुवंशको सुनें—अनुका पुत्र सभानर हुआ। सभानरका कालञ्जय, कालञ्जयका सृञ्जय, सृञ्जयका पुरञ्जय, पुरञ्जयका जनमेजय, जनमेजयका पुत्र महाशाल था। इसी महात्मा महाशालका पुत्र उशीनर माना गया है। उशीनरसे राजा शिवि उत्पन्न हुए। शिविके पुत्र वृषदर्भ हुए। वृषदर्भसे महामनोज और महामनोजसे तितिक्षु और तितिक्षुसे रुषद्रथका जन्म हुआ। रुषद्रथसे हेम तथा हेमसे सुतप हुए। सुतपसे बलि और बलिसे अंग, बंग, कलिंग, आन्ध्र तथा पौण्ड्र नामके पुत्र हुए। अंगसे अनपान, अनपानसे दिविरथ, दिविरथसे धर्मरथ हुआ। धर्मरथसे रोमपाद तथा रोमपादसे चतुरंग, चतुरंगसे पृथुलाक्ष, पृथुलाक्षसे चम्प, चम्पसे हर्यङ्ग, हर्यङ्गसे भद्ररथ नामक पुत्र उत्पन्न हुआ।
भद्ररथका पुत्र बृहत्कर्मा था। उसके बृहद्भानु नामक पुत्र हुआ। बृहद्भानुका पुत्र बृहन्मना और बृहन्मनाका पुत्र जयद्रथ था। जयद्रथसे विजय और विजयसे धृति हुआ। धृतिका पुत्र धृतव्रत था। धृतव्रतसे सत्यधर्मा हुआ। सत्यधर्माका पुत्र अधिरथ था। अधिरथके कर्ण और कर्णके वृषसेन नामक पुत्र हुआ।
हरिने पुनः कहा—हे रुद्र! इसके बाद आप पुरुवंशका वर्णन सुनें।
पुरुका पुत्र जनमेजय, जनमेजयका पुत्र नमस्यु था। नमस्युका अभय तथा अभयका सुद्यु हुआ। सुद्युके बहुगति नामक पुत्रका जन्म हुआ। उसका पुत्र संजाति था। संजातिके वत्सजाति और उसके रौद्राश्व हुआ। रौद्राश्वके ऋतेयु, स्थण्डिलेयु, कक्षेयु, कृतेयु, जलेयु और सन्ततेयु नामक श्रेष्ठ पुत्र हुए।
ऋतेयुके रतिनार नामका पुत्र हुआ। उसका पुत्र प्रतिरथ था। प्रतिरथका मेधातिथि, मेधातिथिका ऐनिल नामक पुत्र माना जाता है। ऐनिलका पुत्र दुष्यन्त था। शकुन्तलाके गर्भसे दुष्यन्तके भरत नामक पुत्र हुआ। भरतसे वितथ, वितथसे मन्यु, मन्युसे नरका जन्म माना गया है। नरके संकृति और संकृतिके गर्ग हुआ। गर्गसे अमन्यु, अमन्युसे शिनि नामक पुत्रकी उत्पत्ति हुई।
मन्युपुत्र महावीरसे उरुक्षय, उरुक्षयसे त्रय्यारुणि, त्रय्यारुणिसे व्यूहक्षत्र, व्यूहक्षत्रसे सुहोत्र, सुहोत्रसे हस्ती, अजमीढ तथा द्विमीढ नामक तीन पुत्र हुए। हस्तीका पुत्र पुरुमीढ और अजमीढका कण्व था। कण्वके मेधातिथि हुए। इन्हींसे काण्वायन नामक गोत्र ब्राह्मणोंके हुए और वे काण्वायन कहलाये।
अजमीढसे बृहदिषु नामक एक अन्य पुत्र भी हुआ था। उस पुत्रके बृहद्धनु हुआ। बृहद्धनुके बृहत्कर्मा तथा बृहत्कर्माके जयद्रथ नामका पुत्र था। जयद्रथसे विश्वजित् और विश्वजित्से सेनजित्, सेनजित्से रुचिराश्व, रुचिराश्वसे पृथुसेन, पृथुसेनसे पार तथा पारसे द्वीप और नृप हुए। नृपका पुत्र सुमर हुआ। पृथुसेनका एक अन्य पुत्र था, जिसका नाम सुकृति कहा गया है। सुकृतिके विभ्राज और विभ्राजके अश्वह नामक पुत्र हुआ। कृतिके गर्भसे उत्पन्न उस अश्वहके ब्रह्मदत्त नामका पुत्र था। उस पुत्रसे विष्वक्सेनने जन्म लिया।
काण्ड ]
चन्द्रवंशवर्णन
२४३
द्विमीढके यवीनर, यवीनरके धृतिमान्, धृतिमान्के सत्यधृति नामका पुत्र हुआ। उसका पुत्र दृढनेमि था। दृढनेमिसे सुपार्श्व और सुपार्श्वसे सन्न्रतिका जन्म हुआ। सन्न्रतिका पुत्र कृत तथा कृतका पुत्र उग्रायुध था। उग्रायुधसे क्षेम्य नामक पुत्र हुआ। उसका पुत्र सुधीर था। सुधीरसे पुरञ्जय, पुरञ्जयसे विदूरथ नामके पुत्रने जन्म लिया।
अजमीढकी नलिनी नामकी एक पत्नी थी। उसके गर्भसे राजा नीलकी उत्पत्ति हुई। नीलसे शान्ति नामका पुत्र हुआ। उसका पुत्र सुशान्ति था। सुशान्तिके पुरु हुआ। पुरुका पुत्र अर्क, अर्कका हर्यश्व, हर्यश्वका मुकुल और मुकुलके यवीर, बृहद्भानु, कम्पिल्ल, सृञ्जय एवं शरद्वान् नामक पाँच पुत्र हुए। इनमें शरद्वान् परम वैष्णव था। इस शरद्वान्के अहल्या नामकी पत्नीसे दिवोदास नामक पुत्र हुआ। उसके शतानन्द हुए। शतानन्दके सत्यधृति हुआ। सत्यधृतिके उर्वशीसे कृप तथा कृपी नामक दो संतानें हुईं। कृपीका विवाह द्रोणाचार्यसे हुआ था। उसी कृपीसे द्रोणाचार्यके अश्वत्थामा नामक श्रेष्ठ पुत्र उत्पन्न हुए।
दिवोदासके मित्रयु और मित्रयुके च्यवन नामका पुत्र था। च्यवनसे सुदास, सुदाससे सौदास नामक पुत्र हुआ। उसका पुत्र सहदेव था। सहदेवसे सोमक, सोमकसे जन्तु (जह्नु) और पृषत नामक महान् पुत्र उत्पन्न हुआ। पृषतसे द्रुपद, द्रुपदसे धृष्टद्युम्नकी उत्पत्ति हुई। धृष्टद्युम्नसे धृष्टकेतु हुआ।
अजमीढके एक ऋक्ष नामका पुत्र था। उस ऋक्षसे संवरण, संवरणसे कुरुका जन्म हुआ। कुरुके सुधनु, परीक्षित् और जह्नु नामके तीन पुत्र थे। सुधनुसे सुहोत्र तथा सुहोत्रसे च्यवन, च्यवनसे कृतक तथा उपरिचर वसु हुए। वसुके बृहद्रथ, प्रत्यग्र और सत्य आदि अनेक पुत्र थे। बृहद्रथसे कुशाग्र, कुशाग्रसे ऋषभ, ऋषभसे पुष्पवान् तथा उस पुष्पवान्से सत्यहित नामका राजा हुआ। सत्यहितसे सुधन्वा, सुधन्वासे जह्नुकी उत्पत्ति हुई।
बृहद्रथका एक अन्य पुत्र था, जिसका नाम जरासन्ध था। उस जरासन्धसे सहदेव, सहदेवसे सोमापि, सोमापिसे श्रुतवान्, भीमसेन, उग्रसेन, श्रुतसेन तथा जनमेजय हुए। जह्नुके सुरथ नामक पुत्र था। सुरथके विदूरथ, विदूरथके सार्वभौम, सार्वभौमके जयसेन तथा उस जयसेनसे अवधीत हुआ। उस अवधीतसे अयुतायु, अयुतायुसे अक्रोधन, अक्रोधनसे अतिथि, अतिथिसे ऋक्ष, ऋक्षसे भीमसेन, भीमसेनसे दिलीप, दिलीपसे प्रतीप, प्रतीपसे देवापि, शान्तनु और बाह्लीक नामके राजा तीन सहोदर भ्राता हुए।
बाह्लीकसे सोमदत्त हुआ। सोमदत्तसे भूरि और भूरिसे भूरिश्रवाकी उत्पत्ति हुई। इस भूरिश्रवाका पुत्र शल था। गङ्गाके गर्भसे शान्तनुके महाप्रतापी धर्मपरायण पुत्र भीष्म हुए। उस शान्तनुकी दूसरी पत्नी सत्यवतीसे चित्राङ्गद और विचित्रवीर्य नामक अन्य दो पुत्रोंका जन्म हुआ। विचित्रवीर्यकी दो पत्नियाँ थीं, जिनका अम्बिका तथा अम्बालिका नाम था। व्यासजीने अम्बिकासे धृतराष्ट्रको, अम्बालिकासे पाण्डुको तथा उनकी दासीसे विदुरजीको पैदा किया।
धृतराष्ट्रने गान्धारीसे दुर्योधनादि सौ पुत्रोंको उत्पन्न किया। पाण्डुसे युधिष्ठिर आदि पाँच पुत्र हुए। द्रौपदीसे क्रमशः प्रतिविन्ध्य, श्रुतसोम, श्रुतकीर्ति, शतानीक और श्रुतकर्मा नामक पाँच पुत्रोंका जन्म हुआ। यौधेयी, हिडिम्बा, कौशी, सुभद्रिका (सुभद्रा), विजया तथा रेणुमती नामकी पत्नियाँ भी थीं। इनके गर्भसे देवक, घटोत्कच, अभिमन्यु, सर्वग, सुहोत्र और निरमित्र नामक पुत्र हुए। अभिमन्युके परीक्षित् तथा परीक्षित्के जनमेजय नामका पुत्र हुआ।
(अध्याय १३९-१४०)