गरुड़ पुराण
Garuda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
१२१- रामचरितवर्णन (रामायणकी कथा)
२३८ संक्षिप्त गरुडपुराण [ आचार-
नेदिष्ठ नामक एक पुत्रकी उत्पत्ति हुई। उससे
अम्बरीष हुआ। अम्बरीषके विरूप, विरूपके पृषदश्व
और उसके रथीनर हुआ, जो वासुदेवका भक्त था।
मनुपुत्र इक्ष्वाकुके विकुक्षि, निमि और दण्डक
तीन पुत्र हुए। विकुक्षि यज्ञीय शशक (खरगोश)-
का भक्षण करनेके कारण शशाद नामसे विख्यात
हुआ। शशादसे पुरञ्जय और ककुत्स्थ नामक दो
पुत्र हुए। इसी ककुत्स्थसे अनेनस् (वेण) तथा
अनेनस्से पृथु उत्पन्न हुआ। पृथुके विश्वरात नामक
पुत्र हुआ। विश्वरातसे आर्द्रकी उत्पत्ति हुई। आर्द्रसे
युवनाश्व, युवनाश्वके श्रीवत्स, श्रीवत्सके बृहदश्व,
बृहदश्वके कुवलाश्व और कुवलाश्वके दृढाश्व हुआ,
जिसकी प्रसिद्धि धुन्धुमारके नामसे हुई थी।
दृढाश्वके चन्द्राश्व, कपिलाश्व और हर्यश्व नामक
तीन पुत्र थे। हर्यश्वके निकुम्भ, निकुम्भके हिताश्व,
हिताश्वके पूजाश्व और उसके युवनाश्व हुआ।
युवनाश्वके मान्धाता हुए। मान्धाता एवं उनकी
पत्नी बिन्दुमतीसे मुचुकुन्द, अम्बरीष तथा पुरुकुत्स
नामक तीन पुत्रोंका जन्म हुआ। उनकी पचास
कन्याएँ भी थीं। जिनका विवाह सौभरि मुनिके
साथ हुआ था।
अम्बरीषके युवनाश्व तथा युवनाश्वके हरित
हुआ। पुरुकुत्सके नर्मदा नामक पत्नीसे त्रसदस्यु
नामक पुत्रकी उत्पत्ति हुई। उससे अनरण्य, अनरण्यसे
हर्यश्व, हर्यश्वसे वसुमना हुआ। उसीका पुत्र त्रिधन्वा
था। उसके त्रय्यारुण नामक पुत्र हुआ। त्रय्यारुणके
सत्यरत हुआ, जो त्रिशंकु नामसे प्रसिद्ध है।
हरिश्चन्द्र इसीसे उत्पन्न हुए थे। हरिश्चन्द्रके
रोहिताश्व और रोहिताश्वके हारीत हुआ। हारीतके
चंचु, चंचुके विजय, विजयके रुरुक, रुरुकके
वृक, वृकके राजा बाहु और बाहुके पुत्र राजा
सगर माने जाते हैं।
हे शिव! सगरसे सुमति नामक पत्नीके साठ
हजार पुत्र हुए। उनकी दूसरी पत्नी केशिनीसे
असमंजस नामक एक पुत्र हुआ। उस असमंजससे
अंशुमान् तथा अंशुमान्से दिलीप नामक एक
विद्वान् पुत्रने जन्म लिया। दिलीपसे भगीरथ हुए,
जिनके द्वारा पृथिवीपर गङ्गा लायी गयी हैं।
भगीरथका पुत्र श्रुत था। श्रुतसे नाभाग हुआ।
नाभागसे अम्बरीष, अम्बरीषसे सिन्धुद्वीप, सिन्धुद्वीपसे
अयुतायु हुआ। अयुतायुका पुत्र ऋतुपर्ण था, ऋतुपर्णसे
सर्वकाम और सर्वकामसे सुदास, सुदाससे सौदास
हुआ। जिसका नाम मित्रसह भी माना जाता है।
कल्माषपाद उसीका पुत्र है, जो दमयन्तीके गर्भसे
उत्पन्न हुआ था। कल्माषपादके अश्मक, अश्मकके
मूलक, मूलकके दशरथ हुआ। दशरथके
ऐलविल, ऐलविलके विश्वसह, विश्वसहके खट्वाङ्ग,
खट्वाङ्गके दीर्घबाहु, दीर्घबाहुके अज तथा अजके
दशरथ हुए। इनके महापराक्रमी चार पुत्र हुए, जो
राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न नामसे प्रसिद्ध हैं।
रामसे कुश और लव, भरतसे तार्क्ष तथा
पुष्कर, लक्ष्मणसे चित्राङ्गद एवं चन्द्रकेतु और
शत्रुघ्नसे सुबाहु तथा शूरसेन नामक पुत्र हुए।
कुशके अतिथि, अतिथिके निषध नामक पुत्र
हुआ। निषधके नल तथा नलके नभस नामका पुत्र
माना गया है। नभसके पुण्डरीक और पुण्डरीकसे
क्षेमधन्वा नामक पुत्रने जन्म लिया। उसका पुत्र
देवानीक था, उससे अहीनक, अहीनकसे रुरु तथा
रुरुसे पारियात्र नामक पुत्रका जन्म हुआ। पारियात्रसे
दलकी उत्पत्ति हुई और दलसे छल, छलसे उक्थ,
उक्थसे वज्रनाभ और वज्रनाभसे गण, गणसे उषिताश्व,
उषिताश्वसे विश्वसहकी उत्पत्ति हुई। हिरण्यनाभ
उसीका पुत्र था। उसका पुत्र पुष्प्य माना गया है।
पुष्प्यसे ध्रुवसन्धि, ध्रुवसन्धिसे सुदर्शन, सुदर्शनसे
अग्निवर्ण, अग्निवर्णसे पद्मवर्ण हुआ। पद्मवर्णसे
शीघ्र और शीघ्रसे मरु हुए। मरुसे सुश्रुत और
काण्ड ] चन्द्रवंशवर्णन २३९
उससे उदावसु नामका पुत्र उत्पन्न हुआ। उदावसुसे नन्दिवर्धन, नन्दिवर्धनसे सुकेतु, सुकेतुसे देवरातकी उत्पत्ति हुई। देवरातका पुत्र बृहदुक्थ था। बृहदुक्थके महावीर्य, महावीर्यके सुधृति, सुधृतिके धृष्टकेतु, धृष्टकेतुके हर्यश्व, हर्यश्वके मरु, मरुके प्रतीन्धक हुआ। प्रतीन्धकसे कृतिरथ और कृतिरथके देवमीढ नामक पुत्र हुआ। देवमीढसे विबुध, विबुधसे महाधृति, महाधृतिसे कीर्तिरात तथा कीर्तिरातसे महारोमा नामक पुत्र हुआ।
महारोमाके स्वर्णरोमा हुए। स्वर्णरोमाके ह्रस्वरोमा नामका पुत्र था। ह्रस्वरोमाके सीरध्वज हुआ। उसके सीता नामकी एक पुत्री हुई। सीरध्वजके कुशध्वज नामका एक भाई भी था। सीताके अतिरिक्त सीरध्वजके भानुमान् नामका एक पुत्र भी हुआ। उस भानुमान्से शतद्युम्न, शतद्युम्नसे शुचि नामक पुत्रकी उत्पत्ति हुई। शुचिके ऊर्ज नामक पुत्र था। उस ऊर्जसे सनद्वाज उत्पन्न हुआ। सनद्वाजसे कुलिने जन्म लिया। उस कुलिस अनञ्जन नामक पुत्र हुआ। अनञ्जनसे कुलजित्की उत्पत्ति हुई। उसके भी आधिनमिक नामका पुत्र था। उसका पुत्र श्रुतायु हुआ और उस श्रुतायुसे सुपार्श्व नामक पुत्रने जन्म ग्रहण किया। सुपार्श्वसे सृञ्जय, सृञ्जयसे क्षेमारि, क्षेमारिसे अनेना और उस अनेनाका पुत्र रामरथ माना गया है।
रामरथका पुत्र सत्यरथ, सत्यरथका पुत्र उपगुरु, उपगुरुका उपगुप्त तथा उपगुप्तका पुत्र स्वागत था। स्वागतसे स्ववरकी उत्पत्ति हुई। सुवर्चा उसीका पुत्र था। सुवर्चासे सुपार्श्व और सुपार्श्वसे सुश्रुत, सुश्रुतसे जयकी उत्पत्ति हुई। जयसे विजय, विजयसे ऋत, ऋतसे सुनय, सुनयसे वीतहव्य, वीतहव्यसे धृतिकी उत्पत्ति मानी गयी है। धृतिके बहुलाश्व और बहुलाश्वके कृति नामक पुत्र था। उस कृतिके जनक हुए। जनकके दो वंश कहे गये हैं, जिन्होंने योगमार्गका अनुसरण किया था। (अध्याय १३८)
चन्द्रवंशवर्णन
**श्रीहरिने कहा—**हे रुद्र! सूर्यके वंशका वर्णन तो मैंने कर दिया। अब मुझसे चन्द्रवंशका वर्णन आप सुनें।
नारायण (विष्णु)-से ब्रह्मा प्रादुर्भूत हुए। ब्रह्मासे अत्रिकी उत्पत्ति हुई। अत्रिसे सोम हुए। उनकी पत्नी तारा थी, जो पहले बृहस्पतिकी भी प्रियतमा थी। ताराने चन्द्र (सोम)-से बुधको उत्पन्न किया। उसी बुधका पुत्र पुरूरवा हुआ। बुधपुत्र पुरूरवासे उर्वशीके छः पुत्र हुए, जिनके नाम श्रुतात्मक, विश्वावसु, शतायु, आयु, धीमान् और अमावसु थे।
अमावसुके भीम, भीमके काञ्चन, काञ्चनसे सुहोत्र और सुहोत्रके जह्नु हुए। जह्नुसे सुमन्तु, सुमन्तुसे उपजापक हुआ। उसका पुत्र बलाकाश्व था। बलाकाश्वसे कुश, कुशसे कुशाश्व, कुशनाभ, अमूर्तरय और वसु नामक चार पुत्र हुए। कुशाश्वसे गाधिका जन्म हुआ। विश्वामित्र उसीके पुत्र थे। गाधिकी सत्यवती नामकी एक कन्या थी। उसको उन्होंने ब्राह्मण ऋचीकको सौंप दिया। ऋचीकके जमदग्नि नामक पुत्र हुआ। जमदग्निसे परशुराम हुए। विश्वामित्रसे देवरात तथा मधुच्छन्दा आदि अनेक पुत्रोंका जन्म हुआ।
बुधके पुत्र आयुसे नहुषकी उत्पत्ति हुई। नहुषके अनेना, राजि, रम्भक तथा क्षत्रवृद्ध नामक चार पुत्र हुए। क्षत्रवृद्धका सुहोत्र नामक पुत्र राजा हुआ। सुहोत्रके काश्य, काश और गृत्समद नामक तीन पुत्र हुए। गृत्समदसे शौनक तथा काश्यसे दीर्घतमा हुआ। दीर्घतमासे वैद्य धन्वन्तरिका जन्म हुआ। केतुमान् उन्हींका पुत्र था। केतुमान्से भीमरथ,
२४० संक्षिप्त गरुडपुराण [ आचार-
भीमरथसे दिवोदास, दिवोदाससे प्रतर्दन हुआ, जो शत्रुजित् नामसे विख्यात हुआ।
ऋतध्वज उसी शत्रुजित्का पुत्र था। ऋतध्वजसे अलर्क, अलर्कसे सन्नति, सन्नतिसे सुनीत, सुनीतसे सत्यकेतु, सत्यकेतुसे विभु नामक पुत्र हुआ। विभुसे सुविभु, सुविभुसे सुकुमार, सुकुमारसे धृष्टकेतुकी उत्पत्ति हुई। उस धृष्टकेतुका पुत्र वीतिहोत्र था। वीतिहोत्रके भर्ग और भर्गके भूमिक नामका पुत्र हुआ। ये सभी विष्णुधर्मपरायण राजा थे।
नहुषपुत्र राजि या रजिके पाँच सौ पुत्र थे, जिनका संहार इन्द्रने किया था। नहुषके पुत्र क्षत्रवृद्धसे प्रतिक्षत्र हुए। उसका पुत्र संजय था। संजयके भी विजय हुआ। विजयका पुत्र कृत था। कृतके वृषधन, वृषधनसे सहदेव, सहदेवसे अदीन और अदीनके जयत्सेन हुआ। जयत्सेनसे संकृति और संकृतिसे क्षत्रधर्माकी उत्पत्ति हुई।
नहुषके क्रमशः यति, ययाति, संयाति, अयाति तथा विकृति नामक अन्य पाँच पुत्र थे। ययातिसे देवयानीने यदु और तुर्वसु नामक दो पुत्रोंको जन्म दिया। राजा वृषपर्वाकी पुत्री शर्मिष्ठाने ययातिसे द्रुह्यु, अनु और पूरु नामक तीन पुत्रोंको उत्पन्न किया।
यदुके सहस्त्रजित्, क्रोष्टुमना और रघु नामक तीन पुत्र थे। सहस्त्रजित्से शतजित्, शतजित्से हय तथा हैहय नामक दो पुत्र हुए। हयसे अनरण्य तथा हैहयसे धर्म हुआ। धर्मका पुत्र धर्मनेत्र हुआ। उस धर्मनेत्रका पुत्र कुन्ति था। कुन्तिसे साहंजि हुआ। साहंजिसे महिष्मान्, महिष्मान्से भद्रश्रेण्य, भद्रश्रेण्यसे दुर्दमकी उत्पत्ति हुई। दुर्दमसे धनक, कृतवीर्य, जानकि, कृताग्नि, कृतवर्मा और कृतौजा नामक छह बलवान् पुत्र हुए। कृतवीर्यसे अर्जुन तथा अर्जुनसे शूरसेन नामक पुत्र हुआ। उस पुत्रके अतिरिक्त कृतवीर्यके जयध्वज, मधु, शूर और वृषण नामक चार पुत्र हुए। शूरसेनसहित ये पाँचों पुत्र बड़े ही सुव्रती थे। जयध्वजसे तालजंघ, तालजंघसे भरत हुआ। कृतवीर्य वृषणका पुत्र मधु था। मधुसे वृष्णि हुआ, जिससे वृष्णिवंशियोंकी उत्पत्ति हुई।
क्रोष्टुके विजज्ञिवान् हुआ। उस विजज्ञिवान्का पुत्र आहि था। आहिसे उशंकु हुआ। उसका पुत्र चित्ररथ था। चित्ररथसे शशबिन्दु हुआ, जिसके एक लाख पत्नियाँ तथा पृथुकीर्ति, पृथुजय, पृथुदान, पृथुश्रवा आदि श्रेष्ठ दस लाख पुत्र थे। पृथुश्रवासे तम, तमसे उशना हुआ। उसका पुत्र शितगु था। तत्पश्चात् उसके श्रीरुक्मकवच हुआ। श्रीरुक्मकवचसे रुक्म, पृथुरुक्म, ज्यामघ, पालित और हरि—ये चार पुत्र हुए। ज्यामघसे विदर्भका जन्म हुआ।
विदर्भकी शैब्या नामकी एक पत्नी थी, उससे विदर्भने क्रथ, कौशिक तथा रोमपाद नामक तीन पुत्रोंको जन्म दिया। रोमपादसे बभ्रु और बभ्रुसे धृति हुआ।
कौशिकके ऋचि नामक पुत्र था। उसीसे चेदि नामका राजा हुआ। इसका पुत्र कुन्ति था। कुन्तिसे वृष्णि नामक पुत्र हुआ। वृष्णिसे निवृत्ति, निवृत्तिसे दशार्ह, दशार्हसे व्योम और व्योमसे जीमूत नामका पुत्र हुआ। जीमूतसे विकृतिका जन्म हुआ। उस विकृतिका पुत्र भीमरथ था। भीमरथसे मधुरथ और मधुरथसे शकुनि उत्पन्न हुआ। शकुनिका पुत्र करम्भि था। उस करम्भिका पुत्र देवमान् माना जाता है। देवमान् या देवनतसे देवक्षत्र तथा देवक्षत्रसे मधु नामक पुत्र हुआ। मधुसे कुरुवंश, कुरुवंशसे अनु, अनुसे पुरुहोत्र, पुरुहोत्रसे अंशु, अंशुसे सत्त्वश्रुत और उससे सात्वत नामका राजा हुआ।
सात्वतके भजिन्, भजमान्, अन्धक, महाभोज, वृष्णि, दिव्यावन्य तथा देवावृध नामक सात पुत्र हुए। भजमान्से निमि, वृष्णि, अयुताजित्, शतजित्, सहस्त्राजित्, बभ्रु, देव और बृहस्पति नामके पुत्र हुए।