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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

महर्षि शुक्राचार्य द्वारा

स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)

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DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

इस ग्रन्थ के बारे में

'शुक्रनीति' (शुक्रनीतिसार) राजनीति और शासन-व्यवस्था का संस्कृत ग्रन्थ है, जो असुरों के गुरु शुक्राचार्य के नाम से प्रसिद्ध है। इसमें राजा के कर्तव्य, मन्त्रियों और अधिकारियों की नियुक्ति, राजकोष, कर-व्यवस्था, न्याय, दुर्ग, सेना और युद्ध-नीति के साथ-साथ लोक-व्यवहार, नगर-रचना और प्रतिमा-निर्माण जैसे विषय भी आते हैं। ग्रन्थ के समय पर विद्वानों में मतभेद है; इसमें आग्नेय अस्त्रों (नालिका) के वर्णन के कारण कई विद्वान इसके वर्तमान रूप को अपेक्षाकृत बाद का मानते हैं।

इस संस्करण में मूल श्लोकों के साथ 'विद्योतिनी' नाम की हिन्दी व्याख्या है। यह काशी संस्कृत ग्रन्थमाला (संख्या १८५) में चौखम्बा संस्कृत सीरीज़ ऑफ़िस, वाराणसी से विक्रम संवत् २०२५ में पहली बार प्रकाशित हुआ। व्याख्याकार का नाम आरम्भिक पृष्ठों में नहीं आया है। स्कैन वाराणसी के मुमुक्षु भवन वेद-वेदांग पुस्तकालय की प्रति से है।

ग्रन्थ अध्याय-क्रम से चलता है। उदाहरण के लिए दूसरे अध्याय में राज-सेवकों के वेतन और उनके पालन के नियम हैं, जैसे सेवक के वेतन का छठा या चौथा भाग उसके लिए सुरक्षित रखना। ५२६ पृष्ठों का यह ग्रन्थ प्राचीन भारतीय राजनीति-शास्त्र के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है।

(इस पृष्ठ पर छपा हुआ मूल पाठ अत्यधिक धुंधला (faded) होने के कारण स्पष्ट रूप से पठनीय नहीं है।)

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नवीन प्रकाशन

१ अथर्ववेद-परिशिष्ट । संपादक जार्ज मेलवीन बोलिङ्ग तथा जुलियर फ़ॉन नेजलीन, हिन्दी-टिप्पणियों सहित । सम्पादक-डॉ० रामकुमारराय १५-००

२ तत्त्वप्रकाशः । धाराधीश्वरभोजकृतः तात्पर्यदीपिका-वृत्ति-व्याख्योभय-हिन्दीभाषानुवादसहित । सम्पादक-डॉ० कामेश्वरनाथ मिश्र ३०-००

३ मन्त्रयोगसंहिता । मूल तथा आंग्लानुवादसहित । सम्पादक-डॉ० रामकुमार राय १५-००

४ सरस्वतीकण्ठाभरणम् । महाराजाधिराजभोजकृतं (चित्रप्रकरण-सहितम्) प्रथमोभागः । रत्नदर्पणाख्यसंस्कृत-स्वरूपानन्दभाष्यनाम हिन्दी व्याख्याद्वयोपेतम् । व्याख्याकार-डॉ० कामेश्वरनाथ मिश्र ३५-००

५ तत्त्वप्रभावती । श्री श्रीश्वेतायनीयं विशिष्टं न्यायशास्त्रम् । पण्डितधुरन्धर-धो० कृष्णवल्लभाचार्यस्वामीनारायणविरचितम् ५-००

६ श्रीयुगलशतदलम् । (श्रीराधाकृष्णयुगलीयं रहस्यं गीतिकाव्यम्) श्रीसत्यव्रत शर्मा 'सुजन', शास्त्री ४०-००

७ आङ्ग्लरोमाञ्च । अंग्रेजी मूल तथा संस्कृत अनुवादसहित । डॉ० हरिहर वि० त्रिवेदी तथा लक्ष्मीनारायण ओ० जोशी १५-००

८ वेदान्तसिद्धान्तमुक्तावली । प्रकाशानन्दकृतं अंग्रेजी अनुवाद तथा टिप्पणीसहित । सम्पादक आर्थर वेनिस २५-००

९ संगीत का विकास और विभूतियां । प्रो०-श्रीपदबन्द्योपाध्याय ६-००

१० श्रीमद्भगवद्गीता । श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्य-मधुसूदनसरस्वती विरचित गूढार्थदीपिकाव्याख्यासहिता महामहोपाध्याय पण्डित श्रीहरिनामकृपालुद्विवेदीना कृततत्त्वविवेचनापरं सटिप्पण हिन्दी भाषानुवादसमलंकृता पण्डित श्रीकान्तदत्त शर्मणा संपादिता च ५०-००

११ मेघदूतम् । कालिदास कृत कात्यायनी संस्कृत व्याख्या तथा अनुवाद सहित, आलोचनात्मक विस्तृत भूमिका सहित २०-००

१२ भारतीयदर्शन । (भारतवर्ष की समस्त दार्शनिक वैदिक और तान्त्रिकविचारधाराओं का प्रामाणिक विवरण) सभी विश्वविद्यालयों में बी० ए०, एम० ए० के पाठ्यग्रन्थ, लेखक आचार्य बलदेव उपाध्याय ३५-००


प्राप्तिस्थान—चौखम्बा संस्कृत संस्थान, वाराणसी